जब बेटी की मैरिज से पहले मिला मुआवजा तो यूं छलक पड़े मां के आंसू , बोलीं- अब आसानी से हो जाएगी शादी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
दो दिन बाद बेटी की शादी है। दावत, दहेज व खरीदारी का लंबा खर्च। पैसों का कोई बंदोबस्त नहीं। पुरानी हाईकोर्ट बिल्डिंग में बृहस्पतिवार को रेल दावा अभिकरण(आरसीटी) की लोक अदालत में सीतापुर की बिसवां निवासी नंदरानी इसी उधेड़बुन में डूबी हुई थी।
अचानक देर शाम जब उन्हें पति की मौत के मुआवजे की रकम मिली तो उनके आंसू छलक पड़े। नंदरानी ने बताया कि 2012 में पति नंदराम की मौत ट्रेन से कटकर हो गई थी, इसके बाद आरसीटी में वाद दायर किया था। नंदरानी ने बताया कि दो दिन बाद बिटिया आरती की शादी है, इसलिए जब बृहस्पतिवार को लोक अदालत में बुलाया गया तो उम्मीद बंधी कि सात साल से अटका मुआवजा शायद मिल जाए। पति तो नहीं हैं, लेकिन अब हर्जाने से मिली रकम से बिटिया की शादी आसानी से हो जाएगी।
ट्रेन से गिरकर सिर फटा, मिले 1.30 लाख
अधिकारियों ने बताया कि आरसीटी लखनऊ में कुल सात हजार मामले लंबित हैं, जोकि देशभर में कुल मामलों का 20 प्रतिशत हैं। लोक अदालत हर तीन से चार महीने के अंतर पर लगाई जाएगी। कानपुर के अजय ने बताया कि मारीपत स्टेशन के पास मुरी एक्सप्रेस से यात्रा के दौरान ट्रेन से गिर गए थे। सिर फटने पर जैसे-तैसे इलाज हुआ, फिर आरसीटी में वाद दायर किया। लोक अदालत से पहली किश्त का 1.30 लाख रुपये का चेक मिला है।