यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा 2021 में राजधानी लखनऊ के कई मेधावियों ने सफलता का स्वाद चखा है। ज्योति मिश्रा, मोहम्मद साकिब इकबाल, चैतन्य, अंकिता मिश्रा समेत कई अभ्यर्थियों ने परीक्षा में सफलता के झंडे गाड़े हैं। इनमें अधिकतर इंजीनियरिंग बैकग्राउंड वाले हैं। अमर उजाला से बातचीत में मेधावियों ने सफलता का एक ही मूल मंत्र बताया कि सिलेबस को ध्यान में रखकर तैयारी करें और पेपर से जमकर अभ्यास करें।
UPSC: काकोरी में चौकी प्रभारी की बेटी बनी आईएएस अफसर, जिला जज के बेटे को 12वीं रैंक, इन मेधावियों ने लखनऊ का नाम किया रोशन
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पढ़ाई के दौरान दोस्तों से मिली प्रेरणा
आशुतोष कुमार का कहना है कि सेंट फिडेलिस से इंटर खत्म करने के बाद मैंने आईआईटी कानपुर से इलेक्ट्रिक इंजीनियरिंग से वर्ष 2017 में बीटेक किया। दोस्तों को यूपीएससी की तैयारी करते देखा तो मुझे भी तैयारी करने की प्रेरणा मिली। माता-पिता ने इसमें मेरा साथ दिया और इंजीनियरिंग खत्म करने के बाद तैयारी के लिए लखनऊ लौट आया। चौथे अटेंप्ट में सफलता हासिल की। तैयारी के दौरान जो विषय कमजोर थे उन पर ज्यादा फोकस किया। पिता अजय कुमार मिश्रा जेएनपीजी के केमेस्ट्री विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं और मां प्रवीणा मिश्रा जूनियर हाईस्कूल में शिक्षिका हैं।
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महिला सुरक्षा के लिए करूंगी काम
अंकिता मिश्रा का कहना है कि एक महिला होने के नाते महिला सुरक्षा और सशक्तीकरण के लिए मुझसे जो भी बेहतर हो सकेगा करूंगी। सिविल की तैयारी में ऑप्सनल की बड़ी भूमिका होती है। इसके साथ-साथ मैंने जीएस पर काफी फोकस किया। अच्छी स्टैंडर्ड बुक्स से तैयारी करनी चाहिए और नोट्स तैयार कर रिवीजन करना चाहिए। मैंने आरएलबी सी ब्लॉक से 11वीं, 12वीं की और एमएनएनआईटी से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बीटेक किया। एक साल पेप्सिको इंडिया में जॉब की और फिर असिस्टेंट कमिश्नर कॉमर्सियल टैक्स बनीं। इस बार रैंक और बेहतर मिली है। पिता डीसी मिश्रा पटना में डायरेक्टर नायलेट के पद पर तैनात हैं। मां इंदू मिश्रा गृहिणी हैं।
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मेरी गलतियों ने की तैयारी में मदद
मोहम्मद साकिब इकबाल का कहना है कि मेरा पहले से इस क्षेत्र में जाने का कोई प्लान नहीं था। अपनी जॉब के दौरान लगा कि इस प्रोफेशन को भी अपना सकता हूं। मोंटफोर्ट से स्कूली शिक्षा के बाद जामिया मिलिया से 2014 में मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की। मल्टीनेशनल कंपनी में काम करने के बाद वर्ष 2018 में यूपीएससी की तैयारी के लिए जॉब छोड़ दी। इसकी तैयारी के लिए कोई कोचिंग नहीं की। छठे अटेंप्ट में मैंने यह सफलता प्राप्त की है। तैयारी के लिए गलतियों से सीखते हुए स्मार्ट वर्क की तरफ फोकस किया। पिता समशाद आलम सेवानिवृत्त बैंक अधिकारी हैं और मां अफसर जहां गृहिणी हैं।
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मॉक टेस्ट से तैयारी में मिली सहूलियत
चैतन्य ने बताया कि मेरे पिता जी कैप्टन सुधांशु पेशे से एक शिक्षक हैं। उन्होंने मुझे हमेशा आईएएस बनने के लिए प्रेरित किया। मुझे अवसर मिलेगा तो महिलाओं और बुजुर्गों की बेहतरी के लिए काम करूंगा। मुझे तीसरे प्रयास में सफलता मिली है। मॉक टेस्ट से तैयारी में काफी सहूलियत मिली। पुराने पेपर सॉल्व करते रहना चाहिए और पूरे सिलेबस को कवर करना चाहिए, क्योंकि सवाल कहीं से भी पूछे जा सकते हैं। मूल रूप से इंदिरा नगर का रहने वाला हूं और आरएलबी सर्वोदय नगर से हाई स्कूल व इंटर और बीबीडी से बीटेक किया है। मां रीता गृहिणी हैं।
रैंक- 397