Eid- Al-Adha: दुनियाभर के मुसलमान इस समय ईद-उल-अज़हा यानी बकरीद के पवित्र पर्व की तैयारियों में जुटे हुए हैं। यह इस्लाम धर्म के दो प्रमुख त्योहारों में से एक है, जिसे ईद-उल-फित्र के साथ बड़े उत्साह और श्रद्धा से मनाया जाता है। इस्लामी चंद्र कैलेंडर के अनुसार ईद-उल-अज़हा जुल हिज्जा महीने में मनाई जाती है। यह इस्लामी वर्ष का अंतिम महीना होता है। इसी महीने में हज यात्रा भी होती है, जिसमें लाखों श्रद्धालु मक्का की पवित्र यात्रा करते हैं। जुल हिज्जा की शुरुआत चांद दिखाई देने के बाद होती है। इसके साथ ही इस पवित्र पर्व का माहौल पूरे मुस्लिम समुदाय में बन जाता है। आइए जानते हैं कि भारत और सऊदी अरब में किस दिन मनाई जाएगी बकरीद।
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बकरीद
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सऊदी अरब में कब मनाई जाएगी बकरीद?
सऊदी अरब की सुप्रीम कोर्ट और संयुक्त अरब अमीरात , कुवैत, कतर, जॉर्डन, भारत और पाकिस्तान समेत कई देशों की चांद दर्शन समितियों ने अपने-अपने देशों में ईद-उल-अज़हा 2026 की तारीखों की पुष्टि कर दी है। सऊदी कोर्ट द्वारा जारी बयान के अनुसार वर्ष 2026 में ईद-उल-अज़हा बुधवार, 27 मई को मनाई जाएगी।
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किन देशों में 27 मई को मनाई जाएगी बकरीद?
कई देशों में बकरीद बुधवार, 27 मई 2026 को मनाई जाएगी। इनमें सऊदी अरब, ओमान, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), कुवैत, कतर, इंडोनेशिया, मलेशिया, पाकिस्तान, ट्यूनिस, तुर्किये, जॉर्डन, अफ़ग़ानिस्तान, अमेरिका, कनाडा, सिंगापुर, न्यूज़ीलैंड, ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, जर्मनी और यूनाइटेड किंगडम शामिल हैं।
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भारत में कब मनाई जाएगी बकरीद?
भारत, ब्रुनेई और बांग्लादेश में ईद-उल-अज़हा गुरुवार, 28 मई 2026 को मनाई जाएगी।
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बकरीद का महत्व
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बकरीद का महत्व
ईद-उल-अज़हा, जिसे बकरीद कहा जाता है, इस्लाम धर्म का एक अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण त्योहार है। इसे पूरी दुनिया में मुसलमान बड़े श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाते हैं। यह पर्व हजरत इब्राहिम की उस महान कुर्बानी की याद दिलाता है, जिसमें उन्होंने अल्लाह के आदेश का पालन करते हुए अपने बेटे की कुर्बानी देने का संकल्प लिया था। इस्लामी मान्यता के अनुसार, हजरत इब्राहिम ने जब अल्लाह के आदेश को स्वीकार किया, तो उनकी निष्ठा और आस्था को देखकर अल्लाह ने उनके बेटे की जगह एक जानवर को कुर्बानी के लिए भेज दिया। इसी घटना की याद में मुसलमान हर साल यह पर्व मनाते हैं और अल्लाह के प्रति अपनी आस्था प्रकट करते हैं। इस दिन लोग नमाज अदा करते हैं, कुर्बानी करते हैं और दान-पुण्य के कार्यों में हिस्सा लेते हैं।