माइग्रेन की बीमारी नाड़ीतंत्र की विकृति से उत्पन्न होती है। इसमें बार-बार सिर के आधे भाग में दर्द होने लगता है। यह बीमारी इतनी खतरनाक है कि यह आधे भाग में होती है जिसकी अवधि दो घंटे से लेकर दो दिन तक की होती है। माइग्रेन की बीमारी उल्टी होना, जी मिचलाना तथा शारीरिक गतिविधियों के साथ दर्द बढ़ने लगता है।
इन योगासनों को अपनाकर माइग्रेन के दर्द से मिलेगी राहत
यह आसन माइग्रेन के दर्द को कम करने में सहायक है। इस आसन को करने से हमारा मस्तिष्क शांत होने लगता है , जिसके कारण व्यक्ति तनाव मुक्त रहता है। सेतुबंधासन करने के लिए सबसे पहले जमीन पर लेट जाएं। इसके बाद अपने हाथों से अपनी कमर पकड़ लें। अपने कंधे और गर्दन को जमीन पर टिकाकर रखें और धीरे -धीरे अपने कूल्हें और पैर ऊपर की ओर उठा लें। कुछ देर इस अवस्था में बने रहे।
पद्मासन की अवस्था में बैठे रहने से मन को शांति की प्राप्ति होती है, जिससे सिर का दर्द खत्म होने लगता है। पद्मासन को करने के लिए पैरों को फैलाकर जमीन पर सीधे बैठ जाएं। इसके बाद अपने दाएं घुटने को मोड़कर अपने बाएं जांघ पर रख लें। इस बात का ध्यान रखें कि आपके तलवे ऊपर की ओर होने चाहिए। अब इस प्रक्रिया को दूसरे पैर के साथ दोहराएं। अब ज्ञान मुद्रा की अवस्था में बैठकर गहरी सांस लें।
माइग्रेन की स्थिति में बालासन एक बेहद ही फायदेमंद आसन है। यह आसन नाड़ी तंत्र को शांत रखता है और प्रभावी रूप से माइग्रेन में होने वाली पीड़ा को कम करता है। बालासन करने के लिए सबसे पहले आप व्रजासन की अवस्था में बैठ जाएं। इसके बाद अपने माथे को जमीन पर लगा लें।
अब अपने दोनों हाथों को जमीन पर रख लें। अब अपनी जांघो से अपनी छाटी पर दबाव डालें। इस अवस्था में आप 2-4 मिनट तक रह सकते हैं। इस आसन को करने से दिमाग और मन शांत रहता है। शरीर में खिचाव और तनाव दूर होने लगता है। जिसकी वजह से आप अच्छी नींद ले पाते हैं।
पाद हस्तासन भी माइग्रेन के दर्द में काफी लाभदायक आसन है। पादहस्तासन के लिए आपको सीधे खड़े होने की जरूरत है। अपने कूल्हों से झुके और अपनी अंगुलियों के साथ अपने पैरों को छूने की कोशिश करें। कुछ सेकेंड के लिए ऐसे ही रहें और फिर इन्हें मुक्त कर दें। नीचे की ओर झुकने पर पेट पर दबाव पड़ता है जिससे पेट की चर्बी कम होने में मदद मिलती है।