दुनियाभर में सदियों से कई तरह के स्वास्थ्य लाभ के लिए योग किया जाता रहा है। कई अध्ययनों में भी स्पष्ट हो चुका है कि योग के माध्यम से शरीर की कई गंभीर बीमारियों को कम करने में मदद मिल सकती है। हृदय रोगों से लेकर डायबिटीज, फेफड़ों को स्वस्थ रखने से लेकर हड्डियों को मजबूती देने तक योग कई प्रकार से सेहत के लिए फायदेमंद माना जा सकता है। विशेषज्ञों की मानें तो हर दिन योग का अभ्यास करके हड्डियों को मजबूत करने से लेकर,ऑस्टियोपोरोसिस जैसे गंभीर रोग के जोखिम को भी कम करने में मदद मिल सकती है।
सलाह: हड्डियों में दर्द और ऑस्टियोपोरोसिस से बचना चाहते हैं तो कीजिए यह योगासन, कमर दर्द भी होगा दूर
वीरभद्रासन
हड्डियों को मजबूत रखने के साथ इससे संबंधित तमाम तरह की गंभीर समस्याओं से सुरक्षित रखने में वीरभद्रासन बेहद फायदेमंद योगासान हो सकता है। इस योगासन को करने के लिए सबसे पहले अपने पैरों को कूल्हे की चौड़ाई से अलग करके खड़े हो जाएं। अब अपने बायीं ओर एक बड़ा कदम उठाएं। अब अपने घुटनों को 90 डिग्री के कोण पर मोड़ें। अब अपने दाहिने पैर को लगभग 15 डिग्री अंदर की ओर मोड़ें। दाहिने पैर की एड़ी बाएं पैर के केंद्र में होनी चाहिए। अब अपने दोनों हाथों को साइड में उठाएं और कंधों के स्तर पर लाएं। आपकी हथेलियां ऊपर की ओर होनी चाहिए। इस पोजीशन में गहरी सांसें लें। अपने सिर को बाईं ओर मोड़ें। कुछ सेकंड के लिए ऐसे ही रुकें और फिर प्रारंभिक स्थिति में वापस आ जाएं।
वृक्षासन
हड्डियों से संबंधित तमाम तरह की बीमारियों के खतरे को कम करने में वृक्षासन योग भी काफी फायदेमंद हो सकता है। इसको करने के लिए सबसे पहले सीधे खड़े हो जाएं। अब दाहिने पैर को मोड़ते हुए इसे बाएं पैर की जांघ पर रखें। अब गहरी सांस लें और अपनी हथेलियों को सीने के सामने नमस्कार की मुद्रा में लाएं। ध्यान रहे कि इस दौरान आपकी रीढ़ सीधी रहे। इस आसन को दूसरे पैर के साथ भी दोहराएं।
सेतुबंधासन (ब्रिज पोज)
योगगुरु के मुताबिक जिन लोगों को हड्डियों में दर्द की शिकायत हो उनके लिए ब्रिज पोज योगासन काफी फायदेमंद हो सकता है। यह योग छाती को खोलते हुए गहरी सांस को बढ़ावा देता है। इस योगासन को करने के लिए सबसे पहले पीठ के बल लेट जाएं। अपने पैरों को कंधे की चौड़ाई से थोड़ा अलग करते हुए घुटनों को मोड़ लें। हथेलियों को खोलते हुए हाथ को बिल्कुल सीधा जमीन पर सटा कर रखें। अब सांस लेते हुए कमर के हिस्से को ऊपर की ओर उठाएं, कंधे और सिर को सपाट जमीन पर ही रखें। सांस छोड़ते हुए दोबारा से पूर्ववत स्थिति में आ जाएं।
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नोट: यह लेख योगगुरु के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है। आसन की सही स्थिति के बारे में जानने के लिए किसी योगगुरु से संपर्क कर सकते हैं।
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