भले ही सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील कपिल सिब्बल ने सर्वोच्च न्यायालय से श्रीराम जन्मभूमि और बाबरी मस्जिद विवाद में सुनवाई 2019 के लोकसभा चुनाव बाद करने की मांग की हो, पर उनके तर्क से बहुत लोग सहमत नहीं हैं। कुछ की राय है कि फैसले में देरी से कोई दिक्कत नहीं है। तो कुछ जल्द फैसला चाहते हैं। पर, सबकी इच्छा यही है कि जो भी हो, अदालत को इस मामले में फैसला कर ही दे।
अयोध्या मुद्दे पर शिया-सुन्नी एकमत, सबकी यही राय- जल्द हो फैसला, कपिल सिब्बल से सहमत नहीं
विवाद खत्म होना जरूरी
चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ के उर्दू विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. असलम जमशेदपुरी का कहना है कि अब विवाद खत्म होना चाहिए। कुछ लोग इस मामले को लटका कर रखना चाहते हैं। इस पर सियासत करना चाहते हैं। एक आम आदमी के नजरिए से मेरी इच्छा है कि इस पर सियासत नहीं होनी चाहिए। मामले का कोई न कोई नतीजा अब निकल ही आना चाहिए। यह जितनी जल्दी हो जाए उतना ही देश और समाज के लिए ठीक रहेगा।
सुनवाई शुरू हो तो रुके नहीं
सुन्नी धर्मगुरु एवं ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली कहतै है कि काफी कागज हैं। इसलिए उन्हें पढ़ने का दोनों पक्षों को पढ़ने का पूरा मौका देना पूरी तरह ठीक है। अब यह विवाद खत्म होना चाहिए। सर्वोच्च न्यायालय ने 8 फरवरी से सुनवाई शुरू करने को कहा है। मेरी बस यही इच्छा है कि अब जब भी सुनवाई शुरू हो तो उसे फिर रोका न जाए। लगातार सुनवाई हो और फैसला किया जाए।
फैसला जजों पर छोड़ दें
शिया धर्मगुरु एवं मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के उपाध्यक्ष मौलाना डॉ. कल्बे सादिक कहते हैं कि मुझे इससे कोई मतलब नहीं कि इस विवाद का फैसला जल्द हो या उसमें देरी की जाए। बस किसी का खून नहीं बहना चाहिए। वैसे भी जब कोई मामला न्यायालय में चला जाता है तो यह जज का अधिकार होता है। जज जब सारे बिंदुओं पर गौर कर लेता है, तथ्यों को जांच-परख लेता है, तब फैसला करता है।
सुनवाई टालने में कोई हर्ज नहीं
सुन्नी धर्मगुरु मौलाना इरफान मियां फिरंगी महली का कहना है कि जिस तरह के हालात हैं उनको देखते हुए सर्वोच्च अदालत का फरवरी से सुनवाई करने का फैसला बिल्कुल ठीक है। अभी हालात बिगड़ सकते थे। सही फैसला करने में वक्त लगता ही है। अदालत को जितना वक्त लेना है, वह ले। इतने पेंचीदे मामले का फैसला जल्दबाजी में नहीं हो सकता। अभी सुनवाई का कुछ सियासी दल फायदा उठा सकते थे।