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Satna News: एक लाख में बिकी 'कटरीना', 60 हजार रुपये लगी 'सलमान' की बोली

Thu, 27 Oct 2022 11:24 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सतना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सतना Published by: दिनेश शर्मा Updated Thu, 27 Oct 2022 11:24 PM IST
सार

सतना जिले के चित्रकूट में दीपावली के बाद तीन दिवसीय मेला शुरू होता है। खास बात है कि यहां गधों और खच्चरों का बड़ा व्यापार होता है। यहां दूरदराज से गधे और खच्चर बेचने को लाए जाते हैं। 

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MP News: Donkeys fair in Satna, mules sold more expensive than donkeys
सतना जिले में लगता है गधों-खच्चरों का मेला। - फोटो : सोशल मीडिया
मध्य प्रदेश के सतना जिले के चित्रकूट में तीन दिवसीय गधों-खच्चरों का मेला लगाया गया। इसमें दूर-दूर से लोग खरीदारी करने आते हैं। इस बार के मेले में कटरीना और सलमान नाम के खच्चरों की बढ़िया बोली लगी। कटरीना एक लाख में तो सलमान को 60 हजार में बेचा गया। 


बता दें कि सतना जिले के चित्रकूट में दीपावली के बाद तीन दिवसीय मेला शुरू होता है। खास बात है कि यहां गधों और खच्चरों का बड़ा व्यापार होता है। यहां दूरदराज से गधे और खच्चर बेचने को लाए जाते हैं। एक अनुमान के मुताबिक इस बार के मेले में 10 हजार से ज्यादा गधे और खच्चर आए। यहां आए मवेशियों के नाम भी रोचक होते हैं। कटरीना, सलमान के साथ ही इस मेले में सुष्मिता, आमिर, गब्बर, आदि नाम के भी खच्चर भी बिकने आए थे।
 
MP News: Donkeys fair in Satna, mules sold more expensive than donkeys
इस मेले में दूर-दूर से लोग खरीदारी करने आते हैं। - फोटो : सोशल मीडिया
बता दें कि मेले में खरीददार भी कई जगहों से आते हैं। उन्हें कम कीमत में तंदुरुस्त गधे और खच्चर मिल जाते हैं। ओमप्रकाश निवासी बांदा ने बताया कि मेले में ज्यादातर लोग उत्तर प्रदेश के जिलों से हैं। मैं यहां 15 सालों से आ रहा हूं। इस बार एक लाख रुपये में दो खच्चर खरीदे हैं। मेले में कई तरह के खच्चर मिल जाते हैं इसलिए यहां आना जरूरी होता है। फतेहपुर से आए व्यापारी फैयाज बताते हैं कि चित्रकूट के मेला में गधों के हिसाब से बढ़िया कीमत मिल जाती है। इससे हमारा आने-जाने का खर्चा आदि के अलावा अच्छी खासी कीमत मिल जाती है। खच्चर की मांग ज्यादा रहती है जबकि गधे की कम। खच्चर जहां 40 से 50 हजार में बिकता है वहीं गधों की कीमत 10-15 हजार तक रहती है।
 
MP News: Donkeys fair in Satna, mules sold more expensive than donkeys
मान्यता है कि यह मेला औरंगजेब के समय से लगता आ रहा है। - फोटो : सोशल मीडिया
फिल्मी नाम लुभाने के लिए
इस मेले में कई गधों और खच्चरों का नामकरण कर दिया जाता है। ग्राहकों को लुभाने के लिए फिल्मी सितारों के नाम काफी समय से रखा जा रहा है। ठेकेदार सनी पांडेय ने बताया कि यह औरंगजेब के जमाने का मेला है जो अभी भी चल रहा है। लोग जैसा कि बताते है कि औरंगजेब जब युद्ध के लिए आगे बढ़ रहा था तो वह मंदाकिनी तट पर विश्राम के लिए रुका हुआ था। उसके लश्कर में खच्चर और गधे भी थे जो बीमार हो गए थे, उनकी बिक्री और नए गधे खरीदने के लिए मेला लगाया गया था तब से यह परंपरा चली आ रही है।
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