अस्थमा की समस्या आजकल बहुत सारे लोगों में देखने को मिलती है। जिसकी वजह से सांस फूलना, फेफड़ों का ठीक से काम ना करना शामिल होता है। अस्थमा से पीड़ित मरीज का गला और छाती प्रभावित होता है। इस बीमारी का कारण प्रदूषण, स्मोकिंग तो होता ही है। कई बार इसे आनुवांशिक भी देखा गया है। तो अगर किसी को अस्थमा की समस्या सता रही है तो उन्हें योग के इन आसनों का सहारा लेना चाहिए। इनका नियमित अभ्यास राहत पहुंचाने में मदद करता है।
2 of 4
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
अर्ध मत्येंद्र आसन
इस आसन को करने के लिए पहले आप अपने दोनों पैरों को सीधे फैला लें। इसके बाद बाएं पैर को मोड़कर एड़ी के सहारे बैठें। अब अपने दाहिने पैर के घुटने को मोड़कर खड़ा कर दें और बाएं पैर की जांघ से ऊपर ले जाते हुए जांघ के पीछे जमीन पर रख दें। इसके बाद अपने बाएं हाथ को दाहिने पैर के घुटने से पार करके दाहिने पैर का अंगूठा पकड़ें। अब अपने दाहिना हाथ को पीठ के पीछे से घुमाएं। अपने सिर को दाहिनी ओर इतना घुमाएं कि आपकी ठोड़ी और बायां कंधा एक सीधी रेखा में आ जाए। नीचे की ओर झुकें नहीं। छाती बिल्कुल तनी हुई रखें।
3 of 4
yoga
- फोटो : social media
सुखासन
सुखासन के अभ्यास के लिए किसी समतल जगह पर चटाई बिछाकर पालथी मारकर बैठ जाएं। इस आसन को करते समय मन को शांत और तनाव मुक्त रखना चाहिए। अब अपने कमर को बिल्कुल सीधा रखते हुए शरीर को तान कर रखें। इसके बाद अपने दोनों हाथों की अंगुलियां खोलकर घुटनों पर रखें। अब सामान्य रूप से प्राणायाम करते हुए आप जितनी देर तक इस आसन में बैठ सकते हैं उतनी देर बैठें।
4 of 4
योगा
- फोटो : social media
प्राणायाम
इस प्राणायाम में नाक के बाएं छिद्र से सांस खींचते हैं तो दाहिने छिद्र से सांस बाहर करते हैं। इसी प्रकार यदि दाएं छिद्र से सांस खींचते हैं तो बाएं छिद्र से सांस बाहर निकालते हैं। इस प्राणायाम के नियमित अभ्यास से शरीर की समस्त नाड़ियों का शोधन होता है, जिससे वे स्वच्छ और निरोग बनी रहती है।