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Project Cheetah: तीन हफ्ते बाद सभी चीते सकुशल, अब भी बड़े बाड़े में छोड़े जाने पर संशय के बादल
Mon, 10 Oct 2022 01:41 PM IST
अंकिता विश्वकर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: अंकिता विश्वकर्मा
Updated Mon, 10 Oct 2022 01:41 PM IST
सार
Project Cheetah: तीन हफ्ते बाद सभी चीते सकुशल, अब भी बड़े बाड़े में छोड़े जाने पर संशय के बादल
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सभी नामीबियाई चीते स्वस्थ हैं
- फोटो : सोशल मीडिया
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मध्यप्रदेश के श्योपुर जिले में कूनो नेशनल पार्क में आए आठ नामीबियाई चीतों को तीन हफ्ते हो गए हैं। 17 अक्टूबर को उन्हें बड़े बाड़े में छोड़ा जाना है। पर कोर टीम की अंदरुनी लड़ाई और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी दिक्कतों की वजह से इस पर संशय के बादल मंडरा रहे हैं। उधर, अधिकारियों का दावा है कि दक्षिण अफ्रीका से 12 चीते और आने हैं। उनके लिए भी पार्क में तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है।
17 सिंतबर को कूनो नेशनल पार्क में छोड़े गए थे चीते
- फोटो : सोशल मीडिया
अंदरुनी बाड़े की मजबूती जरूरी
सूत्रों का कहना है कि अंदरुनी बाड़े की ऊंचाई दो मीटर है और इसे मजबूती देना आवश्यक है। कई स्थानों पर इसमें समझौता होने की गुंजाइश बनी हुई है। सीसीएफ की कंजर्वेशन बायोलॉजिस्ट एली वॉकर के हवाले से एक मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि जो जाल लगाया गया है, वह कमजोर है। चीते उस पर कूदे तो वह मुड़ जाएगी और वह जंगल में चले जाएंगे। यह उनके जीवन के लिए खतरनाक हो सकता है क्योंकि जंगल में तेंदुएं और बाघ भी हैं, जिनसे चीतों को खतरा हो सकता है। पूरी जाली में नीचे पत्थर लगाने आवश्यक है। वरना जंगली सुअर नीचे सुरंग बनाकर बाड़े में घुस सकते हैं। 11 किमी के बाड़े को ही इलेक्ट्रिफाइड किया जा सका है और ज्यादातर हिस्से में अब भी काम जारी है।
घना जंगल, मीट रखने की समस्या
जिस बाड़े में साशा, सवन्नाह और सियाया को छोड़ा जाना है, वहां जंगल बहुत घना है। इस जंगल में चीतों को शिकार करने में दिक्कत हो सकती है। इसी तरह एक खुला कुआं उनके लिए जानलेवा हो सकता है। चीतों की सुरक्षा के लिए उचित व्यवस्था करना आवश्यक है। पानी की सप्लाई भी समस्या है, जिसे दूर किया जाना आवश्यक है। फॉरेस्ट गार्ड का रेस्ट हाउस नेटवर्क में होना चाहिए, ताकि रियलटाइम में जीपीएस डेटा मिलता रहे और चीतों की सही तरीके से मॉनीटरिंग की जा सके। चीतों पर निगरानी रख रही टीमों के पास अब भी उचित ट्रैकिंग उपकरण और उचित मीट स्टोरेज फेसिलिटी नहीं है। सोलर पॉवर से चलने वाली रेफ्रिजरेशन यूनिट इतनी मजबूत नहीं है कि मांस को ठंडा रख सके।
सूत्रों का कहना है कि अंदरुनी बाड़े की ऊंचाई दो मीटर है और इसे मजबूती देना आवश्यक है। कई स्थानों पर इसमें समझौता होने की गुंजाइश बनी हुई है। सीसीएफ की कंजर्वेशन बायोलॉजिस्ट एली वॉकर के हवाले से एक मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि जो जाल लगाया गया है, वह कमजोर है। चीते उस पर कूदे तो वह मुड़ जाएगी और वह जंगल में चले जाएंगे। यह उनके जीवन के लिए खतरनाक हो सकता है क्योंकि जंगल में तेंदुएं और बाघ भी हैं, जिनसे चीतों को खतरा हो सकता है। पूरी जाली में नीचे पत्थर लगाने आवश्यक है। वरना जंगली सुअर नीचे सुरंग बनाकर बाड़े में घुस सकते हैं। 11 किमी के बाड़े को ही इलेक्ट्रिफाइड किया जा सका है और ज्यादातर हिस्से में अब भी काम जारी है।
घना जंगल, मीट रखने की समस्या
जिस बाड़े में साशा, सवन्नाह और सियाया को छोड़ा जाना है, वहां जंगल बहुत घना है। इस जंगल में चीतों को शिकार करने में दिक्कत हो सकती है। इसी तरह एक खुला कुआं उनके लिए जानलेवा हो सकता है। चीतों की सुरक्षा के लिए उचित व्यवस्था करना आवश्यक है। पानी की सप्लाई भी समस्या है, जिसे दूर किया जाना आवश्यक है। फॉरेस्ट गार्ड का रेस्ट हाउस नेटवर्क में होना चाहिए, ताकि रियलटाइम में जीपीएस डेटा मिलता रहे और चीतों की सही तरीके से मॉनीटरिंग की जा सके। चीतों पर निगरानी रख रही टीमों के पास अब भी उचित ट्रैकिंग उपकरण और उचित मीट स्टोरेज फेसिलिटी नहीं है। सोलर पॉवर से चलने वाली रेफ्रिजरेशन यूनिट इतनी मजबूत नहीं है कि मांस को ठंडा रख सके।
पीएम मोदी ने चीता प्रोजेक्ट का उद्घाटन किया था
- फोटो : सोशल मीडिया
तीन हफ्तों बाद चीते हैं सकुशल
कूनो के डीएफओ प्रकाश वर्मा ने बताया कि चीते नए माहौल में ढल गए हैं। हमें अब तक कोई दिक्कत नहीं आई है। वह पूरी तरह स्वस्थ हैं। इन तीन हफ्तों में उनमें किसी तरह की कोई स्वास्थ्य संबंधी समस्या नहीं देखी गई है। फील्ड डायरेक्टर उत्तम कुमार शर्मा ने कहा कि दक्षिण अफ्रीका से 12 चीते और आने हैं। उनके लिए अतिरिक्त क्वारंटाइन बाड़े तैयार किए जा रहे हैं।
कूनो के डीएफओ प्रकाश वर्मा ने बताया कि चीते नए माहौल में ढल गए हैं। हमें अब तक कोई दिक्कत नहीं आई है। वह पूरी तरह स्वस्थ हैं। इन तीन हफ्तों में उनमें किसी तरह की कोई स्वास्थ्य संबंधी समस्या नहीं देखी गई है। फील्ड डायरेक्टर उत्तम कुमार शर्मा ने कहा कि दक्षिण अफ्रीका से 12 चीते और आने हैं। उनके लिए अतिरिक्त क्वारंटाइन बाड़े तैयार किए जा रहे हैं।
