प्रतियोगी परिक्षाओं में बेहतर परिणाम पाने के लिए करें ये योगासन, बढ़ जाएगी एकाग्रता
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पश्चिमोत्तानासन
पश्चिमोत्तानासन का अभ्यास सवेरे करें। खाना खाने के बाद इस आसन को करने का प्रयास न करें क्योंकि ऐसा करने से सारा जोर पेट पर पड़ सकता है। शुरुआत में हो सकता है यह आसन कठिन लगे लेकिन समय के साथ यह आसानी से बनने लगता है। इस आसन को करने के लिए पैरों को आगे की तरफ लंबा करें और झुकते हुए पैरों की ऊंगलियों को हाथों से छूने का प्रयास करें। इस आसन को 30- 40 सेकंड तक करने की कोशिश करें।
उष्ट्रासन
उष्ट्रासन पीछे की तरफ किया जाने वाला आसन है। इस आसन में इंसान की मुद्रा ऊंट के समान दिखाई देती है। उष्ट्रासन करने से शरीर के चक्र तो ठीक होते ही हैं, साथ ही यह एकाग्रता के साथ मन में संतुलन स्थापित करता है। ये नसों को सक्रिय करने के साथ ही शरीर के आलस्य को भी दूर भगाता है। इसे करने से शरीर में दिनभर ऊर्जा बनी रहती है। यह आपकी बिगड़ी हुई जीवनशैली को सुधारने में भी सहायता करता है।
वृक्षासन
वृक्षासन करने से आत्मविश्वास बढ़ता है। यह बड़ी आसानी से आपके तंत्रिका तंत्र को शांत करता है। इसे करना बिल्कुल भी मुश्किल नहीं है। शुरुआत में संतुलन बनाने में जरूर थोड़ी समस्या आती है लेकिन धीरे-धीरे यह आसानी से होने लगता है। वृक्षासन को आसानी से एक मिनट तक किया जा सकता है। वृक्षासन के दौरान संतुलन बनाए रखने के लिए अपना ध्यान किसी वस्तु पर जरूर केंद्रित करें।
गरुड़ासन करना बहुत आसान है। इसे करने के लिए शरीर का संतुलन बनाए रखना होता है। शरीर का संतुलन बनाने के लिए आपको एकाग्रता की आवश्यकता होती है, जो कि आसन करने से आपको प्राप्त होती है। गरुड़ासन पैरों की मांसपेशियों को भी मजबूत करता है। इसे करने से सारे नकारात्मक विचार दिमाग से बाहर निकल जाते हैं और मस्तिष्क में सकारात्मक विचारों का संचार होता है। कम से कम 10 सेकंड तक इस आसन का नियमित अभ्यास अवश्य करें।