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MP News: विदेश में बढ़ी एमपी के गेहूं-चावल की डिमांड, शिवराज सरकार के प्रयासों से बदले किसानों के दिन

Thu, 23 Jun 2022 02:42 PM IST
अंकिता विश्वकर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: अंकिता विश्वकर्मा Updated Thu, 23 Jun 2022 02:42 PM IST
सार

MP News: विदेश में बढ़ी एमपी के गेहूं-चावल की डिमांड, शिवराज सरकार के प्रयासों से बदले किसानों के दिन

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MP News: Demand of MP's wheat and rice increased abroad, the efforts of Shivraj government changed the days of farmers
एमपी के गेहूं की बढ़ी डिमांड। - फोटो : अमर उजाला
पांच बार ‘कृषि कर्मण’ पुरस्कार प्राप्त करने वाला एमपी अब अनाज उत्पादन और निर्यात के लिए पहचाना जाने लगा है। शिवराज सरकार की  हितकारी योजनाओं और उनके सफल क्रियान्वयन से मध्य प्रदेश के अन्नदाताओं की कठिनाइयां कम हुई हैं। प्रदेश के किसानों की समस्याएं अब सफलताओं में बदलने लगी हैं।   किसानों को उपज का उचित और लाभकारी मूल्य दिलाने के लिए राज्य सरकार ने क्रांतिकारी कदम उठाते हुए कई सुधार किए हैं। सरकार ने चना, मसूर, सरसों का उपार्जन गेहूं के पहले किए जाने का महत्वपूर्ण फैसला लिया। चना, मसूर और सरसों की फसल गेहूं की फसल के पहले आती है। किसानों को मजबूरी में कम कीमत पर बाजार में अपनी उपज बेचना न पड़े इसलिए, यह निर्णय किसानों के लिए बेहद लाभकारी साबित हुआ। 


सफलता के नए आयाम छू रहे किसान
राज्य सरकार ने ग्रीष्मकालीन मूंग को समर्थन मूल्य पर खरीदे जाने का निर्णय लिया, जिसके कारण किसानों को उनकी उपज पर बेहतर मूल्य प्राप्त हुआ है। प्रदेश ने इस साल धान खरीदी में भी रिकॉर्ड कायम किया है। सरकार ने वन ग्रामों के किसानों को भी राजस्व ग्रामों के किसानों की तरह ही फसल बीमा योजना का लाभ दिलाने का महत्वपूर्ण फैसला अन्नदाताओं के हक में लिया है। अब सभी किसानों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ मिलने लगा है। किसानों की आय को दोगुना करने की दिशा में सरकार प्रयासरत है। आत्मनिर्भर भारत और आत्मनिर्भर मध्य प्रदेश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के संकल्प को पूरा करने के लिए उठाए जा रहे सराहनीय कदम सहायक सिद्ध हो रहे हैं। 
MP News: Demand of MP's wheat and rice increased abroad, the efforts of Shivraj government changed the days of farmers
खुदरा बाजारों में गोल्डन या प्रीमियम गेहूं के रूप में जाना जाता है। - फोटो : अमर उजाला
मध्य प्रदेश ने रचा कीर्तिमान
मध्य प्रदेश ने गेहूं उपार्जन में पंजाब और हरियाणा को पीछे छोड़ कर कीर्तिमान रचा है। एमपी अब हाई क्वॉलिटी वाले गेहूं के अधिकतम उत्पादन के लिए भी जाना जाता है। यहां के किसान अब वैज्ञानिक खेती की तरफ आकर्षित हो रहे हैं। इसमें कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) भी अन्नदाताओं की पूरी मदद कर रहा है। नतीजा ये कि मध्य प्रदेश में न सिर्फ देश में उच्चतम गुणवत्ता वाले गेहूं का उत्पादन हुआ बल्कि उपार्जन के मामले में पंजाब और हरियाणा को पीछे छोड़ दिया। 

स्वाद और क्वॉलिटी की वजह से मध्य प्रदेश के शरबती गेहूं की महानगरों में बड़ी डिमांड है। इस किस्म के गेहूं की कीमत भी सबसे ज्यादा है। शरबती गेहूं को मुंबई, पुणे, अहमदाबाद और हैदराबाद जैसे महानगरों के थोक और खुदरा बाजारों में गोल्डन या प्रीमियम गेहूं के रूप में जाना जाता है। इसके साथ ही शरबती गेहूं की पहचान उत्तर भारत के शहरों और दिल्ली के बाजार में ‘एमपी के गेहूं’ के तौर पर भी है। 

‘सोने के दाने’ जैसा एमपी का गेहूं
देशभर में मध्य प्रदेश के गेहूं को ‘सोने जैसे दाने’ के नाम से ख्याति मिली है। एमपी का ‘सोने जैसे दानों’ वाला गेहूं अमेरिका समेत अनेक देशों में निर्यात होता है। खास बात ये है कि यहां के गेहूं की विदेश में बहुत डिमांड है। केंद्र सरकार अगर निर्यात पर प्रतिबंधों को शिथिल करती है, तो इसका सर्वाधिक लाभ प्रदेश के किसानों को होगा। राज्य सरकार द्वारा गेहूं के निर्यात के लिए प्रयास और बढ़ाए जा रहे हैं। प्रदेश एक्सपोर्ट के क्षेत्र में लगातार आगे बढ़ रहा है। मध्य प्रदेश के गेहूं के निर्यात में कई गुना बढ़ोतरी हुई है। प्रदेश में एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल भी बनाई गई है। इसके साथ ही यहां का बासमती चावल कनाडा और अमेरिका तक अपनी नई पहचान बना चुका है।
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मध्य प्रदेश के शरबती गेहूं की महानगरों में बड़ी डिमांड है। - फोटो : अमर उजाला
जीआई टैग के लिए किए जा रहे प्रयास
प्रदेश सरकार के अथक प्रयासों से चिन्नोर धान (बालाघाट) को जीआई टैग मिला है। प्रदेश की अन्य फसलों जैसे शरबती गेहूं, लाल ग्राम (चना), पिपरिया तुवर, काली मूंछ चावल, जीरा शंकर चावल और इंडिजीनस फसलों को जीआई टैग दिलाने के लिए कोशिश की जा रही है।

प्रदेश में जैविक खेती को बढ़ावा
राज्य सरकार के जैविक खेती को बढ़ावा देने का परिणाम है कि आज मध्य प्रदेश जैविक खेती के मामले में नंबर वन स्थान पर है। देश में 40 फीसदी से अधिक जैविक खेती एमपी में हो रही है। वर्तमान में प्रदेश में 17 लाख हेक्टेयर से ज्यादा में जैविक खेती की जा रही है। जैविक खेती के प्रोत्साहन के लिए भारतीय प्राकृतिक कृषि के क्लस्टर भी क्रियान्वित किए जा रहे हैं। खाद्यान्न फसलें, दलहन, तिलहन, सब्जियों के साथ ही बागान वाली फसलों के उत्पादन को लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है। 

मध्य प्रदेश सरकार हर कदम पर किसानों के साथ खड़ी है। राज्य में ओलावृष्टि से फसलों के नुकसान के साथ ही पशुधन की हानि पर भी मुआवजा राशि प्रदान की जा रही है। सरकार अन्नदाताओं के हित में हर वो कार्य करने के लिए संकल्पित और समर्पित है, जिससे वे चिंतामुक्त होकर फसल लें और उचित मूल्य प्राप्त कर राज्य के विकास में सहभागी बनें।
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