सूर्यनमस्कार योग का अभ्यास वर्षों से कई प्रकार के स्वास्थ्य लाभ के लिए किया जाता रहा है। सूर्य नमस्कार 12 शक्तिशाली योग मुद्राओं का एक संयोजित अभ्यास है। इसकी नियमित आदत बनाकर कार्डियोवस्कुलर स्वास्थ्य से लेकर शरीर और दिमाग को स्वस्थ और फिट बनाए रखने तक में मदद मिल सकती है। सुबह खाली पेट सूर्य नमस्कार का अभ्यास करना सबसे अच्छा माना जाता है। इसके अद्भुत स्वास्थ्य लाभ को देखते हुए विशेषज्ञ इस योग को 'अल्टीमेट आसन' के रूप में भी वर्गीकृत करते हैं।
Yoga Tips: सूर्यनमस्कार के ये तीन योगासन 20 तरह की स्वास्थ्य समस्याओं को कर सकते हैं दूर, जरूर करें दिनचर्या में शामिल
प्राणामासन योग का अभ्यास
प्राणामासन योग, सूर्यनमस्कार आसन का सबसे आसान और प्रभावी अभ्यास माना जाता है। सीधे खड़े होकर किया जाने वाला यह योग मुद्रा शारीरिक और मानसिक दोनों ही तरह की सेहत को विशिष्ट लाभ दे सकता है। प्राणामासन योग तंत्रिका तंत्र को मजबूत बनाने, पाचन में सुधार करने, शरीर की मुद्रा को बेहतर बनाए रखने और मानसिक शांति को बढ़ावा देने के लिए काफी फायदेमंद अभ्यास है। सभी लोगों को इसे नियमित रूप से दिनचर्या का हिस्सा जरूर बनाना चाहिए।
पर्वतासन योगासन
पर्वतासन या माउंटेन पोज योग का अभ्यास कलाई और पैरों को मजबूत करता है। यह सिर में रक्त के संचार को बढ़ावा देने के साथ हृदय और फेफड़ों की मांसपेशियों को स्वस्थ बनाए रखने में भी सहायक है। इसके अलावा नियमित रूप से पर्वतासन का अभ्यास करने वाले लोगों को रीढ़ की हड्डी, कंधे, घुटने और टखने के दर्द से राहत मिल सकती है। इस योगासन को दिनचर्या में शामिल करना आपके लिए विशेष लाभप्रद हो सकता है।
भुजंगासन का अभ्यास
भुजंगासन जिसे कोबरा पोज के रूप में भी जाना जाता है, यह सूर्यनमस्कार के सबसे प्रभावी आसनों में से एक है। भुजंगासन का अभ्यास रीढ़ को मजबूत करके छाती और फेफड़ों, कंधों और पेट की बेहतर स्ट्रेचिंग करने में सहायक है। अक्सर तनाव और थकान से परेशान रहने वाले लोगों के लिए भी इसका अभ्यास मदद करता है। साइटिका और अस्थमा के लक्षणों को कम करने में भी इस योग को काफी कारगर बताया गया है।
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नोट: यह लेख योगगुरु के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है। आसन की सही स्थिति के बारे में जानने के लिए किसी विशेषज्ञ से संपर्क कर सकते हैं।
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