गौ तस्करी को रोकने के दौरान गौ-रक्षक फरसा बाबा की मृत्यु पर बागेश्वर महाराज ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि जो लोग फरसा बाबा की मौत के जिम्मेदार हैं, उन्हें फांसी की सजा दी जानी चाहिए।
बागेश्वर महाराज इन दिनों माता रानी की साधना में लीन हैं। शनिवार शाम जब वे भक्तों को दर्शन देने के लिए मंच पर पहुंचे, तब उन्होंने इस घटना का उल्लेख करते हुए बताया कि उन्हें फरसा बाबा की मौत की सूचना मिली। महाराज ने फरसा बाबा को एक समर्पित गौ-रक्षक बताते हुए कहा कि उनके जैसा गौ-रक्षक नहीं था। उन्होंने सरकार से मांग की कि इस जघन्य अपराध में शामिल दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा, विशेष रूप से फांसी दी जाए।
इस दौरान महाराज ने कहा कि यदि कोई हिंदू, हिंदुत्व और सनातन के लिए आवाज उठाता है, तो उसे धमकियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें और उनके परिवार को लगातार जान से मारने की धमकियां मिलती रही हैं। महाराज ने भावुक होते हुए कहा कि फरसा बाबा की घटना बेहद दुखद है। उन्हें कुचलकर दर्दनाक तरीके से मार दिया गया। उन्होंने बालाजी से प्रार्थना की कि दिवंगत आत्मा को अपने चरणों में स्थान दें। उन्होंने आगे कहा कि फरसा बाबा जैसे सनातन योद्धा विरले होते हैं। अगर हम स्वयं हिंदुत्व के लिए नहीं लड़ सकते, तो कम से कम जो इसके लिए संघर्ष कर रहे हैं, उनके साथ खड़े होना चाहिए।
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फरसा वाले बाबा की मौत पर बवाल
- फोटो : अमर उजाला
मामला क्या था
उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के छाता में बाबा चंद्रशेखर उर्फ 'फरसा वाले बाबा' की बीते दिनों मौत हो गई। बाबा चंद्रशेखर को क्षेत्र में गो-तस्करों की सक्रियता की सूचना मिली थी। वे अपनी टीम के साथ तस्करों का पीछा कर रहे थे। नवीपुर के समीप तस्करों ने क्रूरता की हदें पार करते हुए अपनी गाड़ी बाबा के ऊपर चढ़ा दी, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। उनकी मौत के बाद शनिवार सुबह लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। भीड़ ने दिल्ली-आगरा हाईवे जाम कर पुलिस पर पथराव किया, जिससे दहशत का माहौल बन गया। पथराव में पुलिस की गाड़ियां भी क्षतिग्रस्त हो गईं। हालात पर काबू पाने के लिए सेना की टुकड़ी ने मोर्चा संभाला है। हालात पर काबू पाने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले दागने पड़े।
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फरसे वाले बाबा
- फोटो : अमर उजाला
जानें कौन थे बाबा चंद्रशेखर
बाबा चंद्रशेखर मूल रूप से फिरोजाबाद के गांव गोपाल का नगला के रहने वाले थे, पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह भी इसी गांव से आते हैं। गोरक्षा में फरसा लेकर बाबा चंद्रशेखर ने 'फरसा वाले बाबा' के रूप में अपनी पहचान बनाई। गांव-गांव गो-सेवकों की टीम गठित की। करीब 200 युवाओं की टीम है, जो गोसेवा के लिए हमेशा तत्पर रहती है। बाकी बड़ी संख्या में भक्त थे। बाबा चंद्रशेखर आठ साल की उम्र में संत बन गए थे। माता-पिता की मौत के बाद घर छोड़ दिया था, फिर संत हो गए। उसके बाद आयोध्या गए। श्रीरामजन्मभूमि आंदोलन में भी हिस्सा लिया था। 20 साल तक वहां रहे, उसके बाद ब्रज में आ गए थे। यहां गोसेवा का संकल्प लिया और गोशाला चला रहे थे।मथुरा के छाता ब्लॉक के आजनोख में बाबा की एक विशाल गोशाला है। जिसमें वह गायों की सेवा करते थे। उनके इस कार्य के चलते आसपास के इलाके के लोग भी उनसे जुड़ गए थे।