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Fauzia Khan: राजस्थान में बारूद की तोप चलाने वाली महिला, धमाके से बताती हैं रमजान की सेहरी और इफ्तार का समय

Sat, 29 Mar 2025 05:32 PM IST
अरविंद कुमार न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, अजमेर
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, अजमेर Published by: अरविंद कुमार Updated Sat, 29 Mar 2025 05:32 PM IST
सार

Fauzia Khan Topchi: अजमेर में रमजान की सेहरी और इफ्तार का समय सिर्फ अलार्म या बुजुर्गों की आवाज से तय नहीं होता। यह तय होता है एक तोप के धमाके से। इस तोप को दागती हैं फौजिया खान। राजस्थान की इकलौती महिला तोपची, लोग इन्हें फौजिया तोपची भी कहते हैं।

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Fauzia Khan woman who fires gunpowder cannon in Rajasthan tells time of Sehri and Iftar of Ramadan by sound
फौजिया खान - फोटो : अमर उजाला

राजस्थान के अजमेर में रमजान के दौरान सेहरी और इफ्तार का समय किसी घड़ी या अलार्म से तय नहीं होता। बल्कि एक तोप के धमाके से इसकी घोषणा होती है। इस ऐतिहासिक परंपरा को निभाने वाली शख्सियत हैं फौजिया खान, जिन्हें लोग फौजिया तोपची के नाम से भी जानते हैं।



Fauzia Khan woman who fires gunpowder cannon in Rajasthan tells time of Sehri and Iftar of Ramadan by sound
फौजिया खान - फोटो : अमर उजाला

वे राजस्थान की इकलौती महिला तोपची हैं और सात पीढ़ियों से चली आ रही इस परंपरा को आगे बढ़ा रही हैं। फौजिया का घर ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह से करीब डेढ़ किलोमीटर दूर, तकिया गदरशाह में स्थित है। रमजान में वे अपने भाई मुहम्मद खुर्शीद के साथ मिलकर तोप दागने की जिम्मेदारी निभाती हैं।

Fauzia Khan woman who fires gunpowder cannon in Rajasthan tells time of Sehri and Iftar of Ramadan by sound
बारूद दागते हुए फौजिया खान - फोटो : अमर उजाला

तोप दागने की प्रक्रिया
रमजान में तीन बार तोप दागी जाती है। एक बार सेहरी के लिए और दो बार इफ्तार के समय। फौजिया अपने पांच किलो वजनी हथौड़े से तोप में बारूद भरती हैं, जिसे बिजली बारूद कहा जाता है। इसके बाद गोबर के उपलों से नाल को बंद किया जाता है।

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सेहरी के समय, 3:30 बजे, तोप को दरगाह के सामने ऊंचाई पर रखा जाता है और जब महफिलखाने की खिड़की से झंडे और टॉर्च का इशारा मिलता है, तो फौजिया अगरबत्ती से पलीते को जलाकर तोप दागती हैं। धमाके की आवाज पूरे शहर में गूंजती है, और इसके साथ ही सेहरी या इफ्तार की शुरुआत होती है।

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Fauzia Khan woman who fires gunpowder cannon in Rajasthan tells time of Sehri and Iftar of Ramadan by sound
फौजिया खान - फोटो : अमर उजाला

तोप चलाने की परंपरा
फौजिया के परिवार को यह जिम्मेदारी विरासत में मिली है। वर्तमान में यह परंपरा आठवीं पीढ़ी निभा रही है। फौजिया ने महज आठ साल की उम्र में पहली बार अपने पिता मुहम्मद हनीफ की देखरेख में तोप चलाई थी। आज वे इस काम को 30 साल से कर रही हैं। उनके पूर्वजों के पास पहले एक क्विंटल वजनी पहियों वाली तोप थी, लेकिन प्रशासन ने बढ़ती आबादी को देखते हुए अब उन्हें एक छोटी और कॉम्पैक्ट तोप दी है।

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Fauzia Khan woman who fires gunpowder cannon in Rajasthan tells time of Sehri and Iftar of Ramadan by sound
फौजिया का घर - फोटो : अमर उजाला

खास आयोजनों में तोप दागने की परंपरा
रमजान के अलावा, फौजिया दरगाह से जुड़े सभी बड़े आयोजनों में भी तोप दागती हैं। जुम्मा, ईद, बकरीद और उर्स के दौरान। खासतौर पर ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की पैदाइश पर 21 तोपों की सलामी दी जाती है, और गरीब नवाज के उर्स की शुरुआत 25 तोपों की सलामी से होती है।

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