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Indore News: सेल्फ स्टडी से UPSC फतह! इंदौर के योगेश और गार्गी ने किया नाम रोशन
Wed, 23 Apr 2025 07:13 AM IST
अर्जुन रिछारिया
अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
Published by: अर्जुन रिछारिया
Updated Wed, 23 Apr 2025 07:13 AM IST
सार
Indore News: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) द्वारा घोषित सिविल सेवा परीक्षा-2024 के नतीजों में इंदौर के दो होनहार छात्रों ने शानदार प्रदर्शन किया है। योगेश राजपूत ने ऑल इंडिया रैंक 540 और गार्गी लोंढे ने रैंक 939 हासिल की है।
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परिवार के साथ गार्गी
- फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
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संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने मंगलवार को सिविल सेवा परीक्षा-2024 के फाइनल नतीजे जारी किए, जिसमें इंदौर के दो होनहार युवाओं ने सफलता का परचम लहराया। योगेश राजपूत ने ऑल इंडिया रैंक 540 और गार्गी लोंढे ने रैंक 939 प्राप्त की। खास बात यह रही कि दोनों ने बिना किसी कोचिंग के, केवल सेल्फ स्टडी के दम पर यह मुकाम हासिल किया। योगेश इससे पहले 2022 में भी सिविल सेवा परीक्षा में चयनित हो चुके हैं, जबकि गार्गी को इस बार CAT में शानदार प्रदर्शन के चलते देश के टॉप-3 आईआईएम संस्थानों से कॉल प्राप्त हुए हैं।
अपने पिता के साथ योगेश
- फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
योगेश राजपूत की संघर्षपूर्ण यात्रा
राजगढ़ जिले के उदनखेड़ी गांव से ताल्लुक रखने वाले योगेश के पिता बहादुर सिंह केवल बारहवीं तक पढ़े हैं, और मां देवबाई ने कभी स्कूल का मुंह नहीं देखा। पढ़ाई में शुरू से ही अव्वल रहे योगेश को दसवीं के बाद इंदौर भेजा गया। उन्होंने बताया कि अफसर बनने का सपना पूरा करने के लिए उन्होंने दिन-रात एक कर मेहनत की। 2019 से यूपीएससी की तैयारी शुरू की थी, लेकिन 2020 में पहली बार असफलता मिली। इसके बाद निरंतर प्रयास करते हुए उन्होंने पांचवीं बार में यह सफलता हासिल की। 2022 में उनका चयन इंडियन पोस्ट एंड टेलीकम्युनिकेशन अकाउंट एंड फाइनेंस सर्विस में हुआ था। सर्विस में रहते हुए योगेश ने सीमित समय में रोजाना दो-दो घंटे पढ़ाई कर अपनी तैयारी को जारी रखा।
गार्गी लोंढे को मिली देवी अहिल्याबाई से प्रेरणा
इंदौर की गार्गी लोंढे के पिता मुकेश लोंढे का फर्नीचर का व्यवसाय है और मां भारती एक गृहिणी हैं। गार्गी ने बताया कि उनका बचपन से ही लक्ष्य यूपीएससी था, जिसके चलते उन्होंने सोशयोलॉजी विषय से ग्रेजुएशन किया। पिछली बार वे इंटरव्यू तक पहुंचीं, लेकिन मात्र 13 अंकों से चयन से चूक गईं। इससे उन्हें गहरा धक्का लगा, पर उन्होंने हार नहीं मानी और खुद को और बेहतर तरीके से तैयार किया। इस बार इंटरव्यू में उनसे पूछा गया कि वे किसे अपना आदर्श मानती हैं, जिस पर उन्होंने देवी अहिल्याबाई होलकर का नाम लिया और उनके जीवन से जुड़े आदर्शों को साझा किया। यह उत्तर इंटरव्यूअर को बहुत प्रभावित कर गया।
आईआईएम का विकल्प भी खुला, पर यूपीएससी प्राथमिकता
गार्गी ने यूपीएससी के साथ-साथ कैट की भी तैयारी की थी और इस बार के कैट स्कोर के आधार पर उन्हें आईआईएम अहमदाबाद, आईआईएम बेंगलुरु और आईआईएम कोलकाता से कॉल मिल चुके हैं। उन्होंने कहा कि अगर अवसर मिला, तो भविष्य में आईआईएम से एग्जीक्यूटिव कोर्स भी करेंगी। हालांकि, उनका मुख्य लक्ष्य सिविल सेवा में योगदान देना है। गार्गी ने यह भी कहा कि सेल्फ स्टडी ने उन्हें अनुशासन, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता सिखाई है, और यही उनकी सफलता की असली कुंजी रही।
राजगढ़ जिले के उदनखेड़ी गांव से ताल्लुक रखने वाले योगेश के पिता बहादुर सिंह केवल बारहवीं तक पढ़े हैं, और मां देवबाई ने कभी स्कूल का मुंह नहीं देखा। पढ़ाई में शुरू से ही अव्वल रहे योगेश को दसवीं के बाद इंदौर भेजा गया। उन्होंने बताया कि अफसर बनने का सपना पूरा करने के लिए उन्होंने दिन-रात एक कर मेहनत की। 2019 से यूपीएससी की तैयारी शुरू की थी, लेकिन 2020 में पहली बार असफलता मिली। इसके बाद निरंतर प्रयास करते हुए उन्होंने पांचवीं बार में यह सफलता हासिल की। 2022 में उनका चयन इंडियन पोस्ट एंड टेलीकम्युनिकेशन अकाउंट एंड फाइनेंस सर्विस में हुआ था। सर्विस में रहते हुए योगेश ने सीमित समय में रोजाना दो-दो घंटे पढ़ाई कर अपनी तैयारी को जारी रखा।
गार्गी लोंढे को मिली देवी अहिल्याबाई से प्रेरणा
इंदौर की गार्गी लोंढे के पिता मुकेश लोंढे का फर्नीचर का व्यवसाय है और मां भारती एक गृहिणी हैं। गार्गी ने बताया कि उनका बचपन से ही लक्ष्य यूपीएससी था, जिसके चलते उन्होंने सोशयोलॉजी विषय से ग्रेजुएशन किया। पिछली बार वे इंटरव्यू तक पहुंचीं, लेकिन मात्र 13 अंकों से चयन से चूक गईं। इससे उन्हें गहरा धक्का लगा, पर उन्होंने हार नहीं मानी और खुद को और बेहतर तरीके से तैयार किया। इस बार इंटरव्यू में उनसे पूछा गया कि वे किसे अपना आदर्श मानती हैं, जिस पर उन्होंने देवी अहिल्याबाई होलकर का नाम लिया और उनके जीवन से जुड़े आदर्शों को साझा किया। यह उत्तर इंटरव्यूअर को बहुत प्रभावित कर गया।
आईआईएम का विकल्प भी खुला, पर यूपीएससी प्राथमिकता
गार्गी ने यूपीएससी के साथ-साथ कैट की भी तैयारी की थी और इस बार के कैट स्कोर के आधार पर उन्हें आईआईएम अहमदाबाद, आईआईएम बेंगलुरु और आईआईएम कोलकाता से कॉल मिल चुके हैं। उन्होंने कहा कि अगर अवसर मिला, तो भविष्य में आईआईएम से एग्जीक्यूटिव कोर्स भी करेंगी। हालांकि, उनका मुख्य लक्ष्य सिविल सेवा में योगदान देना है। गार्गी ने यह भी कहा कि सेल्फ स्टडी ने उन्हें अनुशासन, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता सिखाई है, और यही उनकी सफलता की असली कुंजी रही।
