मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले के कूनो नेशनल पार्क में चीतों का एक वीडियो सामने आया है। वीडियो में मादा चीता ज्वाला अपने चार शावकों के साथ पानी पीती दिख रही है। यह पानी उसे चीता मित्र की ओर से पिलाया गया, इस दौरान चीता फैमिली बेहद दोस्ताना माहौल में पानी पीती नजर आ रही है।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में इंसान और चीतों का अनोखा रिश्ता साफ नजर आ रहा है। वीडियो में दिखाई दे रहा है कि चीता मित्र सत्तू गुर्जर हाथ में परात और एक पानी की केन लेकर आता है। वह केन से परात में पानी भरता है और शिकार के बाद पेड़ के नीचे बैठकर अपने शवकों के साथ आराम कर रही ज्वाला को आवाज देता है। वह चीतों को अंग्रेजी में 'COME' कहकर बुलाता है, यह सुनते ही ज्वाला और उसके चारों शवक तुरंत उसके पास पहुंच जाते हैं और परात से पानी पीते हैं। बताया जा रहा है कि इससे कुछ देर पहले ही चीता फैमिली ने बकरियों का शिकार किया था।
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चीतों को पानी पिलाता चिता मित्र।
- फोटो : अमर उजाला
पहली बार पार्क की सीमा से बाहर आए
दरअसल, डेढ़ महीने पहले खुले जंगल में छोड़ी गई मादा चीता ज्वाला और उसके चार शावक पहली बार पार्क की सीमा से बाहर आए हैं। उन्हें वीरपुर तहसील के ग्राम श्यामपुर के पास देखा गया। वे निर्माणाधीन श्योपुर-ग्वालियर ब्रॉडगेज रेल ट्रैक से करीब 1 किलोमीटर की दूरी पर थे।
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चीतों को पानी पिलाता चिता मित्र।
- फोटो : अमर उजाला
चीते समझ रहे कमांड
बताया जा रहा है कि मॉनिटरिंग टीम के साथ चीतों की सुरक्षा में लगे चीता मित्र अब चीतों को पहचानने लगे हैं। साथ ही चीते भी उनकी COME और GO जैसी कमांड समझने लगे हैं। इसी कारण चीता मित्र सत्तू गुर्जर ने परात में पानी रखकर COME की अवाज लगाई तो ज्वाला अपने शावकों के साथ वहां पहुंच गई।
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चीतों को पानी पिलाता चिता मित्र।
- फोटो : अमर उजाला
17 चीते खुले में घूम रहे
दरसअल, वर्तमान में कूनो के खुले जंगल में 17 चीते विचरण कर रहे हैं। ये चीते लगातार अपना क्षेत्र बढ़ा रहे हैं और शिकार भी कर रहे हैं। बीतें कुछ दिनों में चीतों की गतिविधियों के कई वीडियो सामने आए हैं। इनमें चीते कभी हिरणों के झुंड का शिकार करते दिखे तो कभी बकरियों पर हमला करते नजर आए थे। करीब 13 दिन पहले कूनो नेशनल पार्क से बाहर निकले 5 चीतों पर ग्रामीणों ने लाठी, डंडों और पत्थरों से हमला भी कर दिया था। हालांकि, मौके पर मौजूद वन विभाग की रेस्क्यू टीम ग्रामीणों से चीतों से दूर रहने की अपील करती रही, लेकिन वे नहीं माने।
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