आज के समय में इंसान की जिंदगी इतनी तेज और रफ्तार वाली हो चुकी है कि वह अपने खान-पान से लेकर शारीरिक गतिविधियों पर उचित ध्यान नहीं दे पा रहा है। इस वजह से वह स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं से परेशान है। गठिया भी इन्ही परेशानियों में से एक है। गठिया या आर्थराइटिस हड्डियों के जोडों की बीमारी है। ऑफिस में लगातार बैठकर काम करना या ज्यादा देर तक बैठे रहने के कारण जोडों में जकडन होने से भी यह रोग होता है। इसके दर्द की वजह से लोगों को बहत सारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। आर्थराइटिस के प्रति लोगों को जागरुक करने के लिए साल 1996 में 12 अक्टूबर के दिन विश्व गठिया दिवस की स्थापना की गई। तब से हर साल इस दिन को गठिया दिवस के रूप में याद किया जता है। आर्थराइटिस एक ऐसी बीमारी है जो उम्र नहीं देखती है। लेकिन योगा के कुछ आसनों का अभ्यास कर आप गठिया के दर्द से राहत पा सकते हैं। आइए जानते हैं इन योगासनों के बारे में...
World Arthritis Day: आर्थराइटिस के दर्द से हैं परेशान तो इन 5 योगासनों का करें अभ्यास
मत्स्यासन
मत्स्यासन के अभ्यास से गठिया के रोगी को बहुत लाभ मिलता है। इस आसन से पेट की सभी मांसपेशियों का व्यायाम हो जाता है। इस आसन के करने से पेट में गैस और कब्ज की समस्या नहीं होती है। इसे करने के लिए दण्डासन में बैठकर दाएं पैर को बाएं पैर पर रखकर अपनी रीढ़ की हड्डी को सीधा रखें। अब अपने हाथों का सहारा लेते हुए पीछे की ओर अपनी कोहनियां टिकाकर लेट जाएं। पीठ और छाती ऊपर की ओर उठी तथा घुटने भूमि पर टिकाकर रखें। अब अपने हाथों से पैर के अंगूठे पकड़ें। ध्यान रखें आपकी कोहनी जमीन से लगी होनी चाहिए।
शवआसन
शव अर्थात मुर्दा शरीर को मुर्दे समान बना लेने के कारण ही इस आसन को शवआसन कहते हैं। इस आसन को करने के लिए पीठ के बल लेटकर दोनों पैरों को आराम से फैला लें। अपने पैरों के पंजों को बाहर और एडि़यों को अंदर की ओर रखें। अपने दोनों हाथों को शरीर से करीब 6 इंच की दूरी पर रखें। अपनी हाथों की अंगुलियां मुड़ी हुई, गर्दन सीधी रखें। इस आसन को करते समय अपनी आंखो को बंद रखें।
प्राणायाम
प्राणायाम करने के लिए किसी समतल जगह पर चटाई बिछाकर पालथी मारकर बैठ जाएं। अब बाएं नाक को दबाकर दाहिने नाक से सांस को अंदर करके दोनों नाकों से सांस को बाहर निकालें। गठिया के मरीजों को प्राणायम करने से बहुत ही राहत मिलती है। सुबह-सुबह साधारण प्राणायम करने से इस रोग से होने वाले दर्द में आपको राहत मिलेगी।
सेतुबंधासन
सेतुबंधासन को करने के लिए पीठ के बल लेट जाएं और अपने हाथों को शरीर के बगल में रखें। अब हथेली को जमीन से सटाकर रखें और पैरों के घुटने मोड़ें ताकि पैर के तलवे जमीन से लग जाएं। अब आप सेतुबंधासन की प्रारंभिक स्थिति में है। अब धीरे-धीरे सांस लेते हुए अपने कमर को जितना हो सके ऊपर उठाएं, जिससे आपका शरीर एक सेतु या पुल का आकार ले ले। अब इस स्थिति मेें सामान्य रूप से सांस लें और छोड़ें और 10 से 30 सेकेंड तक इसी मुद्रा में बने रहें। अब सांस छोड़ते हुए अपने कमर को वापस जमीन पर लाएं और पुन: शवासन के मुद्रा में आ जाएं और आराम करें।