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कानपुर मुठभेड़: मां हल्दी वाला दूध पीकर सोना... सुबह गांव पहुंची शहादत की खबर तो मचा हड़कंप

Fri, 03 Jul 2020 08:07 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रायबरेली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रायबरेली Published by: ishwar ashish Updated Fri, 03 Jul 2020 08:07 PM IST
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SI Mahesh Yadav talked to his mother before encounter.
अपनी पत्नी के साथ महेश यादव व गांव में मौजूद लोग। - फोटो : amar ujala

कानपुर में दबिश के दौरान हुए मुठभेड़ में शहीद सब इंस्पेक्टर महेश यादव ने गुरुवार शाम को आखिरी बार अपनी मां रामदुलारी से बात करते हुए कहा था कि मां रात को हल्दी वाला दूध पीकर सोया करो, गुनगुना पानी पिया करो, कोरोना से बचाव करना बहुत जरूरी है।



बेटे की कही बातें मां को साल रही हैं। वह यही सब याद कर बिलख पड़ती है और बेसुध हो जाती है। महेश को मित्रों रिश्तेदारों और पूरे गांव की चिंता रहती थी।

थाना क्षेत्र के बनपुरवा मजरे हिलौली गांव के रहने वाले महेश कुमार यादव (45) पुत्र देव नारायण यादव वर्ष 1996 में सहारनपुर से पुलिस में सिपाही के पद पर भर्ती हुए थे। वर्ष 2014 में दरोगा की परीक्षा में वह पास हो गए तो सबसे पहले एसएसपी कानपुर के पीआरओ की जिम्मेदारी दी गई थी। इसके बाद ईमानदारी वह मेहनत रंग लाई तो कानपुर शहर के कई थानों की कमान सौंपी गई। दो वर्षों से वह कानपुर के शिवराजपुर थाने में थानाध्यक्ष के पद पर कार्यरत थे।

SI Mahesh Yadav talked to his mother before encounter.
- फोटो : amar ujala

शहीद के परिजनों ने बताया कि गुरुवार रात करीब एक बजे थाने में चौबेपुर थाना क्षेत्र के बीकारू गांव में बदमाशों से मुठभेड़ की सूचना आई। इस पर महेश पुलिस दल के साथ मौके की ओर रवाना हो गए, जहां कुख्यात अपराधी विकास दुबे के साथ हुई मुठभेड़ में वह वीरगति को प्राप्त हो गए। इसकी जानकारी शुक्रवार सुबह करीब पांच बजे गांव पहुंची तो हाहाकार मच गया।

पूरे गांव में गम और मातम का माहौल पसर गया। शहीद होने की सूचना के बाद से मां रामदुलारी के आंखों के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे। वो रो-रो कर बेसुध हो जा रही थी। महेश के शहीद होने की खबर सुनते ही आसपास के गांव के लोग शहीद के परिवार को ढांढस बंधाने उनके घर पहुंचने लगे।

परिजनों ने बताया कि शहीद महेश आखिरी बार अपने गांव चाचा राजनारायण यादव की अंत्येष्टि में शामिल होने 14 जून को आए थे। व्यस्तता के कारण चाचा की तेरहवीं में शरीक नहीं हो सके लेकिन पत्नी और बच्चे आये थे। तेरहवीं के बाद पिता देवनारायण भी महेश के पास कानपुर चले गए थे और अभी तक वहीं थे।

SI Mahesh Yadav talked to his mother before encounter.
गांव में मौजूद पुलिसकर्मी। - फोटो : amar ujala

लखनऊ के सेनानी बिहार में रहता है उनका परिवार
महेश और उनके भाई राजेश का परिवार संयुक्त रूप से लखनऊ के सेनानी बिहार में रहता है। महेश की पत्नी सुमन व दो बेटे विशाल और विराट के साथ लखनऊ में तेलीबाग सेनानी बिहार में रहती हैं। बेटा विशाल इंटरमीडिएट की परीक्षा पास कर नीट की तैयारी कोटा में कर रहा है। परिजनों ने बताया कि शहीद महेश के 17 साल बाद दूसरा बेटा हुआ है।

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SI Mahesh Yadav talked to his mother before encounter.
- फोटो : amar ujala

कठिन परिश्रम से तय किया सिपाही से एसआई का सफर
बनपुरवा मजरे हिलौली गांव के रहने वाले देवनारायण जो कि ट्यूबवेल ऑपरेटर थे उनका वेतन बहुत अधिक नहीं था लेकिन दोनों बेटों महेश कुमार व राजेश कुमार को पढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। महेश 10 किलोमीटर साइकिल चलाकर जनता विद्यालय इंटर कॉलेज पूरे पांडेय पढ़ने जाते थे। इंटर की पढ़ाई के बाद वह पुलिस में भर्ती हो गए थे। देवनारायण का दूसरा बेटा शिक्षक बन गया।

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SI Mahesh Yadav talked to his mother before encounter.
- फोटो : amar ujala

परिजनों ने बताया कि महेश शुरू से बहुत मेहनती थे। उन्होंने इंटर तक की पढ़ाई गांव से ही पूरी की। 12वीं की परीक्षा इंटर कॉलेज रौतापुर से पास की थी। छोटे भाई राकेश यादव शिक्षा विभाग में बछरावां में तैनात हैं। महेश पढ़ाई-लिखाई को लेकर बेहद सजग थे। अक्सर वे रिश्तेदारों के बेटों को भी जमकर मेहनत करके सफल होने की सलाह दिया करते थे।

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