कोरोना फाइटर्सः आरपीएफ निभा रही सामाजिक जिम्मेदारी, ट्रेनों की सुरक्षा के साथ भूखों का भर रही पेट
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पूर्वोत्तर रेलवे के लखनऊ जंक्शन रेलवे स्टेशन के आरपीएफ प्रभारी राजेश कुमार बताते हैं कि लॉकडाउन के बाद जब ऐसी खबरें देखीं कि लोगों को खाने की समस्या हो गई है तो मन द्रवित हो गया। उसी पल गरीबों को भोजन कराने का निर्णय लिया। आला अधिकारियों से बात की तो उन्होंने प्रोत्साहित किया। इसके बाद भोजन वितरण शुरू कर दिया। एक एनजीओ ओम शांति ट्रस्ट आलमबाग के सहयोग से अभियान चल रहा है। ऐशबाग और लखनऊ जंक्शन के मध्य विहार नगर कॉलोनी, मछली मंडी तथा सरोजनीनगर सहित आसपास के इलाके में गरीब बच्चों, बुजुर्ग महिलाओं, रिक्शा चालकों व मजदूरों को भोजन के पैकेट बांट रहे हैं।
राम विनय चौहान आरपीएफ जवानों के लिए खाना पकाते हैं। इनके हाथों का खाना लजीज होता है। मेस में ड्यूटी करने के बाद राम विनय गरीबों के लिए खाना बनाते हैं। वह बताते हैं कि दोगुनी मेहनत पड़ रही है, लेकिन यह एक पुनीत कार्य है। इसे करने में खुशी मिलती है, इसलिए आराम से कर लेते हैं।
रातभर सिटी स्टेशन पर मुस्तैदी से ड्यूटी और दिन में गरीबों के लिए खाने के पैकेट बनवाना सिटी स्टेशन आरपीएफ प्रभारी एमके खान का आजकल यही रूटीन है। वह बताते हैं कि किसी भूखे को भोजन कराने से अच्छा कोई काम नहीं है। उन्होंने बताया कि यह काम 10 दिनों से अनवरत चल रहा है। शनिवार को करीब 250 खाने के पैकेट शिया कॉलेज के पास बस्ती में बंटवाए हैं। जबकि इससे पूर्व सपेरा बस्ती, गांधी नगर, माटी, बिजनौर जो लखनऊ से करीब 20 किमी दूर अमौसी एयरपोर्ट के पीछे स्थित है, वहां गरीब बच्चों, महिलाओं व पुरुषों को भोजन के पैकेट बांटे जा चुके हैं।