राष्ट्रीय कवि श्री सत्यनारायण सत्तन - जो फलेगा वह झड़ेगा, जलेगा वो बुझेगा, लेकिन कीर्ति को काल भी खपा नहीं सकता। अक्षर अक्षय है, जिसकी सत्ता कभी समाप्त नहीं होती। जिन्होंने पत्रकारिता को एक नई दिशा दी और उसे समाज में प्रतिष्ठित किया।
सांसद शंकर लालवानी - अभय छजलानी अच्छे काम की हमेशा तारीफ करते थे और गलती होने पर डांटने से भी चूकते नहीं थे। वैदिक भाषाविद होने के साथ ही वेदों के अच्छे जानकार थे। दिलीपसिंह ठाकुर स्पष्टवादी थे, चतुर्वेदी अंग्रेजी प्रोफेसर होने के बावजूद भी उनकी हिन्दी में गहरी पकड़ थी। मराठीभाषी होते हुए भी बेडेकर का हिन्दी के प्रति लगाव था। इन सभी साथियों का जाना शहर के लिए बड़ी क्षति है। नई पीढ़ी इनके बताए हुए मार्ग पर चले।
प्रो. सरोज कुमार - मंच पर प्राय: आने वाले अतिथियों के चेहरे दिखते थे, जबकि आज हमसे जुदा होने वाले पत्रकार साथियों के फोटो हैं। जो बड़ी दुख की बात है। एक साथ छ: पत्रकारों का जाना ऐसा मानो किसी जहाज से कुछ अच्छे लोग उतर गए हों। जहाज डगमगाने लगे। बेडेकर मराठी कविता के सशक्त हस्ताक्षर होने के साथ एक रसिक कलाकार भी थे। अभय छजलानी जीवनकाल में किवंदति बने। कई खेल संगठन और मैदान, स्टेडियम अभय छजलानी की देन है।
पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा - अच्छे व्यक्ति हमारे बीच से चले जाते हैं, लेकिन उनके विचार अनन्तकाल तक इस संसार में गूंजते रहते हैं। समाज उनके कार्यों की पूजा करता है। ऐसी शख्सियत से हम सभी को प्रेरणा लेना चाहिए।
सुशील दोशी - भाषा के प्रति समर्पित थे पद्मश्री छजलानी जी, वेदप्रताप वैदिक, श्रीकृष्ण बेडेकर, सूर्यप्रकाश चतुर्वेदी, दिलीप सिंह ठाकुर। इंदौर में रहकर सभी ने हिन्दी को पूरे देश में प्रतिष्ठा दिलाई और पत्रकारिता को जीया।
म.प्र. ओलंपिक एसोसिएशन के उपाध्यक्ष ओम सोनी - पद्मश्री छजलानी जी एक ऐसे पत्रकार थे, जिन्होंने 90 के दशक में प्रदेश की पहली खेल नीति बनाई। उषा राजे होलकर स्टेडियम उन्हीं की देन। इंदौर में आज जो खेलों की अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताएं हो रही हैं, उसके पीछे मुख्य भूमिका अभय जी की रही है।
वरिष्ठ पत्रकार सतीश जोशी - अभय छजलानी, वैदिक, चतुर्वेदी मेरे गुरु रहे, जिनसे मैंने पत्रकारिता सीखी। दिलीप ठाकुर बहुत विनम्र व्यक्ति थे और श्रीकृष्ण बेडेकर एक अद्भुत कलाकार थे। सुरेंद्र पंवार हिन्दी के अच्छे जानकार थे।
एमपीसीए के अध्यक्ष और वरिष्ठ पत्रकार अभिलाष खांडेकर - खेल पत्रकारिता के मापदंड स्थापित किए अभय छजलानी और चतुर्वेदी ने। खेल संकुल बनाने में अभय छजलानी की महत्वपूर्ण भूमिका रही। वैदिक का व्यक्तित्व बड़ा प्रखर था और उन्होंने मूल्य आधारित पत्रकारिता की। वे दिल्ली में इंदौर के राजदूत थे। बेडेकर की मालवा से अधिक महाराष्ट्र में ज्यादा ख्याति।
वरिष्ठ पत्रकार प्रकाश हिंदुस्तानी - आज हमारे बीच जो ये वरिष्ठ साथी नहीं रहे हैं, उन्होंने इंदौर को पूरे देश में ख्याति दिलवाई और नए मानक स्थापित किए।
अभ्यास मंडल के उपाध्यक्ष अशोक कोठारी - अभ्यास मंडल के शहर हित से जुड़े कार्यों को बढ़ावा देने में अभय छजलानी की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उनमें नागरिकता का बोध कूट-कूटकर भरा था।
वरिष्ठ पत्रकार प्रवीण शर्मा - पद्मश्री अभय छजलानी नईदुनिया रूपी उपवन के एक ऐसे मालिक थे, जिन्होंने एक पुष्प को पल्लवित किया। हिन्दी की ख्याति को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाने में वैदिक जी का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। दिलीप ठाकुर अपने कार्य के प्रति निष्ठावान थे। बेडेकर जी बेबाक और स्पष्टवादी कलाकार थे।
नाट्यकर्मी उदय इंगले - श्रीकृष्ण बेडेकर महाराष्ट्र छोडक़र इंदौर आए और यहीं के होकर रह गए। मराठी में प्रकाशित दीपावली विशेषांक महाराष्ट्र में सबसे लोकप्रिय था। वे एक अंतरर्देशीय पत्र सारांश का प्रकाशन करते थे जो पूरा हस्तलिखित होता था।
वरिष्ठ पत्रकार रवीन्द्र शुक्ला - 70 के दशक से मैंने अभय छजलानी के साथ काम किया। वे कुशल पत्रकार, संपादक होने के साथ ही एक बेहतर इंसान भी थे। नईदुनिया में रहते हुए उनसे बहुत कुछ सीखने को मिला। दिलीप ठाकुर अपने काम के प्रति बहुत कर्मठ थे और पुलिस प्रशासन में इनकी गहरी पकड़ थी। श्रीकृष्ण बेडेकर को कैलिग्राफी में मास्टरी थी।
सेवा सुरभि के अतुल सेठ - इंदौर में खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने में पद्मश्री अभय जी मुख्य भूमिका रही है। शहर में संचालित हो रही कई खेल संस्थाएं उन्हीं की देन है। वैदिक जी, चतुर्वेदी जी, बेडेकर जी, दिलीप जी इन सभी का सेवा सुरभि के कार्यक्रमों प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग रहा।
