हिमाचल की चोटियों पर दो दिन बर्फबारी के बाद शनिवार को अधिकतर भागों में मौसम साफ हो गया। कुल्लू, लाहौल-स्पीति, किन्नौर, कांगड़ा, मंडी की चोटियां बर्फ से लकदक हैं। वहीं, मौसम खुलने के बाद रोहतांग में बर्फ का शानदार नजारा देखने को मिला।
रोहतांग दर्रा में करीब 120 सेंटीमीटर बर्फबारी होने से यह वाहनों की आवाजाही के लिए अवरुद्ध है। ऐसे में मनाली-लेह मार्ग पर भी वाहनों के पहिये थम गए हैं। मनाली-लेह मार्ग बंद होने से जनजातीय क्षेत्र के लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। मौसम खुलते ही शनिवार को बीआरओ ने रोहतांग दर्रे को बहाल करने के लिए मनाली-लेह मार्ग से बर्फ हटाने का अभियान शुरू कर दिया है।
मनाली और लाहौल की तरफ से सीमा सड़क संगठन ने बर्फ हटाने के लिए मशीनें लगा दी हैं। लाहौल की तरफ से बर्फ हटाते हुए बीआरओ की टीम दस किलोमीटर, जबकि मनाली की तरफ से सात किलोमीटर आगे तक पहुंच गई है। हालांकि रोहतांग में चार फीट तक बर्फ गिरी हुई है।
बताया जा रहा है कि अगर मौसम खराब नहीं हुआ तो मनाली-लेह मार्ग को रविवार तक बहाल किया जा सकता है। बर्फबारी से दर्रा बंद होने के चलते लाहौल में कई लोग फंसे हुए हैं। सीमा सड़क संगठन उन्हें टनल से आवाजाही की अनुमति नहीं दे रहा है। ऐसे में रोहतांग दर्रा बहाल होने के बाद ही लोगों को राहत मिलेगी। दूसरी ओर 48 घंटों तक लगातार बर्फबारी के बाद शनिवार को सूर्य के दर्शन होने से घाटी के लोगों ने राहत की सांस ली।
पिछले दो दिनों से रोहतांग दर्रा, बारालाचा पास, कुंजुम सहित जनजातीय क्षेत्रों में भारी बर्फबारी के चलते मनाली लेह, मनाली काजा और लाहौल घाटी का संपर्क बाहरी दुनिया से कटा हुआ है। चंद्रा और तोद घाटी के संपर्क मार्ग भी यातायात के लिए ठप है। हालांकि बीआरओ ने मुस्तैदी दिखाते हुए शनिवार को घाटी के सभी मुख्य मार्ग से बर्फ हटाकर यातायात बहाल कर दिया है।