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अयंगर योगः दिवाली पर करें यम-नियम और वीरासन के फायदों की बात

Thu, 19 Oct 2017 09:25 AM IST
रजवी एस मेहता
रजवी एस मेहता Updated Thu, 19 Oct 2017 09:25 AM IST
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Iyengar Yoga: This Diwali lets talk about benefits of Veerasana with Yama rules
वीरासन के फायदे

दिवाली का समय खुशियां मनाने का होता है। ये मौका है बुराई पर अच्छाई की जीत का जश्न मनाने का, सगे-संबंधियों के साथ मिठाईयां बांटकर भविष्य के लिए नए सपने संजोने का। वैसे तो हमारा वित्तीय वर्ष अप्रैल में शुरू होता है। बावजूद इसके हम साल की शुरूआत दिवाली पर बहीखातों की पूजा करके करते हैं। यह त्योहार अच्छे व्यवसाय और बेहतर जीवन के लिए नई उम्मीदों का त्योहार है। 



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Iyengar Yoga: This Diwali lets talk about benefits of Veerasana with Yama rules
वीरासन के फायदे

दिवाली रावण पर विजय पाने के बाद भगवान राम की अयोध्या वापसी का प्रतीक भी है। यह त्योहार प्रतीक है कि कि अच्छाई की हमेशा बुराई पर जीत होती है। एक अच्छे राजा होने के बावजूद रावण बुराई को दर्शाता है। हालांकि वह भगवान शिव का बहुत बड़ा भक्त था। वह विद्वान होने के साथ एक अच्छा शासक भी था। जबकि भगवान राम मर्यादा पुरूषोत्तम हैं - 'एक उत्तम पुरूष'।  इसलिए उन्हें भगवान कहते हैं। मगर रावण कुछ हद तक 'मानव' था, हम जैसे साधारण मनुष्यों की तरह । जिसमें अच्छाई और बुराई दोनों चीजें शामिल हैं।

Iyengar Yoga: This Diwali lets talk about benefits of Veerasana with Yama rules
रावण जैसे गुण का मतलब अच्छाई और बुराई से

मुझे यकीन है कि कई लोग मेरी इस बात को पसंद नहीं करेंगे । कुछ लोग कहेंगे कि मेरे भीतर रावण जैसे गुण नहीं हैं। आपकी हिम्मत कैसे हुई हमें रावण कहने की?  मैं आपको बता दूं कि यहां मेरा मतलब उस अच्छाई और बुराई से है जो हम सबके अंदर होती हैं। अब यह परिस्थितियों, जगह और समय  पर निर्भर करता है कि हमारे भीतर की बुराई या अच्छाई कब उभरकर सामने आएगी। लेकिन वह कुछ न कुछ मात्रा में हम सबमें होती अवश्य है। 

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Iyengar Yoga: This Diwali lets talk about benefits of Veerasana with Yama rules
बैठकर सोचा है कभी कि क्या यमों का पालन कर रहे हैं 

हमारे माता-पिता, शिक्षक, गुरुओं ने हमें सिखाया है कि हमें अपनी जिंदगी कैसे जीनी चाहिए और यही गुरुमंत्र हमने अपनी आगे की पीढ़ी को भी दिया है। जिंदगी कैसे जीनी है ये हमे पुराण ने भी सिखाया है। उदाहरण के लिए पतंजलि योग सूत्र में  5 तरह के यम के बारे में बताया गया है - अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्र्मचर्य और अपरिग्रह। अस्तेय अर्थात अचौर्य। दूसरे की वस्तु को पाने की लालसा न होना। अपरिग्रह यानी एक सीमा से ज्यादा संग्रह न करना। हममें से बहुत लोग ये सूत्र समझते होंगे।  लेकिन क्या हमने कभी एक पल के लिए भी ईमानदारी से बैठकर ये सोचा है कि क्या हम इन सभी यमों का पूरी तरह से पालन कर रहे हैं? 

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हम कूटनीतिक चतुराई से झूठ को छिपा ले जाते हैं

Iyengar Yoga: This Diwali lets talk about benefits of Veerasana with Yama rules

पहला यम है सत्य। क्या हम सत्य के करीब हैं? हमारे पास बोलने के लिए सफेद झूठ होता है। हम बड़ी कूटनीतिक चतुराई से झूठ को छिपा ले जाते हैं। अहिंसा तो हमारे भीतर एक हद तक जन्मजात होती ही है। कौन है जिसे कभी गुस्सा नहीं आया? क्या हम कभी चोरी नहीं करते? हो सकता है हमने कभी किसी दुकान से कोई चीज न उठाई हो लेकिन क्या हमने कभी विचारों की चोरी नहीं कि ? क्या हम हमेशा किसी विचार के लिए उस विचार के मूल विचारक को श्रेय देते हैं? रही बात आवश्यकता से अधिक संग्रहण की तो  गुरु अयंगर ने एक बार कहा था, लालच और जरूरत में अंतर होता है लेकिन अनजाने में हमें नहीं पता होता कि कब हम उस सीमा को पार कर देते हैं।  हो सकता है कि हम कालाबाजारी के लिए जमाखोरी न करते हों लेकिन क्या रोजमर्रा की खरीदारी में भी जरुरत से ज्यादा तो चीजें नहीं ले लेते?  ब्रह्मचर्य का भी कितना पालन हम कर पाते हैं? 

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