कानपुर में दबिश के दौरान हुए मुठभेड़ में शहीद सब इंस्पेक्टर महेश यादव ने गुरुवार शाम को आखिरी बार अपनी मां रामदुलारी से बात करते हुए कहा था कि मां रात को हल्दी वाला दूध पीकर सोया करो, गुनगुना पानी पिया करो, कोरोना से बचाव करना बहुत जरूरी है।
कानपुर मुठभेड़: मां हल्दी वाला दूध पीकर सोना... सुबह गांव पहुंची शहादत की खबर तो मचा हड़कंप
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
शहीद के परिजनों ने बताया कि गुरुवार रात करीब एक बजे थाने में चौबेपुर थाना क्षेत्र के बीकारू गांव में बदमाशों से मुठभेड़ की सूचना आई। इस पर महेश पुलिस दल के साथ मौके की ओर रवाना हो गए, जहां कुख्यात अपराधी विकास दुबे के साथ हुई मुठभेड़ में वह वीरगति को प्राप्त हो गए। इसकी जानकारी शुक्रवार सुबह करीब पांच बजे गांव पहुंची तो हाहाकार मच गया।
पूरे गांव में गम और मातम का माहौल पसर गया। शहीद होने की सूचना के बाद से मां रामदुलारी के आंखों के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे। वो रो-रो कर बेसुध हो जा रही थी। महेश के शहीद होने की खबर सुनते ही आसपास के गांव के लोग शहीद के परिवार को ढांढस बंधाने उनके घर पहुंचने लगे।
परिजनों ने बताया कि शहीद महेश आखिरी बार अपने गांव चाचा राजनारायण यादव की अंत्येष्टि में शामिल होने 14 जून को आए थे। व्यस्तता के कारण चाचा की तेरहवीं में शरीक नहीं हो सके लेकिन पत्नी और बच्चे आये थे। तेरहवीं के बाद पिता देवनारायण भी महेश के पास कानपुर चले गए थे और अभी तक वहीं थे।
लखनऊ के सेनानी बिहार में रहता है उनका परिवार
महेश और उनके भाई राजेश का परिवार संयुक्त रूप से लखनऊ के सेनानी बिहार में रहता है। महेश की पत्नी सुमन व दो बेटे विशाल और विराट के साथ लखनऊ में तेलीबाग सेनानी बिहार में रहती हैं। बेटा विशाल इंटरमीडिएट की परीक्षा पास कर नीट की तैयारी कोटा में कर रहा है। परिजनों ने बताया कि शहीद महेश के 17 साल बाद दूसरा बेटा हुआ है।
कठिन परिश्रम से तय किया सिपाही से एसआई का सफर
बनपुरवा मजरे हिलौली गांव के रहने वाले देवनारायण जो कि ट्यूबवेल ऑपरेटर थे उनका वेतन बहुत अधिक नहीं था लेकिन दोनों बेटों महेश कुमार व राजेश कुमार को पढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। महेश 10 किलोमीटर साइकिल चलाकर जनता विद्यालय इंटर कॉलेज पूरे पांडेय पढ़ने जाते थे। इंटर की पढ़ाई के बाद वह पुलिस में भर्ती हो गए थे। देवनारायण का दूसरा बेटा शिक्षक बन गया।
परिजनों ने बताया कि महेश शुरू से बहुत मेहनती थे। उन्होंने इंटर तक की पढ़ाई गांव से ही पूरी की। 12वीं की परीक्षा इंटर कॉलेज रौतापुर से पास की थी। छोटे भाई राकेश यादव शिक्षा विभाग में बछरावां में तैनात हैं। महेश पढ़ाई-लिखाई को लेकर बेहद सजग थे। अक्सर वे रिश्तेदारों के बेटों को भी जमकर मेहनत करके सफल होने की सलाह दिया करते थे।