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ट्रॉमा में तीन घंटे तक नहीं हो सका सीटी स्कैन, महिला ने तोड़ा दम, हंगामा

Mon, 24 Jun 2019 04:32 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Mon, 24 Jun 2019 04:32 PM IST
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women could not get treatment in trauma, died
नसरीन की मौत के बाद बिलखता परिजन - फोटो : अमर उजाला

केजीएमयू के ट्रॉमा सेंटर में डॉक्टरों की लापरवाही ने एक और महिला की जान ले ली। हादसे की शिकार महिला तीन घंटे तक कैजुल्टी में स्ट्रेचर पर तड़पती मर गई, लेकिन उसे इलाज न मिला। तीमारदाराें का आरोप है कि डॉक्टरों ने बिना सीटी स्कैन के इलाज शुरू नहीं किया।

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तीमारदार तीन घंटे तक सीटी स्कैन के लिए कतार में लगे रहे। मौत के बाद तीमारदारों ने ट्रामा में हंगामा किया। रायबरेली के अमवां निवासी नासिर की पत्नी नसरीन (30) शनिवार को बाइक से गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गईं थी।
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जिला अस्पताल से रविवार सुबह उसे केजीएमयू रेफर किया गया। नसरीन को ट्रामा के कैजुल्टी लाया गया तो यहां डॉक्टरों ने मरीज का पर्चा बनाने से लेकर तमाम जांचें लिख दीं और फिर इलाज शुरू करने की बात कही।
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नासिर ने बताया कि वह सीटी स्कैन कराने पहुंचा तो वहां भीड़ के चलते तीन घंटे बीत गए। नासिर डॉक्टरों से सीटी स्कैन जल्द करवाने को गुहार लगाता रहा, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। दोपहर करीब दो बजे नसरीन ने स्ट्रेचर पर ही दम तोड़ दिया। नासिर ने मामले की शिकायत कुलपति से करने की बात कही है।

शिकायत पर जांच करवा करेंगे कार्रवाई

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महिला की मौत के बाद रोते परिजन - फोटो : अमर उजाला

लापरवाही में हुई थी बच्चे की मौत
ट्रॉमा सेंटर में ही शनिवार को इलाज में लापरवाही से एक बच्चे की मौत हो गई थी। अमेठी निवासी पवन के नवजात बच्चे को घंटों इलाज नहीं मिला और वहां के स्टाफ ने उसका ऑक्सीजन मास्क हटाकर टॉमा के चौथे तल पर भेज दिया। ऑक्सीजन स्पोर्ट हटते ही बच्चे की मौत हो गई।

जांच को घंटों करना पड़ता 
ट्रॉमा सेंटर में सीटी स्कैन के लिए मरीजों को दो से तीन घंटे तक इंतजार करना पड़ता है। विभाग में भर्ती अति गंभीर मरीजों को डॉक्टर खुद सीटी स्कैन कराने को लाते हैं तो कैजुअल्टी के अति गंभीर मरीजों को तीमारदार खुद स्ट्रेचर पर धक्का लगाकर लाते हैं।

सीटी स्कैन के लिए सिर्फ एक ही मशीन
ट्रॉमा सेंटर में रोजाना 300-400 मरीज आते हैं। इनमें करीब 70 प्रतिशत मामले सड़क हादसे के आते हैं। वहीं, इसमें से हेड इंजरी के हर मामले में सीटी स्कैन जरूरी होता है। बावजूद इसके एक मशीन के भरोसे ही सीटी स्कैन हो रहा है। करीब दो साल पहले पीपीपी मॉडल पर दूसरी मशीन लगाने की कवायद हुई थी, लेकिन लग नहीं पाई है।

अति गंभीर मरीजों का सीटी स्कैन प्राथमिकता पर कराया जाता है। तीमारदार शिकायत करें तो मामले की जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी। - डॉ सुधीर सिंह प्रवक्ता, केजीएमयू।

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