किसी भी महिला के जीवन में बच्चे का जन्म काफी कुछ बदल देता है। इस दौरान उनके जीवन में मानसिक और शरीरिक तौर पर कई बदलाव होते हैं। डिलिवरी के बाद महिलाओं में मॉर्निंग सिकनेस, कमर के आसपास दर्द होना और गर्भावस्था के दौरान वजन का बढ़ना जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। अगर सी सेक्शन डिलीवरी है तो अमूमन पेट बढ़ ही जाता है। लेकिन आप प्रेगनेंसी के बाद बढ़े हुए पेट और वजन को बेहद आसानी से व्यायाम और योगा का सहारा ले कम कर सकती हैं। एक्सरसाइज और योगा की सहायता से आप पहले जैसी सुंदर और सुड़ौल बन सकती हैं। लेकिन प्रसव के दो महीने के बाद ही किसी प्रकार का योग करना चाहिए। आइए जानते हैं कुछ खास योगासनों के बारे में जो डिलीवरी के बाद बढ़े वजन को घटाने में मदद कर सकता है।
डिलिवरी के बाद बढ़े वजन को आसानी से कम करेंगे ये 5 योगासन, नियमित करें अभ्यास
हलासन
हलासन करने से भी शरीर में रक्त संचार तेजी से होने लगता है , जिसके वजह से हमारा चेहरा चमकने लगता है। हलासन करने के लिए सबसे पहले जमीन पर दरी बिछा लें। इसके बाद जमीन पर बिछी दरी पर सीधा लेट जाएं। अब अपने दोनों हाथो को जमीन पर रखें और पैरों को आपस में जोड़ लें। अब अपने दोनों पैरो को धीरे से उठाकर अपने नितम्ब को भी हल्का सा ऊपर उठा लें। अब अपने हाथो की मदद से अपने दोनों पैरो को सिर के पीछे जमीन की तरफ ले जाएं। अब अपने पैर और घुटनों को सीधे रखें और अपने हाथों को नितंम्ब के बगल पर ही रखें। इस स्थिति में थोड़ी देर रहने के बाद वापस आ जाएं। ध्यान रहे कि अगर किसी व्यक्ति को च्च तथा निम्न रक्तचाप एवं हृदय की समस्या है तो उसे यह आसान नहीं करना चाहिए।
भुजंगासन
भुजंगासन पेट के लिए बेहद फायदेमंद है। इस आसन को करने के लिए पहले पेट के बल लेट जाएं और अपनी हथेलियों को अपने कंधे की सीध में लेकर जाएं। इस दौरान अपने दोनों पैरों के बीच की दूरी को कम करें साथ ही पैर को सीधा तथा तना हुआ रखें। अब सांस भरते हुए शरीर के अगले हिस्से को नाभि तक उठाएं। ध्यान रखें कि कमर के ऊपर ज्यादा जोर न पड़े। धीरे-धीरे क्षमता बढ़ाने का प्रयास करें। योग के अभ्यास के समय धीमे सांस भरे और फिर छोड़ें।
वीरभद्रासन
वीरभद्रासन से पीठ में खिंचाव पैदा होता है तथा कंधे, बाजू और पीठ की मांसपेशियां सबल होती हैं। सीधे तनकर खड़े हों। अब अपने दाएं पैर को 2 से 4 फीट तक आगे ले जाएं। दाएं घुटने को हल्का-सा मोड़ दें और इस बात का ध्यान रखें कि बायां पैर सीधा हो तथा उसका तलवा जमीन के साथ लगा हो। गहरी सांस लेते हुए दोनों हाथों को ऊपर करें। कंधों को आरामदायक स्थिति में रहने दें और दोनों कानों को अपने कंधे के पास न आने दें। फिर सांस धीरे-धीरे छोड़ते हुए पूर्वावस्था में आ जाएं। इस प्रकिया को बाएं पैर से भी दोहराएं।
अनुलोम विलोम प्राणायाम
इस प्राणायाम में नाक के बाएं छिद्र से सांस खिंचते हैं तो दाहिने छिद्र से सांस बाहर करते हैं। इसी प्रकार यदि दाएं छिद्र से सांस खिंचते हैं तो बाएं छिद्र से सांस बाहर निकालते हैं। इस प्राणायाम के नियमित अभ्यास से शरीर की समस्त नाड़ियों का शोधन होता है, जिससे वे स्वच्छ और निरोग बनी रहती है।