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Indore: स्मार्ट सिटी के नाम पर कृषि महाविद्यालय की 30 हजार करोड़ की जमीन हड़पने की योजना, जानें क्या है विवाद

Wed, 27 Jul 2022 04:29 PM IST
Dinesh Sharma दिनेश शर्मा
Updated Wed, 27 Jul 2022 04:29 PM IST
सार

Indore: स्मार्ट सिटी के नाम पर कृषि महाविद्यालय की 30 हजार करोड़ की जमीन हड़पने की योजना, जानें क्या है विवाद

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Indore: Agriculture college plans to grab land worth 30 thousand crores in the name of smart city
इंदौर के कृषि महाविद्यालय की बेशकीमती जमीन को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। - फोटो : सोशल मीडिया
इंदौर के कृषि महाविद्यालय की बेशकीमती जमीन को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। राज्य शासन की ओर से कॉलेज को जिले में कहीं और शिफ्ट करने की बात हो रही है। यहां की करीब 300 एकड़ जमीन पर ऑक्सीजन जोन बनाने की योजना है, साथ ही कमर्शियल बिल्डिंग के भी प्रस्ताव की बात कही जा रही है। हालांकि जिला प्रशासन का कहना है कि रिकॉर्ड के लिए जमीन का विवरण मांगा था, उसके नीलामी की कोई योजना या निर्देश नहीं हैं। वहीं छात्रों का आरोप है कि तीस हजार करोड़ से ज्यादा की इस जमीन को सिटी पार्क, आवासीय और कर्मिशयल प्रोजेक्ट के नाम पर निजी हाथों में सौंपने का प्रस्ताव भी तैयार हो रहा है।


दरअसल सारा मामला करीब दस दिन पहले हुई एक बैठक के बाद गर्माया है। शासन के निर्देश पर जिला प्रशासन ने महाविद्यालय की जमीन का अवलोकन कर कॉलेज प्रशासन से सारी जानकारी मांगी थी। लोक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग के प्रमुख सचिव अनिरुद्ध मुखर्जी इस सिलसिले में इंदौर भी आए थे। कलेक्टर मनीष सिंह सहित अन्य अधिकारियों के साथ बैठक की थी। इसी दौरान कॉलेज के अधिष्ठाता और अन्य लोगों को बुलाकर जमीन के बारे में जानकारी ली थी। चर्चा है कि प्रदेश का लोक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग कॉलेज की जमीन की जानकारी जुटाकर इसे नीलाम करने की योजना बना रहा है। जिले में दूसरी जगह जमीन उपलब्ध कराने को लेकर भी प्रस्ताव रखा गया है, दो जगह के बारे में चर्चा भी हुई है। अनाधिकृत जानकारी के मुताबिक महाविद्यालय के लिए दूसरी जगह जमीन के मामले में कॉलेज अधिकारियों ने असहमति जताई है। अधिकृत रूप से उनका कहना ह ैकि शासन जो आदेश देगा, हमें मानना होगा। 
 
Indore: Agriculture college plans to grab land worth 30 thousand crores in the name of smart city
जमीन हड़पने का आरोप लगाकर छात्रों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। - फोटो : सोशल मीडिया
कॉलेज में दो-तीन दशक से कुछ अनुसंधान परियोजनाएं चल रही हैं। यदि जमीन को किसी और उपयोग के लिए ले लिया जाता है तो भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद और अन्य अंतरराष्ट्रीय सहयोग से चल रही अनुसंधान परियोजनाएं ठप हो जाएंगी। यहां भारत सरकार के सहयोग से अलग-अलग फसलों और जलवायु आधारित आठ-दस अनुसंधान परियोजनाएं संचालित हैं। 

मामले के बाद अब कृषि कॉलेज के बाहर पूर्व छात्रों, वर्तमान छात्रों सहित कई संगठन ने इस प्रक्रिया का विरोध करते हुए धरना देना शुरू कर दिया है। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे राधे जाट ने बताया कि यहां दो-तीन दशक से शोध कार्य किए जा रहे हैं, कई दशकों से खेती की जा रही है, जैविक जमीन तैयार की गई है। अब इसे कमर्शियल बिल्डिंग के लिए लेने की योजना बनाई जा रही है।

यहां करीब 300 एकड़ जमीन है। एक हिस्से में कॉलेज है, दूसरे में शोध सहित दूसरे काम होते हैं। कृषि कॉलेज की लगभग 30000 करोड़ की ज़मीन इंदौर के ना सिर्फ फेफड़े हैं बल्कि पिछले कुछ सालों में यहां के अनुसंधान केंद्र में हजारों क्विंटल ब्रीडर सीड बने हैं जिससे किसानों को प्रामाणिक बीज मिले। कहां तो इस महाविद्यालय को विश्वविद्यालय में बदलने की योजना थी, कृषि मंत्री ने नाम पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी कृषि विश्वविद्यालय करने का ऐलान भी किया था। लगभग 90 साल से इंदौर कृषि कॉलेज में ज्वार,चना,सोयाबीन सहित मिट्टी परीक्षण, जल प्रबंधन की कई तकनीकों पर काम और अनुसंधान हो रहा है।
 
Indore: Agriculture college plans to grab land worth 30 thousand crores in the name of smart city
मेधा पाटकर और अरुण यादव भी यहां आकर विरोध दर्ज करा चुके हैं। - फोटो : सोशल मीडिया
जाट का कहना है कि सालों पहले ब्रिटिश वैज्ञानिक सर अल्बर्ट हार्वर्ड ने इसी कॉलेज में जैविक अनुसंधान कर कंपोस्ट विधि से जैविक खाद तैयार की थी, जिसे देखने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी भी यहां आए थे। कृषि में सरकारें नवाचार की बात करती हैं लेकिन इसके लिए अनुसंधान के लिए जमीन चाहिए, क्योंकि चावल, गेहूं, फल-फूल टेस्ट ट्यूब में तैयार नहीं हो सकती, उसके लिए मिट्टी ही चाहिये, मॉल नहीं।

राधे जाट ने बताया कि कॉलेज की जमीन मामले में प्रदेश सरकार में मंत्री तुलसीराम सिलावट ने भी सीएम को पत्र लिखा है, उन्होंने कृषि अनुसंधान की जमीन महाविद्यालय के पास रहने देने का आग्रह भी किया है। वहीं विधायक महेंद्र हार्डिया ने भी मीडिया में बयान दिया था कि जमीन का और कोई उपयोग नहीं होना चाहिए। कृषि मंत्री कमल पटेल तो इस कॉ़लेज को विश्वविद्यालय बनाने की बात कह चुके हैं। 
 
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बीते आठ दिन से छात्र विरोध में धरना दे रहे हैं। गुरुवार को विरोधस्वरूप कांवड़ यात्रा निकालेंगे। - फोटो : सोशल मीडिया
जिला प्रशासन के अधिकारी का कहना है कि कृषि महाविद्यालय के पास जो भूमि है, हमने केवल अपने रिकॉर्ड के लिए उसी का विवरण मांगा था, जबकि इसे सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग के पोर्टल पर नीलामी के लिए अपलोड नहीं किया गया है, ऐसी कोई योजना या निर्देश नहीं है। 

महाविद्यालय के अधिष्ठाता शरद चौधरी का कहना है कि हमें संभागायुक्त ने 15 जुलाई को बुलाया था, हमसे जानकारी चाही थी कि वर्तमान में कॉलेज जमीन पर क्या-क्या कार्य किए जा रहे हैं, क्या उपयोगिता है। हमने अगले दिन उन्हें लिखित में सारी जानकारी उपलब्ध करा दी है। 18 जुलाई को माननीय अनिरुद्ध मुखर्जी आए थे, तब भी हमें जानकारी के साथ बुलाया गया था। इसके बाद हमसे कोई संपर्क नहीं हुआ है। छात्रों ने समाचार पत्रों में पढ़कर विरोध जताया है। समाचार पत्रों में जानकारी कहां से आई, हमें पता नहीं है। मामले में हमने कृषि मंत्री कमल पटेल से चर्चा करने की कई कोशिश की, पर संपर्क नहीं हो सका। 
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