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कै. मनोज की बातों ने सौमित्र को शहीदों के हक की लड़ाई लड़ने के लिए किया प्रेरित, जानें पूरा वाक्या

Wed, 14 Aug 2019 11:17 AM IST
Amulya Rastogi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: Amulya Rastogi Updated Wed, 14 Aug 2019 11:17 AM IST
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saumitra is fighting for the rights of martyrs
सौमित्र त्रिपाठी - फोटो : amar ujala

सरहदों की रक्षा करते हुए शहीद होने वाले जांबाजों के परिजनों के हकों की लड़ाई पिछले पंद्रह वर्षों से बदस्तूर जारी है। पेंशन से लेकर उन्हें मिलने वाली सरकारी सुविधाएं दिलाने तक के लिए दौड़भाग करते हैं लखनऊ के ऐशबाग निवासी सौमित्र त्रिपाठी।


केकेवी से जीव विज्ञान में स्नातकोत्तर करने के बाद सौमित्र त्रिपाठी शहीदों के परिजनों की सेवा में जुट गए।

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सौमित्र त्रिपाठी - फोटो : amar ujala

सौमित्र बताते हैं कि जब वह दस साल के थे तो चारबाग स्टेशन पर कैप्टन मनोज पांडेय से उनकी मुलाकात हुई, जिनसे उन्होंने सेना में भर्ती होने के बारे में जानकारी ली। जिस पर उन्हें शहीद पुनीत नाथ दत्त के बारे में बताया और कहा कि हमारी शहादत को लोग भूल जाते हैं। परिजनों का ख्याल नहीं रखते, जिसके बाद उन्होंने शहीद परिजनों के लिए काम करने की मन में ठान ली।

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सौमित्र त्रिपाठी - फोटो : amar ujala

शहीदों से जुड़ी न्यूज कलेक्ट करने लगे। 2005 से सौमित्र ने कारगिल विजय दिवस मनाना शुरू किया। 50 से अधिक  परिजनों को सम्मानित कर चुके हैं। उन्होंने बताया कि उस वक्त केवल कैप्टन मनोज पांडेय को ही लोग जानते थे। उन्होंने जिला सैनिक कल्याण बोर्ड से सभी शहीदों की जानकारी निकलवाई और 2008 में ‘जरा याद इन्हें भी कर लो’ किताब लिखी।

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सौमित्र त्रिपाठी - फोटो : amar ujala

वह शहीदों के परिजनों की आर्थिक मदद भी करते हैं। पेंशन से लेकर सरकार द्वारा दी जाने वाली सुविधाओं को मिलने में जो दिक्कतें आती थीं, उन्हें दूर करवाने के काम करवाए।
 

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सौमित्र त्रिपाठी - फोटो : amar ujala
इसके अतिरिक्त पिछले पांच वर्षों में सशस्त्र सीमा बल व गोरखा रेजीमेंट के जवानों को सिविल एरिया में लाकर रक्षाबंधन के उपलक्ष्य में कार्यक्रम करवाते हैं। अगले साल इसे और बड़े स्तर पर किए जाने की तैयारी है।
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