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रोजाना सूर्य नमस्कार करने के हैं काफी फायदे, जानें यहां

Wed, 28 Aug 2019 11:06 AM IST
पंखुड़ी सिंह लाइफस्टाइल डेस्क
लाइफस्टाइल डेस्क Published by: पंखुड़ी सिंह Updated Wed, 28 Aug 2019 11:06 AM IST
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practice surya namaskar yoga in daily every morning for better life

सूर्य नमस्कार 12 आसनों का एक ऐसा समूह है, जो शरीर की कोशिकाओं के साथ-साथ रक्त संचालन, पाचन, नाड़ी और ग्रंथितंत्र को सक्रिय, और संतुलित बनाता है। यह गतिशील और स्थिर दोनों प्रकार के आसनों का एक विकल्प प्रस्तुत करता है। यह स्वयं अपने आप में एक पूर्ण व्यायाम है। जब भी आपको समय मिले (सुबह या शाम) तो इसका अभ्यास करें। अधिकतर यही सलाह दी जाती है कि सुबह योग करना ज्यादा लाभदायक होता है। 

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प्रणामासन
दोनों पैर के पंजों को आसन में मिलाते हुए सीधे खड़े हो जाएं। दोनों हाथों की हथेलियों को सीने के सामने प्रणाम की मुद्रा में रखें। 

हस्त-उत्तानासन
अब दोनों हाथों को सिर के ऊपर उठाते हुए हाथ और सिर को पीछे ले जाएं। 

पादहस्तासन
हस्त उत्तानासन के अभ्यास के बाद सांस धीरे-धीरे बाहर निकालते हुए धड़ को आगे की ओर इतना झुकाएं कि हथेलियां दोनों पैरों के बगल में जमीन पर आ जाएं। माथा घुटने को स्पर्श करता हो। पैर सीधे रखें। 
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अश्व संचालन आसन
अब दांये पैर को जितना संभव हो, पीछे ले जाएं। बांये पैर को दोनों हाथों के बीच में घुटने से मोड़कर रखें। सिर को पीछे उठाएं, कमर को धनुषाकार बनाएं और दृष्टि को ऊपर की तरफ रखें। 

पर्वतासन
अब सांस अंदर लेते हुए बांए पैर को भी दांये पैर के पास पीछे ले जाकर नितंब को अधिकतम ऊपर की ओर ले जाएं। सिर को दोनों हाथों के बीच में रखें। प्रयास करें कि एड़ियां जमीन को स्पर्श करें। 

अष्टांग नमस्कार
पर्वतासन के अभ्यास के बाद सांस बाहर निकालते हुए पूरे शरीर को नीचे जमीन पर इस प्रकार लाएं कि शरीर के आठ अंग जमीन पर हों और बाकि अंग जमीन के ऊपर। ठुड्डी, दोनों हथेलियां, छाती, दोनों घुटने और दोनों पंजे जमीन को स्पर्श करने के कारण ही इसे अष्टांग नमस्कार कहते हैं। 
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भुजंगासन
अब सिर को ऊपर उठाएं। हाथों को सीधा कर लें। यह क्रिया सांस अंदर लेते हुए करें। कमर के ऊपर का भाग जमीन से ऊपर और कमर के नीचे का भाग जमीन पर रखें। 

पर्वतासन
स्थिति 8 में पुन: पर्वतासन में आएं। सजग रहते हुए ऊं मरीच्ये नम: मंत्र का उच्चारण करें।

अश्वसंचालन आसन
इस स्थिति में सांस बाहर निकालते हुए फिर से अश्वसंचालन आसन में आएं। इस स्थिति में बांया पैर आगे तथा दांया पैर पीछे रहता है।
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पाद हस्तासन
अब ऊं सवित्रे नम: नामक मंत्र का उच्चारण करते हुए वापस पादहस्तासन में आएं।

हस्त उत्तानासन
ऊं अर्काय नम: नामक मंत्र का उच्चारण करते हुए फिर से हस्त उत्तानासन में वापस आएं। 

प्रणामासन
अंत में ऊं भास्काराय नम: मंत्र का उच्चारण करते हुए प्रणामासन में वापस आएं।

बेहतर परिणाम के लिए शाकाहारी भोजन लें
सूर्य नमस्कार का अभ्यास करने वाले व्यक्ति को पौष्टिक और शाकाहारी भोजन करना चाहिए। 
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