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Ganesh Chaturthi: स्वयंभू गणेश मंदिरों में से एक है सीहोर का चिंतामन धाम, एक स्वास्तिक कर देता है मुराद पूरी

Mon, 18 Sep 2023 01:38 PM IST
अंकिता विश्वकर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर Published by: अंकिता विश्वकर्मा Updated Mon, 18 Sep 2023 01:38 PM IST
सार

Ganesh Chaturthi: स्वयंभू गणेश मंदिरों में से एक है सीहोर का चिंतामन धाम, एक स्वास्तिक कर देता है मुराद पूरी

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Ganesh Chaturthi 2023: all you need to know about Chintaman Ganesh temple of Sehore
देश के चार स्वयंभू गणेश मंदिरों में शामिल है चिंतामन गणेश मंदिर - फोटो : अमर उजाला
सीहोर जिले का चिंतामन गणेश मंदिर बेहद प्राचीन और काफी प्रसिद्ध मंदिर है। मंदिर में स्थित चिंतामन गणेश भारत में स्थित चार स्वयंभू मूर्तियों में से एक माने जाते हैं।  इस प्रतिमा के दर्शन करने के लिए देश भर से भक्त बड़ी संख्या में यहां आते हैं। हर साल गणेश चतुर्थी पर यहां बहुत बड़ा मेला भी आयोजित किया जाता है। 


सीहोर के गणपति के बारे में कहा जाता है कि भगवान गणपति आज भी यहां साक्षात मूर्ति रूप में निवास करते हैं। यह भी मान्यता है कि यहां विराजे गणेश जी को सच्चे मन से पूजने पर वे कभी भी अपने भक्तों को खाली हाथ नहीं जाने देते। इसी वजह से गणेश उत्सव के बाद भी यहां सालभर भक्तों का तांता लगा रहता है।

सम्राट विक्रमादित्य ने कराया था मंदिर का निर्माण
भारत में स्थित चार स्वयंभू चिंतामन गणेश मंदिरों में से एक अति प्राचीन विक्रमादित्य कालीन ऐतिहासिक श्री चिंतामन सिद्ध गणेश मंदिर सीहोर में स्थित है। यह मंदिर सीहोर के शुगर फैक्ट्री से पश्चिम में लगभग एक किलोमीटर दूरी पर स्थित है। मंदिर और मूर्ति की स्थापना के बारे में जानकारों का कहना है कि लगभग 2000 वर्ष पूर्व परमार वंश के राजा उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य ने मंदिर का निर्माण कराया था। मंदिर में स्थापित श्री गणेश जी की मूर्ति खड़ी हुई है। मूर्ति का आधा हिस्सा जमीन के अंदर धंसा हुआ है। इसलिए भक्तों को आधी मूर्ति के ही दर्शन होते हैं। यह स्वयंभू प्रतिमा है इस मंदिर का निर्माण विक्रम संवत् 155 में महाराज विक्रमादित्य द्वारा गणेशजी के मंदिर का निर्माण श्रीयंत्र के अनुरूप करवाया गया था। राजा विक्रमादित्य के पश्चात मंदिर का जीर्णोद्धार एवं सभा मंडप का निर्माण बाजीराव पेशवा प्रथम ने करवाया था। शालीवाहन शक, राजा भोज, कृष्ण राय तथा गौंड राजा नवल शाह आदि ने मंदिर की व्यवस्था में सहयोग किया। नानाजी पेशवा विठूर आदि के समय मंदिर की याति व प्रतिष्ठा में वृद्धि हुई है। चिंतामन सिद्ध गणेश जी होने से एवं 84 सिद्धों में से अनेक तपस्वियों ने यहां सिद्धि प्राप्त की है। 
 
Ganesh Chaturthi 2023: all you need to know about Chintaman Ganesh temple of Sehore
राजा विक्रमादित्य ने कराया था मंदिर का निर्माण - फोटो : अमर उजाला
150 वर्ष पूर्व तक मंदिर में ताला नहीं लगाया जाता था
बताया जाता है कि मंदिर में विराजित गणेशजी की प्रतिमा की आंखों में हीरे जड़े हुए थे। 150 वर्ष पूर्व तक मंदिर में ताला नहीं लगाया जाता था, तब चोरों ने मूर्ति की आंखों में लगे हीरे चोरी कर लिए गए थे तथा गणेशजी की प्रतिमा की आंखों में से 21 दिन तक दूध की धारा बही थी। तब भगवान गणेशजी ने पुजारी को स्वप्न देकर कहा कि मैं खंडित नहीं हुआ हूं। तुम मेरी आंखों में चांदी के नेत्र लगवा दो। तभी से भगवान गणेश की आंखों में चांदी के नेत्र लगाए गए हैं। ऐतिहासिक चिंतामन गणेश मंदिर पर प्रदेश भर से श्रद्धालु अपनी मनोकामनाएं लेकर पहुंचते हैं।

स्वास्तिक बनाने से पूरी हो जाती है मनोकामना
मान्यता अनुसार श्रद्धालु भगवान गणेश के सामने अरदास लगाकर मंदिर की दीवार पर उल्टा स्वास्तिक बनाते हैं और मन्नत पूर्ण होने के बाद सीधा स्वास्तिक बनाते हैं। चिंतामन गणेश मंदिर पर प्रतिवर्ष गणेश चतुर्दशी के दौरान दस दिवसीय भव्य मेले का आयोजन किया जाता है।
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