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आजादी का अमृत महोत्सव: आधे शहर का पेट पालती थी नाहन फाउंडरी, उपेक्षा ने खंडहर बना दिया
हितेश शर्मा, अमर उजाला, नाहन (सिरमौर)
Published by: Krishan Singh
Updated Sun, 12 Sep 2021 12:20 PM IST
सार
नाहन शहर की ऐतिहासिक इमारत, जहां कभी तिरंगा बड़ी शान से लहराता था, आज खंडहर बन गई है। यह इमारत नाहन फाउंडरी थी, जिसका नाम लेते ही हर व्यक्ति की शान बढ़ जाती थी। भारत ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी कभी इस इमारत की अपनी पहचान थी।
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नाहन फाउंडरी
- फोटो : अमर उजाला
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हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के नाहन शहर की ऐतिहासिक इमारत, जहां कभी तिरंगा बड़ी शान से लहराता था, आज खंडहर बन गई है। यह इमारत नाहन फाउंडरी थी, जिसका नाम लेते ही हर व्यक्ति की शान बढ़ जाती थी। भारत ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी कभी इस इमारत की अपनी पहचान थी। यहां बने उत्पाद आज भी देश-विदेश में उस जमाने की गवाही दे रहे हैं। लेकिन अब फाउंडरी खंडहर में तबदील होकर रह गई है।
कभी यह फाउंडरी आधे शहर का पेट पालती थी, लेकिन सरकार और राजनीतिक आकाओं की उपेक्षा ने इसे खंडहर बना दिया। नाहन फाउंडरी अब एक प्लॉट बन चुकी है, जिस पर छिटपुट सरकारी दफ्तर बन रहे हैं तो कई तरह की अन्य योजनाओं पर भी काम चल रहा है। एनएच का दफ्तर यहां बना दिया गया है। ऑडिटोरियम का निर्माण कार्य प्रगति पर है।यह केवल एक इमारत नहीं, बल्कि रोजगार देने वाली एक मां थी, जिसकी पनाह में हजारों घरों के चूल्हे जलते थे।
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नाहन फाउंडरी
- फोटो : अमर उजाला
आज भी वह लोग जो फाउंडरी में काम करते थे, यहां की दुर्दशा देख रो पड़ते हैं। पीढ़ी दर पीढ़ी इस फाउंडरी ने हर घर का पालन-पोषण किया। नाहन फाउंडरी की स्थापना 1875 में महाराजा शमशेर प्रकाश ने की थी। यहां उस समय लोहे का सामान बनता था।
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नाहन फाउंडरी
- फोटो : अमर उजाला
1945 में फाउंडरी लिमिटेड के नाम से एक कंपनी बनी। जबकि, 1964 में भारत सरकार से यह हिमाचल सरकार के अधीन आई। 1988 में यह फाउंडरी बंद हो गई। इसमें बना सामान देश के अन्य हिस्सों के साथ-साथ विदेशों में भी जाता था।
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नाहन फाउंडरी
- फोटो : अमर उजाला
लोहे का सामान बनता था यहां
यहां लोहे की ग्रिल, लोहे के बेंच, लोहे की मजबूत टंकियां, लोहे की रेलिंग, हमाम दस्ता, गन्ने का रस निकालने की मशीन, मोटरें और कृषि के उपकरण अन्य दर्जनों लोहे का सामान यहां बनता था। लेकिन फाउंडरी का यह ऐश्वर्य आज इतिहास के पन्ने बनकर रह गए हैं।
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नाहन फाउंडरी
- फोटो : अमर उजाला
इसके बाद इसे आईपीएच और लोक निर्माण विभाग की राज्य कर्मशाला बनाया गया। वर्तमान में अब फाउंडरी का अस्तित्व खत्म है। यह मात्र एक खंडहर में तबदील है। लोग कहते हैं कि अब सिरमौर में महाराजा शमशेर प्रकाश कौन बनकर आएगा जो नाहन फाउंडरी को दोबारा स्थापित कर सके।
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