Amarnath Yatra History: अमरनाथ यात्रा 2025 की शुरुआत 3 जुलाई से हो चुकी है और पहले जत्थे के साथ श्रद्धालुओं का कारवां इस पवित्र तीर्थ की ओर रवाना हो गया है। यह यात्रा 38 दिनों तक चलेगी और रक्षाबंधन के दिन, 9 अगस्त 2025 को सम्पन्न होगी। हिंदू धर्म में इस यात्रा को बेहद पवित्र और तपस्वी तीर्थयात्राओं में से एक माना गया है। हर साल लाखों श्रद्धालु बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए इस कठिन और चुनौतीपूर्ण यात्रा पर निकलते हैं।
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अमरनाथ गुफा तक पहुंचना आसान नहीं होता। रास्ता दुर्गम, मौसम कठोर और ऊंचाई ज्यादा होती है। फिर भी, श्रद्धालुओं की अटूट भक्ति इन सभी कठिनाइयों को पार कर जाती है। अमरनाथ की पौराणिक कथा भगवान शिव और माता पार्वती से जुड़ी है, जिसमें भगवान शिव ने अमरत्व का रहस्य माता पार्वती को इसी गुफा में बताया था। तभी से यह स्थान आस्था, तपस्या और मोक्ष की कामना से जुड़ा हुआ है और हर साल सावन मास में लाखों लोग इस यात्रा में सम्मिलित होते हैं।
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जब अमरत्व का रहस्य सुनाने निकले भोलेनाथ
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भगवान शिव ने अमर कथा के लिए चुनी यह पवित्र गुफा
पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान शिव एक बार माता पार्वती को अमरत्व का रहस्य सुनाना चाहते थे। लेकिन यह रहस्य इतना गुप्त और शक्तिशाली था कि वे इसे किसी भी जीवित प्राणी के सामने प्रकट नहीं करना चाहते थे। इसके लिए उन्हें एक ऐसी जगह की तलाश थी जहाँ पूर्ण एकांत हो। जहाँ न कोई इंसान हो, न पशु, न कोई और जीव। यही वजह थी कि उन्होंने अमरनाथ की गुफा को चुना। कहा जाता है कि शिवजी ने रास्ते में अपने सभी साथियों और प्रतीकों को अलग-अलग स्थानों पर छोड़ दिया। सबसे पहले अपने वाहन नंदी को पहलगाम में, फिर चंद्रमा, नाग, पांचों तत्वों और गणों को भी अलग-अलग स्थानों पर त्यागते हुए वे अंत में केवल माता पार्वती के साथ अमरनाथ गुफा पहुँचे। वहाँ उन्होंने अमर कथा सुनाई थी, जो आज भी भक्तों की गहन श्रद्धा का केंद्र है।
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मरनाथ गुफा में देखे जाते हैं दो कबूतर
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क्या अमर हैं अमरनाथ के कबूतर? जानिए रहस्य
ऐसा कहा जाता है कि जब भगवान शिव माता पार्वती को अमरत्व का रहस्य सुना रहे थे, उस समय एक कबूतरों का जोड़ा भी गुफा में चुपचाप प्रवेश कर गया था। उन्होंने भी वह गूढ़ ज्ञान सुन लिया, जिसे सुनकर कोई भी मृत्यु के चक्र से मुक्त हो सकता है। मान्यता है कि इस ज्ञान को सुनने के कारण वही जोड़ा अमर हो गया और आज भी अमरनाथ गुफा के आसपास उन्हें देखा जा सकता है। श्रद्धालु मानते हैं कि ये कबूतर अमरत्व कथा की सजीव निशानी हैं।
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अमरनाथ गुफा में हर साल बनने वाला शिवलिंग कोई साधारण घटना नहीं, बल्कि एक दिव्य चमत्कार माना जाता है।
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कैसे बनता है बाबा बर्फानी का शिवलिंग?
अमरनाथ गुफा में हर साल बनने वाला शिवलिंग कोई साधारण घटना नहीं, बल्कि एक दिव्य चमत्कार माना जाता है। मान्यता है कि जब भगवान शिव ने माता पार्वती को अमरत्व का गुप्त रहस्य सुनाया था, उसी समय इस गुफा में बर्फ से स्वयंभू शिवलिंग का निर्माण हुआ। गुफा की छत से लगातार टपकने वाली पानी की बूंदें धीरे-धीरे नीचे जमकर बर्फ का आकार लेती हैं और यही बर्फानी शिवलिंग का रूप बन जाता है। ये शिवलिंग श्रावण मास में धीरे-धीरे आकार में बढ़ता है और अमावस्या के बाद इसका आकार कम होने लगता है। इसी कारण इसे श्रद्धा से बाबा बर्फानी कहा जाता है।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।