नहीं करने दी मनमानी तो डाला एसिड, तस्वीरें
वे स्कूल-कॉलेज या काम पर नहीं जातीं क्योंकि जिसने तेजाब से जलाया, वह केस वापस न लेने पर ‘जान से मारने की धमकी देता है’। उत्तर प्रदेश की 60 एसिड अटैक पीड़िताओं को रविवार को यूपी के सीएम अखिलेश यादव ने रानी लक्ष्मीबाई सम्मान प्रदान किया। यहां हर बेटी की अपनी कहानी है। ‘अमर उजाला’ ने इन एसिड अटैक पीड़िताओं से बात कर उनका हाल जाना। पेश है अभिषेक यादव की रिपोर्ट :
नहीं करने दी मनमानी तो डाला एसिड, तस्वीरें
बृजरानी बताती हैं, मैं इलाहाबाद के घूरपुर में कक्षा 11 में पढ़ रही थी। मंजू निषाद और बीरबल नाम के दो लफंगे रास्ते में खड़े रहते और छेड़ा करते थे। मेरे मां-बाप ने उन दोनों के मां-बाप से इसकी शिकायत की, जिसके बाद छेड़छाड़ बंद हो गई। मैं खुश थी कि अब कोई समस्या नहीं है, लेकिन 6 मई 2013 की रात जब मैं अपने परिवार के साथ छत पर सो रही थी कि उन दोनों ने मुझ पर तेजाब डाल दिया।
नहीं करने दी मनमानी तो डाला एसिड, तस्वीरें
गोरखपुर की संध्या देवी बताती हैं, मेरे पति शराब पीकर मुझे अक्सर पीटा करते थे। ऐसे में मैं अपने पिता के घर रहने को मजबूर हो गई। 5 मई 2013 को जब मैं मायके में दरवाजे पर खड़ी थी कि अचानक कोई मुझ पर तेजाब फेंक कर भाग गया। उस व्यक्ति को मैं देख नहीं पाई, लेकिन पुलिस ने बाद में मेरे पति को इस जुर्म में गिरफ्तार कर लिया।
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आगरा की मीना बताती हैं, अपने पति अर्जुन सिंह से हुई अनबन के बाद मैं अपने पिता के घर आकर रहने लगी थी। माता-पिता दोनों की पहले ही मौत हो चुकी है। इस पर ससुराल वालों ने राजीनामा करवाया और मुझे ससुराल लौट ले गए। हालांकि इसके पीछे पति का मकसद मुझे जान से मारना था। यह बात तब मेरी समझ में आई जब मुझ पर तेजाब फेंका गया।
नहीं करने दी मनमानी तो डाला एसिड, तस्वीरें
अमरोहा की राजेंद्री देवी ने बताया, मैं और मेरे पति बाबू सिंह मजदूर हैं। हम अपने घर में सो रहे थे कि किसी ने हम पर तेजाब फेंका और फिर मुंह में तेजाब डालकर भाग गया। मुझे हर समय जलन महसूस होती है। मसूडे़ और दाढ़ गल चुकी हैं। डॉक्टर कहते हैं कि काफी तेजाब आंतों तक चला गया था।