बदलाव ही जीवन का एकमात्र सत्य है। समय के साथ सब कुछ बदलता रहता है। बावजूद इसके कई बार हम महसूस करते हैं कि हमारा 'वक्त' आज की पीढ़ी के मुकाबले सबसे अच्छा समय था। हमें लगता है कि नई पीढ़ी कुछ नहीं जानती, हमने अपने समय में सबसे अधिक संघर्ष किया है। नई पीढ़ी को कुछ नहीं करना है या यूं कहें ये पीढ़ी काफी आलसी है। ये एक ऐसा विषय है जो लोग चाय पीते समय या सामाजिक चर्चा के दौरान अक्सर बतियातें हैं।
अयंगर योगः बदलते वक्त के साथ बदलते घुटने का इलाज करेगा सुप्तपदांगुष्ठासन
कुछ दशक पहले, लोग फर्श पर स्टोव जलाकर खाना पकाते थे। इतना ही नहीं खाना खाने के लिए भी लोग फर्श पर ही बैठते थे। ऐसा करते वक्त हमारे शरीर के कई हिस्से फर्श के संपर्क में आते थे। यहां तक कि शौचालय भी भारतीय शैली के अनुसार ही बने हुए थे, लेकिन शहरीकरण के साथ-साथ समय में कई बदलाव आए। रसोई में लोग अब खाना बैठकर बनाने की जगह खड़े होकर बनाते हैं।
लोग अब फर्श पर बैठने की जगह सोफे और कुर्सियों का इस्तेमाल करते हैं। इतना ही नहीं शौचालयों में भी पश्चिमी झलक देखी जाती है। अब सिर्फ हमारे पैर ही फर्श को छूते हैं जबकि हमारा शेष शरीर फर्श से दूर रहता है।
हालांकि लोगों को पहले का समय असुविधाजनक और आज का समय सुविधाजनक दिखता है, जबकि कुछ लोगों को लगता है कि पहले के समय में अनजाने में ही हम व्यायाम कर लेते थे लेकिन आधुनिक समय में हमें व्यायाम करने के लिए समय निकालकर जाना पड़ता है और अगर हम ऐसा नहीं करते हैं तो हमें कई परेशानियां झेलनी पड़ती हैं। जिनका नाम है 'जीवन शैली संबंधी विकार' जिसमें हम अपनी कई समस्याओं के लिए अपनी बदलती जीवन शैली को जिम्मेदार मानते हैं।
जैसा कि मैंने पहले भी कहा है,बदलाव ही एकमात्र सत्य है और जिसे हम सबके स्वीकारना ही होगा। कोई भी व्यक्ति पुराने के साथ नई चीजों की तुलना नहीं कर सकता है। बावजूद इसके एक बात जो दिखाई दे रही है वो हैं कुछ विकार, जो अब काफी सामान्य हो गए हैं। जिसमें एक आम समस्या है घुटनों में दर्द विशेषकर ऐसा दर्द जो मध्यम आयु वर्ग की महिलाओं के घुटनों में होता है।
यदि किसी व्यक्ति को सीढ़ियों से नीचे उतरने पर घुटनों में परेशानी होती है तो यह संकेत घुटने से जुड़ी समस्या की ओर है। हम लोग अक्सर घुटने के दर्द को या तो नजरअंदाज कर देते हैं या फिर एस्केलेटर या एलिवेटर का इस्तेमाल कर लेते हैं। झुकने या फर्श पर बैठने से होने वाले दर्द की वजह से हम फर्श पर बैठना भी छोड़ देते हैं।
जबकि दर्द की वजह से ऐसी गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाना किसी समस्या का समाधान नहीं है बल्कि ऐसे समय तो हमें अपनी गतिविधियों को तेज कर देना चाहिए। ऐसे में योग वास्तव में आपकी मदद कर सकता है। इससे पहले कि मैं इस दर्द से राहत दिलाने वाले किसी एक आसन के बारे में बात करूं, हमें अपने शरीर को समझना चाहिए, खासकर घुटनों को।
जैसा कि ऊपर भी बताया गया है कि हम अब ज्यादातर अपने पैरों पर ही खड़े रहते हैं। आखिरकार हम सभी इंसान हैं, इसलिए यह स्वाभाविक सी बात है कि हम अपने पैरों पर ही खड़े होंगे लेकिन ऐसा करते समय हमारें जोड़ों पर काफी भार पड़ता है। जांघ की हड्डी की फीमर बोन शरीर में सबसे बड़ी हड्डी होती है। यह हड्डी जांघ की आगे और पीछे की मांसपेशियों द्वारा "अपनी जगह" में रखी जाती है।
जब ये मांसपेशियां सुस्त या कमजोर या बहुत भारी हो जाती हैं तब घुटनों को नुकसान होने लगता है। भारोत्तोलन से जुड़े लोगों का एक उदाहरण लेते हैं। उनकी जांघ की मांसपेशियां बड़ी और भारी होने की वजह से उनके घुटनों को ज्यादा नुकसान होने का जोखिम होता है। हालांकि उनके साथ उनके कोच को भी इसकी जानकारी होती हैं। यही वजह है कि वे हमेशा अपने घुटनों पर नी सपोर्टर पहनते हैं।