बेटियों की जागरुकता व सशक्तिकरण के लिए अमर उजाला की ओर से आयोजित पुलिस की पाठशाला कार्यक्रम में बेटियों ने डिप्टी एसपी तनु उपाध्याय से सुरक्षा व जागरुकता को लेकर सवाल पूछे और साथ ही ये भी कहा कि आखिर बच्चे तो मां-बाप से ही सीखते हैं। इसलिए जरूरी है कि उनके लिए पुलिस की पाठशाला लगाई जाए। लखनऊ के गोमती नगर के मॉडर्न एकेडमी में आयोजित पुलिस की पाठशाला में बेटियों ने अपने मन की बात बेबाक अंदाज में कही और समाज में उनके साथ हो रहे भेदभाव पर चर्चा की।
बेटियों की मांग- पापा, मम्मी को मारते हैं, पैरेंट्स के लिए भी लगे पुलिस की पाठशाला
सवाल- छात्रा प्रगति ने पूछा कि हमारे देश में शहरी क्षेत्रों में तो लोग जागरुक हैं पर ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी लड़कियों को लड़कों से कम महत्व क्यों दिया जाता है और इसमें बदलाव कैसे आएगा?
- इस पर तनु उपाध्याय ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी अब साक्षरता का स्तर बढ़ रहा है। 'बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ' जैसे कार्यक्रम उनमें जागरुकता पैदा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि बदलाव एक दिन में नहीं आते। इसके लिए लगातार काम करना पड़ता है। जिस तरह से साक्षरता के स्तर में बढ़ोतरी दिख रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में और बदलाव दिखेंगे।
सवाल- रेप जैसे अपराध से कैसे बचा जा सकता है और कानून की मदद कैसे ले सकते हैं?
- तनु उपाध्याय ने कहा कि 90 फीसदी रेपिस्ट दूर के रिश्तेदार और सगे संबंधी होते हैं। इसलिए जरूरी है कि पहले खुद ही अलर्ट रहें। माता-पिता से हर बात बताएं। उनका लव अनकंडीशनल होता है। अगर वो आपको कोई सलाह देते हैं तो उसे मानें और अगर भी गलत होता है तो पुलिस को सूचना दें। कानून हर अपराधी के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई करेगा।
तनु उपाध्याय ने बेटियों को ये टिप्स भी दिए-
- किसी ऐसे शख्स के साथ कभी भी बाहर न जाएं जिसे आप ठीक से न जानती हों।
- अपने थाने के एसएचओ का नंबर अपने पास रखें और न हो तो पुलिस को 100 नंबर पर कॉल करें।
ये भी करें-
तनु उपाध्याय ने कहा कि आप अलर्ट रहकर खुद को बचा सकती हैं। अन्याय के खिलाफ आवाज उठाएं। पुलिस की मदद लें। पुलिस हर शिकायत को पूरी गंभीरता से लेती है।