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Khajuraho Dance Festival: तीसरे दिन नृत्यों में खिले फागुन और बसंत के रंग, नृत्य की हर शैली ने किया मंत्रमुग्ध

Wed, 22 Feb 2023 10:40 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छतरपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छतरपुर Published by: दिनेश शर्मा Updated Wed, 22 Feb 2023 10:40 PM IST
सार

दुनिया भर में अपने सौंदर्य के लिए प्रसिद्ध खजुराहो के मंदिर फागुन के इस दिलकश मौसम में खुद पर फूले नहीं समा रहे। खजुराहो नृत्य समारोह ने इन मंदिरों की खूबसूरती में मानो सितारे टांक दिए हैं। 

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Khajuraho Dance Festival: The colors of Phagun and Basant blossomed in dances on the third day
खजुराहो नृत्य समारोह में प्रस्तुति देती नृत्यांगना। - फोटो : सोशल मीडिया
दुनिया भर में अपने सौंदर्य के लिए प्रसिद्ध खजुराहो के मंदिर फागुन के इस दिलकश मौसम में खुद पर फूले नहीं समा रहे। खजुराहो नृत्य समारोह ने इन मंदिरों की खूबसूरती में मानो सितारे टांक दिए हैं। हर दिन ऐसी ही अनुभूति से लोग गुजरते हैं। तीसरे दिन भी ऐसा ही अनुभव रसिकों ने किया। बसंत ओर फागुन मानो यहां बहार और होली गीत गाने आए हों, सचमुच ऐसी ही अनुभूति हुई जब प्रतिशा ,हिमांशी कटरगड्डा ,आरती नायर और कदम्ब सेंटर फॉर डांस के नर्तक मंच पर अवतरित हुए।


तीसरे दिन समारोह का आगाज प्रतिशा सुरेश के सत्रीया नृत्य से हुआ। सत्रीया लगभग 500 साल पुरानी शास्त्रीय नृत्य शैली है। प्रतीशा ने कृष्ण के वृंदावन आगमन पर गोपियों के साथ साथ प्रकृति के भी खुश होने के भावों को बड़े ही सहज ढंग से नृत्य में पिरोया। प्रतीशा ने बड़े ही मनोयोग से विभिन्न भाव भंगिमाओं और छोटे छोटे मूव्स के साथ पेश किया।
 
Khajuraho Dance Festival: The colors of Phagun and Basant blossomed in dances on the third day
बुधवार की दूसरी प्रस्तुति में हिमांसी कटरगड्डा एवं आरती नायर के कुचिपुड़ी और भरतनाट्यम नृत्य की जुगलबंदी पेश की। दोनों ने आदि शंकराचार्य कृत अर्धनारीश्वर स्त्रोतम पर अपनी प्रस्तुति दी। कर्नाटक शैली के विभिन्न रागों की रागमालिका और ताल मलिका में आबद्ध यह प्रस्तुति अभिभूत करने वाली थी। अर्धनारीश्वर में शिव आधे भाग में शिव और आधे में पार्वती हैं। जो शिवशक्ति का रूप है, इस रूप से शिव ने ब्रह्माजी को प्रजनन शील प्राणी के सृजन की प्रेरणा दी। हिमांसी व आरती ने इसे अपने उदात्त नृत्यभिनय और आंगिक गतियों से बखूबी निभाया। इस प्रस्तुति का संगीत संयोजन श्वेता प्रसाद ने किया था।

आज की सभा का समापन कदम्ब सेंटर फॉर डांस के कलाकारों की कथक प्रस्तुति से हुआ। ग्रुप में रूपांशी कश्यप, मिताली ध्रुव, मानसी मोदी, अभिषेक खींची, निर्जरी व्यास, वैष्णवी वकील, सुनिधि गेमावत और धारा बनेरा शामिल थीं। नृत्य की शुरुआत उपज से हुई। इस प्रस्तुति में नर्तकों ने कई पैटर्न बुने। अगली पेशकश में भारत की स्वतंत्रता के अमृत महोत्सव के उपलक्ष्य में सुवर्णा पर नृत्य प्रस्तुत किया गया। नृत्य की प्रस्तुति में पद संचालन और देह गतियों का काम देखने को मिला।

 
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