बीपी की परेशानी जानलेवा है, पर एक ऐसा 'रामबाण' भी है जो इससे लड़ने की ताकत देती है। असर भी इतनी तेजी से कि डॉक्टर की दवाई न कर पाए।
जब रक्त की धमनियों का प्रेशर 140/90 तक पहुंच जाए तो उसे हाइपरटेंशन कहते हैं। इससे ब्रेन स्ट्रोक, हार्ट, किडनी और आंखों की बीमारियों का खतरा दो से तीन गुना बढ़ जाता है। वजह, हाई बीपी होने पर ब्लड वेसल्स पर दबाव बनता है और वे सिकुड़ जाती हैं। इससे दिल को ब्लड पंप करने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। अक्सर लोग ब्लड प्रेशर को बीमारी नहीं मानते, जबकि यह गंभीर बीमारियों की मूल जड़ होती है।
ब्लड प्रेशर होने के कारण
1. मोटापा बढ़ना 2. एक्सरसाइज न करना 3. फैमिली में ही होना 4. लगातार तनाव में रहना 5. स्मोकिंग करना 6. थायराइड व ट्यूमर जैसी कई बीमारियां
कितना होना चाहिए बीपी
नार्मल बीपी 120/80 से कम होना चाहिए। इससे ऊपर की स्टेज को प्री-हाइपरटेंशन कहते हैं। यदि बीपी 120 से 139, 80 से 89 के बीच है तो उस स्थिति में भी स्ट्रोक, किडनी, हार्ट अटैक, डायबिटीज और आंखों की बीमारी बढ़ जाती है। 140/90 की स्थिति को हाइपरटेंशन कहते हैं, जो सबसे खतरनाक लेवल होता है।
कब बीपी की जांच करनी चाहिए
विशेषज्ञों का मानना है कि 40 की उम्र में हर व्यक्ति को ब्लड प्रेशर चेक करवाना चाहिए। यदि सामान्य आता है तो हर छह महीने में चेक करवाते रहना चाहिए। किसी मरीज में प्री-हाइपरटेंशन का स्तर आता है तो वह डॉक्टर से संपर्क करें और हर महीने चेकअप करवाएं। बीपी चेक करने से आधा घंटा पहले चाय-कॉफी न पिएं और न स्मोकिंग करें।