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शारदीय नवरात्रि 2026: नवमी पर करें मां सिद्धिदात्री की आराधना, जानें स्वरूप, महत्व, पूजाविधि और मंत्र
Sun, 18 Oct 2026 03:53 PM IST
विनोद शुक्ला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Sun, 18 Oct 2026 03:53 PM IST
सार
नवरात्रि के नौवे दिन मां दुर्गा के नवम स्वरूप मां सिद्धिदात्री की पूजा- आराधना की जाती है। मां सिद्धिदात्री की आराधना करने से जीवन में सुख-शांति, समृद्धि और खुशहाली का आशीर्वाद प्राप्त होता है।आइए जानते हैं देवी का स्वरूप, पूजन विधि, मंत्र, आरती, पौराणिक कथा ।
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Shardiya Navratri 2026
- फोटो : अमर उजाला AI
विस्तार
शारदीय नवरात्रि के नौवें दिन 19 अक्तूबर को मां दुर्गा के नौवें स्वरूप मां सिद्धिदात्री की पूजा-अर्चना की जाएगी। नवरात्रि की नवमी तिथि पर देवी के इस दिव्य स्वरूप की उपासना का विशेष महत्व माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां सिद्धिदात्री अपने भक्तों को आठ सिद्धियां और नौ निधियां प्रदान करती हैं। उनकी आराधना से सुख-समृद्धि, ज्ञान और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है। मान्यता है कि सच्चे मन से मां की पूजा करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन में सकारात्मकता आती है। आइए जानते हैं मां सिद्धिदात्री का स्वरूप, पूजा का महत्व, विधि और मंत्र।
मां सिद्धिदात्री का दिव्य स्वरूप
मां सिद्धिदात्री का स्वरूप अत्यंत दिव्य और कल्याणकारी माना जाता है। देवी की चार भुजाएं हैं। उनके दाहिने हाथ में चक्र और गदा, जबकि बाएं हाथों में शंख और कमल का फूल सुशोभित है। मां सिंह की सवारी करती हैं और कमल के आसन पर भी विराजमान दिखाई देती हैं। देवी का यह स्वरूप ज्ञान, शक्ति और सिद्धियों का प्रतीक है। मां सिद्धिदात्री को देवी सरस्वती का स्वरूप भी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, उनकी कृपा से भगवान शिव को समस्त सिद्धियां प्राप्त हुई थीं। मां की शक्ति से ही भगवान शिव का आधा शरीर देवी का हुआ, जिसके बाद वे अर्द्धनारीश्वर कहलाए। मां सिद्धिदात्री की आराधना से भक्तों को ज्ञान, विवेक और आध्यात्मिक उन्नति का आशीर्वाद मिलता है।
मां सिद्धिदात्री की पूजा का महत्व
नवरात्रि के नौवें दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा करने का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवी की उपासना से साधक को आठ सिद्धियों और नौ निधियों की प्राप्ति का आशीर्वाद मिलता है। मां की कृपा से जीवन में सुख-समृद्धि, मान-सम्मान और यश की प्राप्ति होती है। मां सिद्धिदात्री की आराधना को ज्ञान, बुद्धि और विवेक बढ़ाने वाला भी माना जाता है। भक्त इस दिन विधि-विधान से पूजा करके देवी से सुखी और समृद्ध जीवन की कामना करते हैं। नवमी तिथि पर कन्या पूजन करने की भी परंपरा है। मान्यता है कि कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर उनकी पूजा और सेवा करने से मां दुर्गा प्रसन्न होती हैं।
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मां सिद्धिदात्री की पूजा विधि
- नवमी तिथि पर सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद मां सिद्धिदात्री का ध्यान करते हुए व्रत और पूजा का संकल्प लें।
- सबसे पहले कलश और उसमें विराजमान देवी-देवताओं का ध्यान करके पूजा करें।
- मां सिद्धिदात्री को रोली, कुमकुम, अक्षत, पुष्प और चुनरी अर्पित करें। इसके बाद धूप-दीप जलाकर श्रद्धापूर्वक पूजा करें।
- मां को हलवा, पूरी, चना, खीर और नारियल आदि का भोग लगाएं। इसके बाद देवी के मंत्रों का जाप करें।
- पूजा के बाद नौ कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर उनका पूजन करें। परंपरा के अनुसार, कन्याओं को भोजन कराएं और सामर्थ्य के अनुसार उपहार या दक्षिणा देकर उनका आशीर्वाद लें।
- अंत में मां सिद्धिदात्री की आरती करें और परिवार की सुख-समृद्धि तथा कल्याण की कामना करें।
मां सिद्धिदात्री का पूजा मंत्र
नवरात्रि की नवमी तिथि पर मां सिद्धिदात्री की पूजा के दौरान इस मंत्र का जाप किया जा सकता है।
सिद्धगन्धर्वयक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि।
सेव्यमाना सदा भूयात् सिद्धिदा सिद्धिदायिनी॥
मां सिद्धिदात्री से जुड़ी पौराणिक मान्यता
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, प्राचीन काल में जब महिषासुर के अत्याचार बढ़ने लगे, तब देवता उसकी शक्ति से परेशान हो गए। संकट से मुक्ति पाने के लिए सभी देवता भगवान शिव और भगवान विष्णु के पास पहुंचे। इस दौरान देवताओं के तेज से एक दिव्य शक्ति प्रकट हुई। इसी देवी को मां दुर्गा के शक्तिशाली स्वरूपों में से एक माना जाता है। मां सिद्धिदात्री को सभी सिद्धियों को प्रदान करने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है। देवी के इस स्वरूप की आराधना से साधक आध्यात्मिक शक्ति, ज्ञान और विवेक प्राप्त करने की कामना करते हैं। नवरात्रि की नवमी पर उनकी पूजा के साथही नौ दिनों की देवी साधना का समापन होता है।
मां सिद्धिदात्री की आरती
जय सिद्धिदात्री तू सिद्धि की दाता!!
तू भक्तों की रक्षक
तू दासों की माता!!
तेरा नाम लेते ही मिलती है सिद्धी
तेरे नाम से मन की होती है शुद्धि!!
कठिन काम सिद्ध कराती हो तुम
हाथ सेवक के सिर धरती हो तुम!!
तेरी पूजा में न कोई विधि है
तू जगदंबे दाती, तू सर्वसिद्धी है!!
रविवार को तेरा सुमरिन करे जो
तेरी मूर्ति को ही मन में धरे जो !!
तू सब काम कराती है उसके पूरे
कभी काम उसके रहे न अधूरे!!
तुम्हारी दया और तुम्हारी यह माया
रखे जिसके सर पर मैया अपनी छाया!!
सर्व सिद्धी दाती वह है भाग्यशाली
जो है तेरे दर का ही मां अंबे सवाली!!
हिमाचल है पर्वत जहां वास तेरा
महानंदा मंदिर में है वास तेरा!!
मुझे आसरा तुम्हारा ही माता
भक्ति है सवाली तू जिसकी दाता!!
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मां सिद्धिदात्री का दिव्य स्वरूप
मां सिद्धिदात्री का स्वरूप अत्यंत दिव्य और कल्याणकारी माना जाता है। देवी की चार भुजाएं हैं। उनके दाहिने हाथ में चक्र और गदा, जबकि बाएं हाथों में शंख और कमल का फूल सुशोभित है। मां सिंह की सवारी करती हैं और कमल के आसन पर भी विराजमान दिखाई देती हैं। देवी का यह स्वरूप ज्ञान, शक्ति और सिद्धियों का प्रतीक है। मां सिद्धिदात्री को देवी सरस्वती का स्वरूप भी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, उनकी कृपा से भगवान शिव को समस्त सिद्धियां प्राप्त हुई थीं। मां की शक्ति से ही भगवान शिव का आधा शरीर देवी का हुआ, जिसके बाद वे अर्द्धनारीश्वर कहलाए। मां सिद्धिदात्री की आराधना से भक्तों को ज्ञान, विवेक और आध्यात्मिक उन्नति का आशीर्वाद मिलता है।
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मां सिद्धिदात्री की पूजा का महत्व
नवरात्रि के नौवें दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा करने का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवी की उपासना से साधक को आठ सिद्धियों और नौ निधियों की प्राप्ति का आशीर्वाद मिलता है। मां की कृपा से जीवन में सुख-समृद्धि, मान-सम्मान और यश की प्राप्ति होती है। मां सिद्धिदात्री की आराधना को ज्ञान, बुद्धि और विवेक बढ़ाने वाला भी माना जाता है। भक्त इस दिन विधि-विधान से पूजा करके देवी से सुखी और समृद्ध जीवन की कामना करते हैं। नवमी तिथि पर कन्या पूजन करने की भी परंपरा है। मान्यता है कि कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर उनकी पूजा और सेवा करने से मां दुर्गा प्रसन्न होती हैं।
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मां सिद्धिदात्री की पूजा विधि
- नवमी तिथि पर सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद मां सिद्धिदात्री का ध्यान करते हुए व्रत और पूजा का संकल्प लें।
- सबसे पहले कलश और उसमें विराजमान देवी-देवताओं का ध्यान करके पूजा करें।
- मां सिद्धिदात्री को रोली, कुमकुम, अक्षत, पुष्प और चुनरी अर्पित करें। इसके बाद धूप-दीप जलाकर श्रद्धापूर्वक पूजा करें।
- मां को हलवा, पूरी, चना, खीर और नारियल आदि का भोग लगाएं। इसके बाद देवी के मंत्रों का जाप करें।
- पूजा के बाद नौ कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर उनका पूजन करें। परंपरा के अनुसार, कन्याओं को भोजन कराएं और सामर्थ्य के अनुसार उपहार या दक्षिणा देकर उनका आशीर्वाद लें।
- अंत में मां सिद्धिदात्री की आरती करें और परिवार की सुख-समृद्धि तथा कल्याण की कामना करें।
मां सिद्धिदात्री का पूजा मंत्र
नवरात्रि की नवमी तिथि पर मां सिद्धिदात्री की पूजा के दौरान इस मंत्र का जाप किया जा सकता है।
सिद्धगन्धर्वयक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि।
सेव्यमाना सदा भूयात् सिद्धिदा सिद्धिदायिनी॥
मां सिद्धिदात्री से जुड़ी पौराणिक मान्यता
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, प्राचीन काल में जब महिषासुर के अत्याचार बढ़ने लगे, तब देवता उसकी शक्ति से परेशान हो गए। संकट से मुक्ति पाने के लिए सभी देवता भगवान शिव और भगवान विष्णु के पास पहुंचे। इस दौरान देवताओं के तेज से एक दिव्य शक्ति प्रकट हुई। इसी देवी को मां दुर्गा के शक्तिशाली स्वरूपों में से एक माना जाता है। मां सिद्धिदात्री को सभी सिद्धियों को प्रदान करने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है। देवी के इस स्वरूप की आराधना से साधक आध्यात्मिक शक्ति, ज्ञान और विवेक प्राप्त करने की कामना करते हैं। नवरात्रि की नवमी पर उनकी पूजा के साथही नौ दिनों की देवी साधना का समापन होता है।
मां सिद्धिदात्री की आरती
जय सिद्धिदात्री तू सिद्धि की दाता!!
तू भक्तों की रक्षक
तू दासों की माता!!
तेरा नाम लेते ही मिलती है सिद्धी
तेरे नाम से मन की होती है शुद्धि!!
कठिन काम सिद्ध कराती हो तुम
हाथ सेवक के सिर धरती हो तुम!!
तेरी पूजा में न कोई विधि है
तू जगदंबे दाती, तू सर्वसिद्धी है!!
रविवार को तेरा सुमरिन करे जो
तेरी मूर्ति को ही मन में धरे जो !!
तू सब काम कराती है उसके पूरे
कभी काम उसके रहे न अधूरे!!
तुम्हारी दया और तुम्हारी यह माया
रखे जिसके सर पर मैया अपनी छाया!!
सर्व सिद्धी दाती वह है भाग्यशाली
जो है तेरे दर का ही मां अंबे सवाली!!
हिमाचल है पर्वत जहां वास तेरा
महानंदा मंदिर में है वास तेरा!!
मुझे आसरा तुम्हारा ही माता
भक्ति है सवाली तू जिसकी दाता!!