शरीर को स्वस्थ रखने के लिए हम तरह-तरह के योग करते हैं। एक जैसे योग करने से कई बार हम परेशान हो जाते हैं। हमारा शरीर भी योग के लिए नया बदलाव की मांग करता है। अगर आप भी योग में कोई बदलाव चाहते हैं तो आपको एक्रो योग करना चाहिए। वक्त के साथ योग में भी काफी बदलाव आ रहे हैं। योग में डांस, एरोबिक्स, एरियल, अंडर वाटर जैसे कई मूव्स होते है, एक्रो योगा भी कुछ इसी तरह का योग है।
फिट रहने के लिए करें एक्रो योग, जानें इस योग के फायदे
क्या है एक्रो योग
एक्रो योग में दो लोग शामिल होते हैं। इस योग को करने से बॉडी कोऑर्डिनेशन और कॉन्फिडेंस लेवल बढ़ता है। एक्रो योग को हर दिन 45 मिनट से 1 घंटे तक किया जा सकता है। इस योग को करने से आपके शरीर की ताकत में इजाफा आता है और पेट की चर्बी कम होती है। इसे करने से आपके पेट, जांघ, बाजू को सही आकार मिलता है।
एक्रो योग को करने से पहले कई बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। आप अगर इस योग को करने जा रहे हैं तो आपको बेस, फ्लायर और स्पॉटर का ध्यान रखना जरूरी है। बेस, हमेशा जमीन से जुड़ा होता है , जो फ्लायर को ऊपर करने में मदद करता है। फ्लायर, बेस के सहारे से हवा में उड़ता है। फ्लायर में एक व्यक्ति पैरों के जोड़ पर ध्यान रखता है और सुनिश्चित करता है कि फ्लायर सही काम करें।
एक्रो योग करने के तरीके
बर्ड पोज- सबसे पहले आप मैट पर सीधे लेटकर पैरो को ऊपर उठाएं। इसके बाद फ्लायर द्वारा ऊपर उठे और अपने पैरों की उंगलियों को अपने पार्टनर की उंगलियों पर लगाएं। यह फ्लायर द्वारा सुनिश्चित किया जाएगा कि आपके पैरों का बाहरी हिस्सा दूसरे पार्टनर के कूल्हे की हड्डी पर सही से रखा हो। अब आप अपने हाथ को आगे बढ़ाए और मैट पर लेटे पार्टनर भी अपने हाथ को उठाकर फ्लायर की हथेली थामें। इसके बाद सासं अदंर लेते हुए अपने घुटनों को मोड़ ले। फिर सांस छोड़ते समय अपने पैर और बाहें सीधी करें। अपना कंधे का सारा भार कलाइयों पर दें। ऐसा करते हुए इस बात को ध्यान देना जरुरी है कि आपके और फ्लायर के कंधे एक समान हो।
फोल्डेड लीफ - इसे योग को करने के लिए अपने पैरों को ऊपर उठांए और अपने पार्टनर के कूल्हें के अंदर की तरफ को मोड़े। फिर अपने हाथ को आगे लेकर जाये और धीरे-धीरे अपने घुटनो को झुकाकर अपने पार्टनर को ऊपर उठांए। इसके बाद अपनी बाहों को आराम दें और पीछे की तरफ जांए। फिर पैरों को जमीन पर रखें और अपने शरीर को आराम दें।
सावधानी बरतें
यह योग आपको विशेषज्ञ की निगरानी में ही करना चाहिए । इस योग को खुद से तभी करें जब आप इस योग को अच्छे से समझ चुके हो।