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सीहोर: ग्रामीणों ने उठाया 150 साल से चली आ रही राई नृत्य की परंपरा का लुत्फ, मन्नत पूरी होने पर कराई जाती है राई

Mon, 21 Mar 2022 02:40 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर Published by: दिनेश शर्मा Updated Mon, 21 Mar 2022 02:40 PM IST
सार

सीहोर जिले के इछावर के ग्राम ब्रिजिशनगर में राई नृत्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें ब्रिजिशनगर सहित आसपास के गांव से बड़ी संख्या में लोग नृत्य देखने पहुंचे। मान्यता है कि राई नृत्य मन्नत पूरी होने पर कराया जाता है।
 

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Sehore: Villagers enjoy the tradition of Raee dance which has been going on for 150 years, Raee is made after fulfillment of vow
ग्राम ब्रिजिशनगर में राई नृत्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। - फोटो : अमर उजाला
सीहोर जिले के इछावर के ग्राम ब्रिजिशनगर में राई नृत्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें ब्रिजिशनगर सहित आसपास के गांव से बड़ी संख्या में लोग नृत्य देखने पहुंचे। मान्यता है कि राई नृत्य मन्नत पूरी होने पर कराया जाता है।

 
Sehore: Villagers enjoy the tradition of Raee dance which has been going on for 150 years, Raee is made after fulfillment of vow
मान्यता है कि राई नृत्य मन्नत पूरी होने पर कराया जाता है। - फोटो : अमर उजाला
कार्यक्रम का शुभारंभ गांव के बाबूलाल पटेल और उनके परिजनों द्वारा बाबा रामदेव जी के मंदिर में निशान चढ़ाकर किया गया। पटेल परिवार और ग्रामीण पूजा की सामग्री और निशान लेकर चल समारोह के रूप में मंदिर पहुंचे। इस दौरान डीजे और ढोल -ढमाकों की थाप पर श्रद्धालु थिरकते हुए चल रहे थे, जबकि महिलाएं पीछे मंगलगीत गाते हुए समारोह में चल रही थीं। पूजा-अर्चना के बाद रात्रि में राई नृत्य कार्यक्रम आरंभ किया गया। कार्यक्रम देर रात तक चलता रहा, जिसका ग्रामीणों ने जमकर लुत्फ उठाया। गांव में यह परंपरा करीब 150 साल से चली आ रही है, जिसका निर्वहन ग्रामीण मिलजुलकर आज भी कर रहे हैं।
 
Sehore: Villagers enjoy the tradition of Raee dance which has been going on for 150 years, Raee is made after fulfillment of vow
आसपास के गांव से बड़ी संख्या में लोग नृत्य देखने पहुंचे। - फोटो : अमर उजाला
गांव के बाबूलाल पटेल ने बताया कि करीब डेढ़ शताब्दी पहले हमारे पूर्वक कोदाजी पटेल के कोई संतान नहीं थी। इसी दौरान उन्होंने मन्नत की थी कि संतान प्राप्त होने पर वे राजस्थान स्थित रामदेवरा पैदल जाएंगे और गांव में राई नृत्य का आयोजन करेंगे। इसके बाद उनके यहां पुत्र की प्राप्ति हुई तभी से गांव में मेले का आयोजन किया जा रहा है। कार्यक्रम में रतनसिंह मेवाड़ा, मानसिंह वर्मा, सरंपच प्रतिनिधि ज्ञानसिंह राठौर, भादर पटेल, गब्बर मेवाडा, सतीश राठौर, कमर खां, भवानी मेवाडा, सुरेश मेवाड़ा, गोविंद प्रसाद, चंदर सिंह ठाकुर, जयदीप पटेल, पप्पू, घनश्याम पटेल सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद थे।
 
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