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एमपी: मादा चीता निर्वा के 19 माह के शावक की गोली लगने से मौत, पुनर्वास के बाद देश में पहली बार चीते की हत्या
Tue, 27 Oct 2026 06:24 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, श्योपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, श्योपुर
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Tue, 27 Oct 2026 06:24 PM IST
सार
कूनो की मादा चीता निर्वा के 19 महीने के नर शावक की मंगलवार को इलाज के दौरान मौत हो गई। वह 25 अक्टूबर को मुरैना के जंगल में घायल मिला था। शावक के शरीर से बंदूक की गोली के पांच छर्रे निकाले गए। तमाम कोशिशों के बाद भी उसे बचाया नहीं जा सका।
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चीते की गोली मारकर हत्या!
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
कूनो नेशनल पार्क से निकलकर मुरैना पहुंचे मादा चीता निर्वा के शावक की गोली लगने से मौत हो गई। करीब 19 महीने के शावक की मौत के बाद हड़कंप मच गया है। देश में पहली बार चीते की गोली मारकर हत्या का मामला सामने आया है। इसके साथ ही कूनो नेशनल पार्क से बाहर निकलने वाले चीतों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। शुरुआती जानकारी में चीते के घायल होने की वजह ग्रामीणों का हमला बताया गया था, लेकिन उपचार के दौरान शरीर से छर्रे मिलने के बाद गोली मारने की पुष्टि हो गई।
जानकारी के मुताबिक, रविवार को मुरैना इलाके में निर्वा के मादा चीता शावक ने एक घर के बाड़े में बंधे बछड़ों का शिकार किया था। इसके बाद ग्रामीणों के साथ संघर्ष की बात सामने आई थी। शुरुआती रिपोर्ट में बताया गया था कि ग्रामीणों ने चीता शावक को लाठी-डंडों से पीटकर घायल कर दिया था। इसके बाद वन विभाग की टीम ने घायल चीते को रेस्क्यू कर उपचार के लिए भेजा था।
ये भी पढ़ें- मध्यप्रदेश: कूनो की मादा चीता निर्वा का 19 माह का नर शावक घायल मिला, हमले की आशंका; जांच शुरू
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डॉक्टर ने की छर्रे निकलने की पुष्टि
चीता शावक को करीब से गोली मारी गई है। उसके पेट में कई छर्रे मिले हैं। उसे 25 अक्तूबर की रात मुरैना और श्योपुर जिलों की सीमा से रेस्क्यू किया गया था। इलाज के लिए शावक को जबलपुर स्थित एक पशु चिकित्सा केंद्र में भेजा गया था। वहां उसके ऑपरेशन के दौरान जबलपुर वेटरनरी कॉलेज की डॉक्टर डॉ. शोभा जावरे ने चीते के शरीर से छर्रे निकलने की पुष्टि की। इलाज के दौरान उसकी हालत गंभीर बनी रही और आखिरकार उसकी मौत हो गई। वहीं इस मामले में डायरेक्टर वाइल्ड लाइफ आरके शर्मा का कहना है कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने जबलपुर में ये बात कही है।
पांच छर्रे निकाले
जबलपुर के पशु चिकित्सा विज्ञान एवं पशुपालन महाविद्यालय की प्रेस नोट के अनुसार, कूनो राष्ट्रीय उद्यान से लाए गए एक चीते को 26 अक्टूबर 2026 की रात लगभग 11:50 बजे गंभीर रूप से घायल अवस्था में पशु चिकित्सा विज्ञान एवं पशुपालन महाविद्यालय, जबलपुर में लाया गया था। चीते के शरीर पर कई घाव थे। उसके पिछले दोनों पैरों में लकवा जैसी स्थिति थी और पेशाब रुकने की समस्या भी थी। इन लक्षणों से रीढ़ की हड्डी में चोट के कारण तंत्रिका तंत्र प्रभावित होने की आशंका जताई गई। चीते के सीटी स्कैन में रीढ़ की हड्डी के पास धातु के कई कण मिले थे। विभागाध्यक्ष एवं प्रोफेसर डॉ. शोभा जवरे और प्रोफेसर डॉ. रणधीर सिंह की निगरानी में किए गए ऑपरेशन के दौरान चीते के शरीर से बंदूक से चलाए गए पांच छर्रे निकाले। सर्जरी के बाद चीते को गहन चिकित्सा और निगरानी में रखा गया, लेकिन गंभीर चोटों के कारण 27 अक्टूबर की सुबह करीब 5:10 बजे उसकी मौत हो गई। मामले की रिपोर्ट प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव), भोपाल को भेज दी गई है।
कूनो से बाहर निकलने वाले चीतों की सुरक्षा पर सवाल
कूनो नेशनल पार्क में भारत के महत्वाकांक्षी चीता प्रोजेक्ट के तहत चीतों को सितंबर 2022 में देश में फिर से बसाया गया है। इन चीतों की निगरानी के लिए उन्हें रेडियो कॉलर लगाए गए हैं। वन विभाग की टीमें भी उनकी गतिविधियों पर लगातार नजर रखती हैं। इसके बावजूद निर्वा के शावक का पार्क से बाहर निकलना और फिर गोली लगने से उसकी मौत होना निगरानी व्यवस्था के सामने चुनौती बनकर सामने आया है। वन्यजीव विशेषज्ञों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब रेडियो कॉलर के जरिए चीतों की लोकेशन पर नजर रखी जा रही है, तो पार्क से बाहर निकलने के बाद उन्हें ग्रामीण इलाकों में समय रहते सुरक्षित क्यों नहीं किया जा सका।
चीतों की सुरक्षा के लिए चुनौती
कूनो के आसपास के इलाकों में चीतों का विचरण लगातार वन विभाग के लिए चुनौती बना हुआ है। पार्क की सीमा से बाहर पहुंचने पर चीतों का सामना ग्रामीण आबादी और पालतू पशुओं से होता है। ऐसे में मानव-वन्यजीव संघर्ष की आशंका बढ़ जाती है। चीता शावक की गोली लगने से मौत ने एक बार फिर सवाल खड़ा किया है कि कूनो से बाहर निकलने वाले चीतों की सुरक्षा के लिए निगरानी और रेस्क्यू सिस्टम को और कितना मजबूत करने की जरूरत है।
मई से अब तक छह की मौत
मई 2026 में एक मादा चीता KGP-12 के चार शावक मृत मिले थे। शुरुआती तौर पर दूसरे जंगली जानवर के हमले की आशंका जताई गई थी। वहीं अक्टूबर 2026 में मादा चीता आशा के 4 में से 1, करीब 8 महीने के शावक की मौत हुई थी। अब निर्वा के शावक की मौत हो गई।
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जानकारी के मुताबिक, रविवार को मुरैना इलाके में निर्वा के मादा चीता शावक ने एक घर के बाड़े में बंधे बछड़ों का शिकार किया था। इसके बाद ग्रामीणों के साथ संघर्ष की बात सामने आई थी। शुरुआती रिपोर्ट में बताया गया था कि ग्रामीणों ने चीता शावक को लाठी-डंडों से पीटकर घायल कर दिया था। इसके बाद वन विभाग की टीम ने घायल चीते को रेस्क्यू कर उपचार के लिए भेजा था।
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डॉक्टर ने की छर्रे निकलने की पुष्टि
चीता शावक को करीब से गोली मारी गई है। उसके पेट में कई छर्रे मिले हैं। उसे 25 अक्तूबर की रात मुरैना और श्योपुर जिलों की सीमा से रेस्क्यू किया गया था। इलाज के लिए शावक को जबलपुर स्थित एक पशु चिकित्सा केंद्र में भेजा गया था। वहां उसके ऑपरेशन के दौरान जबलपुर वेटरनरी कॉलेज की डॉक्टर डॉ. शोभा जावरे ने चीते के शरीर से छर्रे निकलने की पुष्टि की। इलाज के दौरान उसकी हालत गंभीर बनी रही और आखिरकार उसकी मौत हो गई। वहीं इस मामले में डायरेक्टर वाइल्ड लाइफ आरके शर्मा का कहना है कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने जबलपुर में ये बात कही है।
पांच छर्रे निकाले
जबलपुर के पशु चिकित्सा विज्ञान एवं पशुपालन महाविद्यालय की प्रेस नोट के अनुसार, कूनो राष्ट्रीय उद्यान से लाए गए एक चीते को 26 अक्टूबर 2026 की रात लगभग 11:50 बजे गंभीर रूप से घायल अवस्था में पशु चिकित्सा विज्ञान एवं पशुपालन महाविद्यालय, जबलपुर में लाया गया था। चीते के शरीर पर कई घाव थे। उसके पिछले दोनों पैरों में लकवा जैसी स्थिति थी और पेशाब रुकने की समस्या भी थी। इन लक्षणों से रीढ़ की हड्डी में चोट के कारण तंत्रिका तंत्र प्रभावित होने की आशंका जताई गई। चीते के सीटी स्कैन में रीढ़ की हड्डी के पास धातु के कई कण मिले थे। विभागाध्यक्ष एवं प्रोफेसर डॉ. शोभा जवरे और प्रोफेसर डॉ. रणधीर सिंह की निगरानी में किए गए ऑपरेशन के दौरान चीते के शरीर से बंदूक से चलाए गए पांच छर्रे निकाले। सर्जरी के बाद चीते को गहन चिकित्सा और निगरानी में रखा गया, लेकिन गंभीर चोटों के कारण 27 अक्टूबर की सुबह करीब 5:10 बजे उसकी मौत हो गई। मामले की रिपोर्ट प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव), भोपाल को भेज दी गई है।
कूनो से बाहर निकलने वाले चीतों की सुरक्षा पर सवाल
कूनो नेशनल पार्क में भारत के महत्वाकांक्षी चीता प्रोजेक्ट के तहत चीतों को सितंबर 2022 में देश में फिर से बसाया गया है। इन चीतों की निगरानी के लिए उन्हें रेडियो कॉलर लगाए गए हैं। वन विभाग की टीमें भी उनकी गतिविधियों पर लगातार नजर रखती हैं। इसके बावजूद निर्वा के शावक का पार्क से बाहर निकलना और फिर गोली लगने से उसकी मौत होना निगरानी व्यवस्था के सामने चुनौती बनकर सामने आया है। वन्यजीव विशेषज्ञों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब रेडियो कॉलर के जरिए चीतों की लोकेशन पर नजर रखी जा रही है, तो पार्क से बाहर निकलने के बाद उन्हें ग्रामीण इलाकों में समय रहते सुरक्षित क्यों नहीं किया जा सका।
चीतों की सुरक्षा के लिए चुनौती
कूनो के आसपास के इलाकों में चीतों का विचरण लगातार वन विभाग के लिए चुनौती बना हुआ है। पार्क की सीमा से बाहर पहुंचने पर चीतों का सामना ग्रामीण आबादी और पालतू पशुओं से होता है। ऐसे में मानव-वन्यजीव संघर्ष की आशंका बढ़ जाती है। चीता शावक की गोली लगने से मौत ने एक बार फिर सवाल खड़ा किया है कि कूनो से बाहर निकलने वाले चीतों की सुरक्षा के लिए निगरानी और रेस्क्यू सिस्टम को और कितना मजबूत करने की जरूरत है।
मई से अब तक छह की मौत
मई 2026 में एक मादा चीता KGP-12 के चार शावक मृत मिले थे। शुरुआती तौर पर दूसरे जंगली जानवर के हमले की आशंका जताई गई थी। वहीं अक्टूबर 2026 में मादा चीता आशा के 4 में से 1, करीब 8 महीने के शावक की मौत हुई थी। अब निर्वा के शावक की मौत हो गई।
