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Navratri 2022: यहां देवी मां को चढ़ाई जाती हैं चप्पलें और सैंडल, जानें इसके पीछे की वजह

Mon, 03 Oct 2022 10:05 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: दिनेश शर्मा Updated Mon, 03 Oct 2022 10:05 PM IST
सार

Navratri 2022: यहां देवी मां को चढ़ाई जाती हैं चप्पलें और सैंडल, जानें इसके पीछे की वजह Navratri 2022: Here slippers and sandals are offered to Mother Goddess, know the reason behind it
 

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Navratri 2022: Here slippers and sandals are offered to Mother Goddess, know the reason behind it
भोपाल का पहाड वाली माता को चप्पले चढ़ाई जाती हैं। - फोटो : सोशल मीडिया
नवरात्रि पर माता मंदिर के दर्शन और भेंट चढ़ाने का सिलसिला चलता रहता है। हम आपकों आज ऐसे मंदिर के बारे में बता रहे हैं, जहां माता को चप्पलें, सैंडल, फ्रॉक चढ़ाई जाती है। मान्यता है कि देवी मां रात में चप्पल और सैंडल को धारण करती हैं। ये भी माना जाता है कि सुंदर चप्पल-सैंडल चढ़ाने से मातारानी भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करती हैं। पुजारी बताते हैं कि बीते 20 सालों में यहां 15 लाख से ज्यादा जोड़ चप्पलें-सैंडल चढ़ाए जा चुके हैं। इन चप्पलों-सैंडलों को कन्याओं को दान दे दिए जाते हैं।

 
Navratri 2022: Here slippers and sandals are offered to Mother Goddess, know the reason behind it
भोपाल के कोलार इलाके में पहाड़ पर मंदिर बना है। - फोटो : सोशल मीडिया
हम जिस मंदिर की बात कर रहे हैं, वो मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के कोलार इलाके में स्थित है। इसे पहाड़ वाली माता या जीजीबाई मंदिर के नाम से जाना जाता है। करीब 22 साल ये मंदिर एक पहाड़ी पर बनाया गया था। मान्यता है कि तकरीबन 22 साल पहले यहां ओम प्रकाश महाराज ने मूर्ति की स्थापना की थी। पुराने लोग बताते हैं महाराज ने तब शिव-पार्वती का विवाह कराया था और खुद कन्यादान किया था। तब से ओम महाराज मां सिद्धिदात्री को अपनी बेटी मान कर पूजा करते आ रहे हैं। इसलिए यहां माता रानी को बेटी स्वरूप में पूजा जाता है। लोग माता के लिए फ्रॉक भी चढ़ाते हैं। 
 
Navratri 2022: Here slippers and sandals are offered to Mother Goddess, know the reason behind it
भक्त मन्नत मांगने और पूरी होने पर चप्पलों की भेंट चढ़ाते हैं। - फोटो : सोशल मीडिया
बीते 15 सालों से मंदिर में दर्शन करने आ रहीं उर्मिला विश्वकर्मा बताती हैं कि वैसे तो सालभर ही माता के दर्शन करने वाले पहुंचते हैं। नवरात्रि में भक्तों का तांता लग जाता है। मान्यता है कि यहां आने वाले भक्त माता रानी को चढ़ावे के लिए चप्पल, सैंडल और कपड़े लाते हैं और पूजा-अर्चना करते हैं।  उर्मिला कहती हैं कि पहली बार जब गई थी तब माता के आगे चप्पलें रखी देखीं तो आश्चर्य हुआ पर पता चला कि मन्नत के लिए लोग चप्पलें-सैंडल चढ़ाते हैं तो मन्नत पूरी होने पर भी चप्पलें-सैंडल-फ्रॉक जैसे कपड़े चढ़ाते हैं। 
 
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Navratri 2022: Here slippers and sandals are offered to Mother Goddess, know the reason behind it
मां को यहां बेटी स्वरूप में पूजा जाता है। भक्त उन्हें फ्रॉक भी पहनाते हैं। - फोटो : सोशल मीडिया
पुजारी ओमप्रकाश महाराज बताते हैं कि इस मंदिर में चप्पल के साथ-साथ चश्मा, टोपी और घड़ी भी चढ़ाई जाती है। यहां मां दुर्गा की देखभाल एक बेटी की तरह होती है। उन्होंने बताया कि पिछले 20 सालों में अब तक माता रानी के 15 लाख कपड़े चप्पल और शृंगार बदला जा चुका है। पुजारी ने बताया कि माता के भक्त न केवल देश बल्कि विदेश से भी चप्पल भेजते हैं। इस बार मां दुर्गा के लिए सिंगापुर, पेरिस, जर्मनी और अमेरिका से भी चप्पल आई हैं। जब भक्तों द्वारा चढ़ाई गई चप्पलों की संख्या बढ़ जाती है तो उसे कन्याओं में बांट दिया जाता है।

दावा- देश का पहला करवाचौथ मंदिर भी यहीं
मंदिर पुजारी ओमप्रकाश महाराज बताते हैं कि मंदिर में एक करवा चौथ मंदिर की भी स्थापना की गई है। वे दावा करते हैं कि यह देश का पहला करवा चौथ मंदिर है। उन्होंने कहा कि सवाई माधोपुर राजस्थान में केवल चौथ मंदिर है, लेकिन यहां करवा चौथ मंदिर की स्थापना की गई है। यहां हर साल करवा चौथ पर बड़ा आयोजन किया जाता है विशेष रूप से महिलाएं यहां आ कर पूजा-अर्चना करती है। इस पहाड़ी पर 12 ज्योतिर्लिंग के स्वरूप में शिवलिंग स्थापित किए गए हैं। 
 
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