फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

Youth Day: कैप्टन शिवा और पायलट दीपक के संघर्ष की कहानी, पिता का साथ छूटा, पर नहीं मानी हार, जिद से मिली सफलता

Thu, 12 Jan 2023 04:49 PM IST
Udit Dixit उदित दीक्षित
Updated Thu, 12 Jan 2023 04:49 PM IST
सार

Youth Day: कैप्टन शिवा और पायलट दीपक के संघर्ष की कहानी, पिता का साथ छूटा, पर नहीं मानी हार, जिद से मिली सफलता

विज्ञापन
success story of Captain Shiva Chauhan and Pilot Deepak Kumawat of rajasthan National Youth Day
कैप्टन - फोटो : अमर उजाला

आज 12 जनवरी को देश युवा दिवस मना रहा है। कहते हैं कि युवाओं में वो ताकत है कि अगर ठान लें तो कुछ भी नामुमकिन नहीं रहता है। चाहे कितनी भी मुश्किलें आएं वे संघर्ष, कड़ी मेहनत और अपनों के सहयोग से सफलता हासिल कर लेते हैं। ऐसे ही दो युवाओं के संघर्ष से भरी सफलता की कहानी हम यहां जानेंगे। हम जिन दो युवाओं के बारे में जानेंगे उनसे से एक का नाम है कैप्टन शिवा चौहान। शिवा देश ही पहली महिला कैप्टन हैं जिन्हें सियाचिन बॉर्डर पर तैनात किया गया है। ये वही सियाचिन है जहां का तापमान माइनस 16 डिग्री से भी नीचे चला जाता है। 



वहीं, सफलता की दूसरी कहानी में हम बात करेंगे दीपक कुमावत की। दीपक की मां सिलाई करती हैं और उनके पिता मोटर वाइंडिंग का काम करते थे। उनकी मौत के बाद दीपक ने कड़ी मेहनत और संघर्ष किया और कमर्शियल पायलट बनकर अपना और अपनी मां का पूरा किया है।

success story of Captain Shiva Chauhan and Pilot Deepak Kumawat of rajasthan National Youth Day
सियाचिन में तैनात हैं कैप्टन शिवा चौहान। - फोटो : अमर उजाला

पहले जानते हैं कैप्टन शिवा चौहन के बारे में
उदयपुर की रहने वाली कैप्टन शिवा चौहान सियाचीन बॉर्डर पर तैनात हैं। साल 2020 में शिवा का आर्मी में चयन हुआ था। चेन्नई में ट्रेनिंग पूरी होने के बाद 2023 में शिवा की पहली पोस्टिंग सियाचिन में हुई। इसकी के साथ शिवा सियाचिन में तैनात होने वाली पहली भारतीय महिला बन गईं।

इस सफलता के पीछे कैप्टन शिवा चौहान का संघर्ष और कड़ी मेहनत छिपी हुई है। उनके परिवार में शिवा की मां अंजली चौहान और बहन शुभम चौहान हैं। साल 2011 में शिवा के पिता का निधन हो गया था। परिवार की माली हालत भी बहुत अच्छी नहीं थी, लेकिन शिवाा और शुभम दोनों बहनें पढ़ाई में काफी अच्छी थी। ऐसे में उनकी मां न सिलाई का काम शुरू किया और बेटियों का आगे बढ़ने में उनका पूरा साथ दिया। 

कैप्टन शिवा एक सिविल इंजीनियर भी हैं। उनकी स्कूलिंग उदयपुर के एक निजी कॉलेज से हुई है। कॉलेज खत्म होने के बाद शिवा ने सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की। पढ़ाई के साथ-साथ शिवा कॉलेज में होने वाल हर कार्यक्रम में भी हिस्सा लेतीं थी। 87 फीसदी नंबर के साथ शिवा ने कॉलेज में टॉप किया था। 

कैप्टन शिवा चौहान वर्तमान में सियाचिन में तैनात हैं। वहीं, उनकी बहन शुभम और मां अंजलि जयपुर में रह रही हैं। जहां शुभम आरजेएस की तैयारी कर रही है। कैप्टन शिवा की सफलता को लेकर उनके शिक्षक गुरु राज शेखर व्यास कहते हैं कि शिवा पढ़ाई के साथ हर चीज में आगे थी। अपनी पढ़ाई का  खर्च निकालने के लिए शिवा कॉलेज के साथ बच्चों को ट्यूशन भी पढ़ाती थी। उसने हर परेशानी का डटकर सामना किया है।  आज वह देश की रक्षा कर रही है, ये देखकर हमें गर्व और खुशी मिलती है। 

success story of Captain Shiva Chauhan and Pilot Deepak Kumawat of rajasthan National Youth Day
दीपक कुमावत बने पायलट। - फोटो : अमर उजाला

पायलट दीपक ने सफल किया मां का संघर्ष
टोंक जिले के रहने वाले दीपक कुमावत ने अपने पायलट बनने का सपना पूरा कर लिया है। हांलाकि, ये सिर्फ दीपक का सपना नहीं था, उनके माता-पिता और बहन भी यही चाहती थी। एलाइंस एयर एविएशन लिमिटेड में को- पायलट के रूप में चयन होने के बाद दीपक ने उन सबके सपने को भी साकार कर के दिखा दिया है। लेकिन, इसके पीछे की कहानी, संघर्ष, कड़ी मेहनत और संकल्प से भरी हुई है।

दरअसल, टोंक जिले के घोसी मोहल्ले के रहने वाले दीपक कुमावत बचपन से ही पायलट बनना चाहते थे। उनके पिता सत्यनारायण कुमावत मोटर वाइंडिंग का काम किया करते थे। जिससे उनका घर खर्च चलता था। 2011 में हुए एक सड़क हादसे में दीपक के पिता की अचानक मौत हो गई। जिससे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। 

दीपक को अपना सपना बिखरता हुआ दिखा, लेकिन उनकी मां अनुराधा और दादा मोहनलाल कुमावत ने दीपक को संभाला। दोनों ने उसे आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने दीपक को कानपुर में कमर्शियल पायलट बनने के लिए प्रशिक्षण के लिए भेज दिया। इसके खर्च को उठाने के लिए दीपक की मां अनुराधा सिलाई का काम करने लगीं। 

पिता की मौत से बिखरा दीपक का परिवार एक बार फिर संभलने लगा था, इसी बीच 2019 में उनके दादा मोहनलाल का निधन हो गया। एक बार फिर परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट गया, लेकिन दीपक की मां और बहनों ने हिम्मत नहीं हारी। 

दीपक को एक महीने के प्रशिक्षण के लिए स्पेन जाना था। इसके लिए उसकी मां अनुराधा, बहने आरती, अर्पिता और पायल ने कर्ज लेकर रुपये की व्यवस्था की और उसे   प्रशिक्षण के लिये स्पेन भेज दिया। वहां से वापस आने के बाद दीपक वैकेंसी के इंतजार कर रहे थे। इसी बीच दुनिया में कोरोना ने दस्तक दे दी। ऐसे में उसे दो साल नौकरी के लिए इंतजार करना पड़ा, लेकिन अब वह को-पायलट बन गया है।

अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed