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बेटियों को निडर और साहसी बनाने के साथ उन्हें दें सुरक्षा, जिन्दगी मास्टर क्लास सीजन-2 में विशेषज्ञों ने दिए ये टिप्स

Mon, 12 Oct 2020 02:47 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Mon, 12 Oct 2020 02:47 PM IST
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jindgi master class season-2: amar ujala and UNICEF webinar series for youths
शालिनी, उषा विश्वकर्मा, आभा सिंह - फोटो : अमर उजाला
हाल की घटनाएं लड़कियों, महिलाओं के मन में डर पैदा करती हैं। असुरक्षा का माहौल कोविड जैसी महामारी की तरह हो गया है। बीमारी तो आज है कल खत्म हो जाएगी, लेकिन बेटियों की असुरक्षा एक अंतहीन सिलसिले की तरह हो गई है। इसका भी एक स्थायी समाधान जरूरी है। इसी संकल्प के साथ जिंदगी मास्टर क्लास सीजन-2 का आगाज रविवार से हुआ। अमर उजाला व यूनिसेफ की ओर से युवाओं के लिए वेबिनार की शृंखला आयोजित की जा रही है। रविवार को आयोजित वेबिनार का विषय था ‘बेटियों के मन का दर्द, असुरक्षित माहौल का भय बने न एक और महामारी!’ इस दौरान हमारे साथ गोरखपुर, बरेली के युवा भी जुड़े। लखनऊ से ब्राइटवे, नवयुग महाविद्यालय, पायनियर मान्टेसरी स्कूल के बच्चे वेबिनार में शामिल हुए।


 
jindgi master class season-2: amar ujala and UNICEF webinar series for youths
आभा सिंह - फोटो : अमर उजाला
कानूनी प्रावधान हैं, पर कोविड में उसका फायदा नहीं मिला
कोविड के दौरान प्रवासी मजदूरों को काफी झेलना पड़ा। इसकी दोहरी मार महिलाओं पर पड़ी। वहीं, घरेलू हिंसा के मामले बढ़े हैं। घर में पति थे, इसलिए महिलाएं मदद की गुहार के लिए बाहर तक नहीं निकल पा रही थीं। वर्क फ्राॅम होम में भी महिलाओं के शोषण के मामले आए, जरूरत इसके लिए भी आवाज उठाने की है और हमने उठाया। जरूरत है कि हमारे पास प्रावधान हैं, लेकिन हम सुविधाजनक तरह से लोगों को उसका फायदा नहीं पहुंचा पा रहे हैं। इस पर ध्यान देने की जरूरत है। - आभा सिंह, एडवोकेट, बाॅम्बे हाईकोर्ट, सोशल एक्टिविस्ट

 
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डॉ संगीता शर्मा - फोटो : अमर उजाला
लॉकडाउन में खूब हुई बाल विवाह की कोशिश
योजनाएं हैं, कानून हैं, लेकिन बात जब लड़कियों के हक की आती है तो लोगों में अपेक्षित प्रतिक्रिया नहीं दिखती है। यही वजह है कि लॉकडाउन में लोगों ने 16 बाल विवाह की कोशिश की, जिसमें से 13 रोक लिए गए, जबकि 3 मामलों में एफआईआर दर्ज कराई गई है। दरअसल संवेदनशीलता कम हो रही है, हमें इसे खत्म होने से रोकना होगा। - डॉ. संगीता शर्मा, मजिस्ट्रेट सदस्य सीडब्ल्यूसी कंसल्टेंट चाइल्ड लाइन

 
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उषा विश्वकर्मा - फोटो : अमर उजाला
अपनी लड़ाई के लिए खुद को तैयार करें
सबसे पहली जरूरत है कि थाने में महिला पीड़िता के साथ सख्त लहजे में बात करने का तरीका बदला जाए। हर लड़की को समझना होगा कि हमें अपनी लड़ाई खुद लड़नी है और खुद को शारीरिक व मानसिक दोनों तरीके से इतना सक्षम बनाना होगा। - उषा विश्वकर्मा, संस्थापक रेड ब्रिगेड

 
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शालिनी - फोटो : अमर उजाला
निचले स्तर पर अफसर न सुनें तो शीर्ष अधिकारी तक जाएं
एफआईआर से कोई लड़की डर रही है तो कई विकल्प हैं। वह अपनी शिकायत कर सकती है, जिसमें उसका नाम कहीं नहीं आता। बच्ची यदि कुछ कह रही है तो उसे सुनें, समाज क्या कहेगा के डर से उसे नजरअंदाज न करें। निचले स्तर पर यदि कोई अधिकारी नहीं सुन रहा तो आप चुप होकर बैठ न जाएं, शीर्ष अधिकारियों तक जाएं। - शालिनी, डीसीपी नॉर्थ
 
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