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स्कूल में दोस्तों को साइबर फ्रॉड से बचाते थे, स्टार्टअप खड़ा किया, आज दुनियाभर में इनके 500 क्लाइंट

Tue, 21 Feb 2023 12:49 AM IST
अर्जुन रिछारिया न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: अर्जुन रिछारिया Updated Tue, 21 Feb 2023 12:49 AM IST
सार

साइबर क्राइम की दुनिया में सनी वाधवानी बने लोगों के हाइटेक मददगार, सेमिनार के माध्यम से पांच हजार लोगों को कर चुके जागरूक
 

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सनी वाधवानी - फोटो : अमर उजाला, इंदौर
कहते हैं न कि यदि बचपन में ही आपकी रुचि किसी फील्ड में जाग जाए तो फिर आपको बेहद कम उम्र में सफलता पाने से कोई नहीं रोक सकता। कुछ ऐसी ही कहानी है इंदौर के सनी वाधवानी की जो स्कूल में अपने दोस्तों को साइबर फ्रॉड से बचाते थे और आज दुनियाभर की कंपनियां उनसे इसके लिए सर्विस ले रही हैं। 


आज का भारत अधिक डिजिटल और कनेक्टेड हो गया है। देश में इंटरनेट यूजर्स की संख्या भी 80 करोड़ के पार पहुंच गई है। इस साल 5जी की शुरुआत के साथ डिजिटल भारत को और ज्यादा रफ्तार मिलने की उम्मीद है, लेकिन इसके साथ अभी भी सबसे बड़ी समस्या साइबर हमलों को लेकर है, बढ़ते यूजर बेस के साथ जिसके और बढऩे की आशंका है। इस साल क्रिप्टो से संबंधित घोटाले, रैंसमवेयर और डीपफेक से जुड़े अपराध भी बढऩे का अनुमान है। भोले-भाले ऑनलाइन यूजर्स को डिजिटल मंच पर और ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है। ऐसे समय में साइबर एक्सपर्ट की सबसे ज्यादा जरूरत है। साइबर क्राइम से आज हर तीसरा व्यक्ति किसी ना किसी रूप से परेशान है। ऐसे समय में यंग साइबर एक्सपर्ट सनी वाधवानी ऐसे लोगों के लिए एक नई उम्मीद बनकर आए हैं। वह अलग-अलग प्लेटफॅार्म के जरिए सोशल मीडिया और साइबर क्राइम के शिकार लोगों की मदद कर रहे हैं। 
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सनी वाधवानी - फोटो : अमर उजाला, इंदौर
नेत्रहीन बच्चों के बीच तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा
साइबर एक्सपर्ट सनी वाधवानी ने वर्ष 2004 में साइबर क्राइम रोकने के लिए अपनी मुहिम की शुरुआत की थी। 2016 में सनी ने अपनी कंपनी वाधवानी इंटरप्राइजेज के माध्यम से विश्व भर में 500 से अधिक क्लाइंट्स का एक मजबूत नेटवर्क तैयार कर लिया। एक हजार डॉलर से भी कम पूंजी से शुरू की गई उनकी कंपनी सफलता के नए आयाम लिख रही है। कंपनी विश्वभर में अपने ग्राहकों को हाइटेक टेक्नोलॅाजी की मदद से साइबर क्राइम और अटैक से बचाने के लिए बेहतर समाधान दे रही है। साइबर एक्सपर्ट सनी वाधवानी अपने लेक्चर और सेमिनार के जरिए अब तक ऑनलाइन धोखाधड़ी और साइबर अपराध से संबंधित 5000 से ज्यादा लोगों के बीच जागरूकता फैला चुके हैं। सनी द्वारा डिजिटल मीडिया मार्केटिंग, डिजिटल प्रोडक्शन एवं डिजिटल पब्लिशिंग जैसे विषयों में करीब 2500 छात्रों को प्रशिक्षित किया जा चुका है। सनी के द्वारा समय-समय पर शहर के नेत्रहीन बच्चों के बीच तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए सेमिनार किए जाते हैं, जिसके लिए हेलेन केलर अकेडमी ब्लाइंड स्कूल द्वारा भी उन्हें सम्मानित किया जा चुका है।

नगर निगम के साथ इंदौर में शुरू किया साइबर मित्र अभियान 
इंदौर में साइबर सुरक्षा को लेकर एक नई पहल शुरू की गई है। साइबर सुरक्षा तथा साइबर जागरूकता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सनी ने नगर निगम इंदौर के साथ साइबर मित्र अभियान का आरंभ किया है। हाल ही में एआईसीटीएसएल के बोर्ड रूम में शुरू हुए इस कार्यक्रम की अध्यक्षता इंदौर महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने की। सनी की टीम हिंदी भाषा में आसान तरीके से लोगों को साइबर क्राइम के बारे में जागरूक कर रही है। कंपनी का सबसे बड़ा लक्ष्य है ऐसे लोगों को जागरूक करें जो स्मार्टफोन और साइबर की दुनिया में होने वाले हमलों से पूरी तरह अनजान हैं। इसमें खासतौर पर युवाओं के साथ बच्चों को भी अवेयर किया जा रहा है।
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सनी वाधवानी - फोटो : अमर उजाला, इंदौर
सनी को मिले कई अवार्ड्स 
- एमपी की उड़ान - यूथ आइकॉन और आईटी एक्सपर्ट
- पत्रिका 40 अंडर 40 एंटरप्रेन्योर, डिजिटल एंटरप्रेन्योर और ई-बिजनेस में विजेता
- मेटीकुलस मेंटर - देवर्थ अवार्ड
- सबसे तेज रोमन टाइपिंग और सबसे तेज अंग्रेजी पंग्राम टाइपिंग का विश्व रिकॉर्ड
- सबसे युवा डिजिटल उद्यमी

इंदौर साइबर क्राइम का नया टारगेट 
सनी बताते हैं हिंदुस्तान के दिल मप्र और इंदौर में आईटी कंपनियों के आने के साथ कई बड़े साइबर अटैक के लिए भी कंपनियों को तैयार रहना होता है। साइबर कंपनियां अभी तक केवल मुंबई दिल्ली जैसे शहरों को टारगेट करती थी। इंदौर अब साइबर क्राइम का नया ठिकाना बन गया है। साइबर सुरक्षा पर और अधिक कार्य करने की जरूरत होगी, क्योंकि अब साइबर अपराधियों ने भी नए-नए तरीके खोज लिए हैं। हाल के साइबर हमलों की बात करें, तो आंकड़े कम चौंकाने वाले नहीं हैं। 2021 की पहली छमाही के दौरान लगभग 40.9 अरब ईमेल खतरों, मलिशस फाइलों और यूआरएल को ब्लॉक किया गया। यह बात ग्लोबल साइबर सिक्योरिटी फर्म ट्रेंड माइक्रो की रिपोर्ट में सामने आई है। वैश्विक स्तर पर देखें, तो रैंसमवेयर सबसे बड़ा खतरा है। पिछले साल भारत में रैंसमवेयर के 12.98 प्रतिशत मामले रहे, जो एशिया में चीन के बाद दूसरा सबसे ज्यादा है।
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