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JNU अध्यक्ष की हत्या से लेकर ISI से लिंक तक, ऐसा रहा है इस PHD बाहुबली का सफर

Fri, 30 Sep 2016 02:09 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 30 Sep 2016 02:09 PM IST
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How Shahabuddin became terror symbol of bihar full story
मोहम्मद शहाबुद्दीन
बिहार के सीवान का पूर्व सांसद मोहम्मद शहाबुद्दीन फिर से जेल जाएगा।  सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने प्रदेश सरकार पर भी नाराजगी जताई कि शहाबुद्दीन के खिलाफ सबूत तक नहीं दिया।


बताते  चलें कि आतंक का पर्याय रहा शहाबुद्दीन जेल में रहे या बाहर, लोगों में उसका खौफ बरकरार रहता है। लोगों में उसे 'साहब' के नाम से जाना जाता है। 1986 में पहली एफआईआर से लेकर 2016 में पत्रकार की हत्या तक के मामले में आरोपी होने के बीच कई जुर्म में शहाबुद्दीन का नाम आता रहा है।

सीवान जिले के प्रतापपुर में 10 मई 1967 को जन्मे शहाबुद्दी की दबंगई कॉलेज के दिनों से ही चर्चा में रही। शहाबुद्दीन ने मुजफ्फरपुर के बीआर अम्बेडकर विश्वविद्यालय से पोलिटिकल साइंस में पीएचडी की डिग्री हासिल की। हालांकि, इस दौरान देखते ही देखते शहाबुद्दीन बिहार का मोस्ट वांटेड बन गया। लोग उसके नाम से थर्राने लगे। अब तक दर्ज 56 मुकदमे में 6 में उन्हें सजा हो चुकी है। वहीं, भारतीय कम्मयूनिस्ट पार्टी (माले) के कार्यकर्ता छोटेलाल गुप्ता की हत्या के मामले में वह आजीवन कारावास की सजा भुगत रहे हैं।

 
How Shahabuddin became terror symbol of bihar full story
फाइल फोटो: शहाबुद्दीन
जुर्म की दुनिया में पैर जमाने के बाद खुद को और मजबूत करने के लिए शहाबुद्दीन ने राजनीति में कदम रखा। बताया जाता है कि चुनाव लड़ने के दौरान उसकी पार्टी को छोड़कर दूसरे किसी प्रत्याशी का झंडा लगाने की किसी को हिम्मत नहीं होती थी। आलम यह रहा कि विरोधियों को परास्त कर राजनीतिक रसूख बनाते जा रहे शहाबुद्दीन पर हत्या, अपहरण और रंगदारी के एक के बाद एक मामले जुड़ते गए।
 
How Shahabuddin became terror symbol of bihar full story
फाइल फोटो: शहाबुद्दीन

साल 1990 में शहाबुद्दीन जनता दल के टिकट पर जिरादेई विधानसभा से पहली बार विधानसभा पहुंचे। साल 1995 में वह दोबारा इसी सीट से निर्वाचित हुए। इसके बाद 1996 में वह पहली बार सीवान लोकसभा सीट से सांसद चुने गए। 
 
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How Shahabuddin became terror symbol of bihar full story
मोहम्मद शहाबुद्दीन
साल 1997 में जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी के छात्र संघ अध्यक्षल रहे चंद्रशेखर की हत्या के मामले में भी शहाबुद्दी का नाम सामने आया था। चंद्रशेखर को सीवान में तब गोली मार दी गई थी जब वह भाकपा माले के एक कार्यक्रम में नुक्कड़ सभा कर रहे थे। इस केस में शहाबुद्दीन के बेहद करीबी रहे रुस्तम मियां को सजा हो चुकी है।  
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How Shahabuddin became terror symbol of bihar full story
मोहम्मद शहाबुद्दीन
साल 1999 में  सीपीआई (एमएल) कार्यकर्ता छोटेलाल गुप्ता के के अपहरण और संदिग्ध हत्या के मामले में शहाबुद्दीन को लोकसभा 2004 के चुनाव से आठ माह पहले गिरफ्तार कर लिया गया था। इसके बाद साल 2007 में उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। वहीं, आपराधिक मामले में सजा मिलने के बाद चुनाव आयोग ने उनके चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगा दिया था। 
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