{"_id":"5df31fa88ebc3e87aa2c0dab","slug":"ayodhya-case-muslim-parties-said-disappointed-after-review-petition-rejected","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"मुस्लिम पक्षकारों ने कहा, रिव्यू याचिका खारिज होना मायूसी भरा, अभी खुले हैं कानून के विकल्प","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मुस्लिम पक्षकारों ने कहा, रिव्यू याचिका खारिज होना मायूसी भरा, अभी खुले हैं कानून के विकल्प
Fri, 13 Dec 2019 10:50 AM IST
शाहरुख खान
ब्यूरो, अमर उजाला, अयोध्या
ब्यूरो, अमर उजाला, अयोध्या
Published by: शाहरुख खान
Updated Fri, 13 Dec 2019 10:50 AM IST
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विवादित ढांचे के फैसले पर रिव्यू में जाने वाले मुस्लिम पक्षकारों का मानाना है कि अभी न्यायिक प्रक्रिया बंद नहीं हुई है। उन्हें देश के कानून पर पूरा भरोसा है। जल्द ही वकीलों व कानून के जानकारों से मंथन करके नया फैसला लिया जाएगा। पक्षकारों का मानना है कि अगर कोई विकल्प होगा तो उसके तहत फिर से न्याय की गुहार लगाएंगे। गुरुवार को रिव्यू याचिका खारिज होने के बाद अमर उजाला ने मुस्लिम पक्षकारों से बातचीत की है।
मो. खालिक
- फोटो : अमर उजाला
अभी खुले हैं कानून के विकल्प: मो. खालिक
मौलाना महफूजर्रहमान के नॉमनी मो. खालिक का मानना है कि अभी न्यायिक प्रक्रिया बंद नहीं हुई है। अभी और भी कानून के विकल्प खुले हुए हैं। मुस्लिम पर्सनल बोर्ड व कानून के जानकारों के साथ बैठक कर बातचीत की जाएगी। अगर संभव हुआ तो फिर से वाद दायर किया जाएगा।
पेशा व इतिहास- मौलाना महफूजर्रहमान मौलाना वकीलुद्दीन के पुत्र हैं। शुरुआत में मौलाना वकीलुद्दीन की ओर से वाद दायर किया गया था। इनकी मृत्यु के बाद मौलाना महफूजर्रहमान पक्षकार बने। मौजूदा समय में मौलाना महफूजर्रहमान दीनी तालीम का काम कर रहे हैं।
बजुर्गों के बीच में बैठकर लिया जाएगा फैसला
मौलाना महफूजर्रहमान के नॉमनी मो. खालिक का मानना है कि अभी न्यायिक प्रक्रिया बंद नहीं हुई है। अभी और भी कानून के विकल्प खुले हुए हैं। मुस्लिम पर्सनल बोर्ड व कानून के जानकारों के साथ बैठक कर बातचीत की जाएगी। अगर संभव हुआ तो फिर से वाद दायर किया जाएगा।
पेशा व इतिहास- मौलाना महफूजर्रहमान मौलाना वकीलुद्दीन के पुत्र हैं। शुरुआत में मौलाना वकीलुद्दीन की ओर से वाद दायर किया गया था। इनकी मृत्यु के बाद मौलाना महफूजर्रहमान पक्षकार बने। मौजूदा समय में मौलाना महफूजर्रहमान दीनी तालीम का काम कर रहे हैं।
बजुर्गों के बीच में बैठकर लिया जाएगा फैसला
मो. उमर
- फोटो : अमर उजाला
पक्षकार मो. उमर पांचू का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से याचिका खारिज कर दिए जाने के बाद अब हम लोग बड़े, बुजर्गों में बैठकर चर्चा करेंगे कि आगे क्या करना है। जल्द ही मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के जफरयाब जीलानी से मिलकर निर्णय लिया जाएगा। जो सबकी राय होगी वही काम किया जाएगा।
पेशा व इतिहास- मौजूदा समय में मो. उमर अयोध्या कोतवाली के निकट एक छोटी सी दुकान चलाते हैं। यह दुकान विशेषकर अयोध्या में आने वाले मेलार्थियों के लिए है। इसमें मेले की उपयोगी वस्तुएं मिलती हैं। इसके दादा महफूज अहमद विवादित परिसर के नामिनी थे और पंक्चर बनाने का काम करते थे। बाद में इनके पिता फारूख व इसके बाद अब मो. उमर अयोध्या मामले में पक्षकार बने।
पेशा व इतिहास- मौजूदा समय में मो. उमर अयोध्या कोतवाली के निकट एक छोटी सी दुकान चलाते हैं। यह दुकान विशेषकर अयोध्या में आने वाले मेलार्थियों के लिए है। इसमें मेले की उपयोगी वस्तुएं मिलती हैं। इसके दादा महफूज अहमद विवादित परिसर के नामिनी थे और पंक्चर बनाने का काम करते थे। बाद में इनके पिता फारूख व इसके बाद अब मो. उमर अयोध्या मामले में पक्षकार बने।
विज्ञापन
विज्ञापन
मो. हस्बुल्लाह
- फोटो : अमर उजाला
रिव्यू खारिज होना मायूसकुन- मो. हस्बुल्लाह
पक्षकार मुफ्ती हस्बुल्लाह का कहना है कि रिव्यू याचिका खारिज होना मायूसकुन है। उन्हें देश के कानून पर पूरा भरोसा है। कानून की हदों में रहते हुए अगर कोई और विकल्प होगा तो उस पर कार्य किया जाएगा। जल्द ही वकीलों से राय ली जाएगी और कानून की पूरी जानकारी ली जाएगी।
पेशा व इतिहास- दरअसल मुफ्ती हस्बुल्लाह उर्फ बादशाह खान हाफिज महमूद की वसीयत के आधार पर पक्षकार हुए हैं। हाफिज महमूद मुकदमे के शुरूआती समय में पक्षकार थे। हाईकोर्ट तक वह ही मुकदमे के पक्षकार रहे। इनकी मृत्यु के बाद बाद में वसीयत के आधार पर मुफ्ती हस्बुल्लाह उर्फ बादशाह खान को कोर्ट ने पक्षकार माना। यह फैजाबाद की एक मस्जिद के इमाम हैं।
पक्षकार मुफ्ती हस्बुल्लाह का कहना है कि रिव्यू याचिका खारिज होना मायूसकुन है। उन्हें देश के कानून पर पूरा भरोसा है। कानून की हदों में रहते हुए अगर कोई और विकल्प होगा तो उस पर कार्य किया जाएगा। जल्द ही वकीलों से राय ली जाएगी और कानून की पूरी जानकारी ली जाएगी।
पेशा व इतिहास- दरअसल मुफ्ती हस्बुल्लाह उर्फ बादशाह खान हाफिज महमूद की वसीयत के आधार पर पक्षकार हुए हैं। हाफिज महमूद मुकदमे के शुरूआती समय में पक्षकार थे। हाईकोर्ट तक वह ही मुकदमे के पक्षकार रहे। इनकी मृत्यु के बाद बाद में वसीयत के आधार पर मुफ्ती हस्बुल्लाह उर्फ बादशाह खान को कोर्ट ने पक्षकार माना। यह फैजाबाद की एक मस्जिद के इमाम हैं।
विज्ञापन
हाजी असद
- फोटो : अमर उजाला
वैधानिक अधिकार के तहत गए थे कोर्ट: हाजी असद
पक्षकार हाजी असद बताते हैं कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से मिले वैधानिक अधिकार के तहत रिव्यू याचिका दायर की थी। गुण-दोष के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है। अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिप्पणी करना गलत होगा। अब आगे क्या करना है, यह कानूनी सलाह से किया जाएगा।
पेशा व इतिहास- हाजी असद से पहले इनके पिता हाजी अब्दुल अहद पक्षकार थे। इनकी मृत्यु के बाद इनको पक्षकार बनाया गया है। यह मौजूदा समय में अयोध्या के वश्ष्ठि कुंड वार्ड के पार्षद हैं। शहर की मानिंद हस्तियों में इनकी गिनती है।
पक्षकार हाजी असद बताते हैं कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से मिले वैधानिक अधिकार के तहत रिव्यू याचिका दायर की थी। गुण-दोष के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है। अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिप्पणी करना गलत होगा। अब आगे क्या करना है, यह कानूनी सलाह से किया जाएगा।
पेशा व इतिहास- हाजी असद से पहले इनके पिता हाजी अब्दुल अहद पक्षकार थे। इनकी मृत्यु के बाद इनको पक्षकार बनाया गया है। यह मौजूदा समय में अयोध्या के वश्ष्ठि कुंड वार्ड के पार्षद हैं। शहर की मानिंद हस्तियों में इनकी गिनती है।