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कोरोना फाइटर्सः केजीएमयू के इन कर्मचारियों के जज्बे को सलाम, जान की परवाह किए बगैर जुटे हैं सेवा में

Thu, 23 Apr 2020 04:22 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Thu, 23 Apr 2020 04:22 PM IST
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KGMU employees are serving corona patients
केजीएमयू के कोरोना फाइटर्स। - फोटो : amar ujala
कोरोना मरीजों के इलाज में लगे केजीएमयू के कर्मचारी अपनी जान की परवाह किए बिना मैदान में डटे हैं। उनके चेहरे पर जरा सा भी खौफ नहीं है। कई कर्मचारी तो ऐसे हैं, जिन्हें इसका भी आभास नहीं होता कि कब सुबह से शाम और कब शाम से सुबह हो गई। शुरुआती दौर में जिन्हें डर लगा, वे भी अब पूरे मनोयोग से मरीजों की सेवा में जुटे हैं। उनका कहना है कि ऐसा मौका बार-बार नहीं आता। वरिष्ठ अधिकारियों का साथ उनका हौसला बढ़ा रहा है। पेश है मरीजों के इलाज में लगे कुछ कर्मचारियों की दास्तां।


 
KGMU employees are serving corona patients
संदीप चौधरी। - फोटो : amar ujala
मां बोली, नौकरी छोड़ दो, पिता ने कहा-डटे रहो
ट्रामा सेंटर के लैब में काम कर रहे टेक्नीशियन संदीप चौधरी की निगाह एक-एक सैंपल पर रहती है। सात दिन तक लैब में रहने के बाद 14 दिन क्वारंटीन रहना होगा। संदीप पर लैब के साथियों के रहने से लेकर खाने तक की व्यवस्था की भी जिम्मेदारी है। अंबेडकरनगर के मूल निवासी संदीप ने जब घर में बताया कि वह 21 दिन तक नहीं लौट पाएंगे तो मां ने अपनी बीमारी का हवाला दिया। कहा कि बीच में कुछ हो गया तो तुम मुझे देख नहीं पाओगे। उन्होंने नौकरी छोड़ कर लौटाने को कहा। इस पर संदीप ने दोस्त से मां की दवाई भिजवाई और पिता से बात की। उन्होंने ड्यूटी पर डटे रहने को कहा। संदीप ने पैथोलॉजी विभाग के डॉ. वाहिद अली से बात की तो उन्होंने हौसला बढ़ाते हुए कहा कि ऐसा मौका जीवन में फिर नहीं मिलेगा। इस पर उन्होंने सेवा में लगे रहने का फैसला लिया।
 
KGMU employees are serving corona patients
कमलेश कुमार। - फोटो : amar ujala

कब रात हो जाती है, पता ही नहीं चलता
केजीएमयू के वरिष्ठ लिपिक कमलेश कुमार कोरोना वार्ड में तैनात हैं। वह कहते हैं कि मरीजों की संख्या बढ़ने के साथ ही लिखा-पढ़ी का काम अत्यधिक बढ़ गया है। सीएमओ ऑफिस से लेकर शासन-प्रशासन तक मरीजों का पूरा स्टेटस अपडेट करना होता है। केजीएमयू के अधिकारी से लेकर डॉक्टर तक किसी भी मरीज का डाटा मांगते हैं तो तत्काल निकालकर देना पड़ता है। ऐसी स्थिति में कब सुबह से शाम हो जाती है, पता ही नहीं चलता। कोराना के समय अलग अनुभूति देती है। हर कर्मचारी को इस समय अपना योगदान देना चाहिए। घर परिवार से दूर रहकर कुछ पल के लिए खुद को मरीजों के प्रति समर्पित करना सबसे बड़ी सेवा है।


 
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KGMU employees are serving corona patients
गौतम वाल्मीकि। - फोटो : amar ujala
अपने काम पर मुझे गर्व है
कोरोना वार्ड में ड्यूटी कर रहे गौतम वाल्मीकि कहते हैं कि उन्हें अपने सेवाकाल में पहली बार गर्व महसूस हो रहा है। इस वैश्विक महामारी की रोकथाम एवं इससे पीड़ित मरीजों को सुरक्षित घर भेजना उनका कर्म एवं धर्म है। वह इसके लिए तत्पर हैं। गौतम कहते हैं कि शुरुआती दौर में लग रहा था कि यहां काम करना जीवन को खतरे में डालना है। हालांकि, जब देखा कि सीएमएस से लेकर डॉक्टर तक मरीजों की सेवा में जुटे हैं। सभी बराबर का सम्मान देते हैं तो हौसला बढ़ा। प्रयास होगा कि क्वारंटीन का समय खत्म होने के बाद फिर काम करने का मौका मिले।

 
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KGMU employees are serving corona patients
आनंद श्रीवास्तव। - फोटो : amar ujala
राह में बाधाएं कई, फिर भी ड्यूटी पर डटे
ड्यूटी में मुस्तैद अनंत श्रीवास्तव से मरीजों का पहला सामना होता है। वह बताते हैं कि यहां आने वाली मरीजों का इलेक्ट्रॉनिक डाटा तैयार करते हैं। पहले डर लगता था, लेकिन अब यह रूटीन का काम हो गया है। मरीजों को पहले सलाह देते हैं कि मास्क पहनें और मरीजों को खुद से एक मीटर की दूरी पर कुर्सी पर बैठाते हैं। इसके बाद सभी जानकारी लेनेेे के बाद पूरा विवरण डॉक्टर को दिया जाता है। कोरोना के समय अस्पताल में ड्यूटी करने की वजह से मकान मालिक ने कमरा छोड़ने तक की बात कही। इस बात का गर्व है कि मरीजों के काम आ रहे हैं।

 
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