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Dev Uthani Ekadashi 2020: तुलसी विवाह और भीष्म पितामह से जुड़ा है इस मंदिर का इतिहास, 101 दीपक जलेंगे दिन रात

Wed, 25 Nov 2020 05:31 PM IST
अरविन्द ठाकुर विभू शर्मा, अमर उजाला नेटवर्क, ज्वालामुखी (कांगड़ा)
विभू शर्मा, अमर उजाला नेटवर्क, ज्वालामुखी (कांगड़ा) Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Wed, 25 Nov 2020 05:31 PM IST
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tulsi vivah 2020 and dev uthani ekadashi 2020 panch bhisham 2020 in shakti peeth jwalamukhi temple
- फोटो : अमर उजाला

शक्तिपीठ ज्वालामुखी के प्रसिद्ध मुरली मनोहर मंदिर में बुधवार को कार्तिक माह की देवउठनी एकादशी पर पंच भीष्म का शुभारंभ किया गया। इस दौरान मान्यता के अनुसार मंदिर में दिन रात 101 दीपक पूरे पांच दिन तक दिन रात जलाए जाएंगे। स्थानीय निवासी, श्रद्धालु और मंदिर पुजारी इन दीपकों में दिन रात तेल का दान करते हैं। वर्षों से इस मंदिर में दीप दान किया जाता है। 

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- फोटो : अमर उजाला

ऐसी मान्यता है कि इस मंदिर में पंच भीष्म के दिनों में दर्शन करने से पुत्र प्राप्ति होती है और दीप दान से पितृ दोष भी समाप्त होता है और लक्ष्मी का वास होता है। मुरली मनोहर मंदिर के पुजारी डिंपल शर्मा ने बताया कि पंच भीष्म मनाने के दो कारण हैं, एक तो माता तुलसी का विवाह मुरली मनोहर से इसी दिन हुआ था और महाभारत काल मे जब भीष्म पितामह बाणों की शैया पर लेटे थे, तब उन्होंने पांडवों को पांच दिन तक ज्ञान दिया था। इसी उपलक्ष्य में पंच भीष्म मनाए जाते हैं।

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- फोटो : अमर उजाला

पंच भीष्म का महत्व- पंच भीष्म का हिंदू धर्म में बड़ा ही महत्व है। पुराणों और हिंदू धर्म ग्रंथों में कार्तिक माह में ‘भीष्म पंचक’ व्रत का विशेष महत्व बताया गया है। यह व्रत कार्तिक माह में शुक्ल पक्ष की एकादशी से आरंभ होता है और पूर्णिमा तक चलता है। भीष्म पंचक को ‘पंच भीखू’ के नाम से भी जाना जाता है। धर्म ग्रंथों में कार्तिक स्नान को बहुत महत्व दिया गया है। अत: कार्तिक स्नान करने वाले सभी लोग इस व्रत को करते हैं। भीष्म पितामह ने इस व्रत को किया था। इसलिए यह ‘भीष्म पंचक’ नाम से भी प्रसिद्ध हुआ।

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- फोटो : अमर उजाला

पंच भीष्म का इतिहास- जब महाभारत युद्ध के बाद पांडवों की जीत हो गई, तब श्रीकृष्ण पांडवों को भीष्म पितामह के पास ले गए और उनसे अनुरोध किया कि वे पांडवों को ज्ञान प्रदान करें। शैया पर लेटे हुए सूर्य के उत्तरायण होने की प्रतिक्षा कर रहे भीष्म ने कृष्ण के अनुरोध पर कृष्ण सहित पांडवों को राज धर्म, वर्ण धर्म एवं मोक्ष धर्म का ज्ञान दिया। भीष्म की ओर से ज्ञान देने का क्रम एकादशी से लेकर पूर्णिमा तिथि यानी पांच दिन तक चलता रहा।

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- फोटो : अमर उजाला

भीष्म ने जब पूरा ज्ञान दे दिया, तब श्रीकृष्ण ने कहा कि आपने जो पांच दिन में ज्ञान दिया है, यह पांच दिन आज से अति मंगलकारी हो गए हैं। इन पांच दिनों को भविष्य में ‘भीष्म पंचक’ के नाम से जाना जाएगा और इसी दिन माता तुलसी का विवाह भी मुरली मनोहर श्री कृष्ण वासुदेव से हुआ था, इसलिए तुलसी विवाह से भी इसका इतिहास जुड़ा हुआ है।

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