शरीर के बेहतर ढंग से काम करते रहने के लिए मस्तिष्क का स्वस्थ रहना बहुत आवश्यक माना जाता है। हालांकि चिंता और तनाव की बढ़ती समस्याओं ने मस्तिष्क की सेहत को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, मस्तिष्क पूरे शरीर के संचालन का काम करता है ऐसे में इस अंग में होने वाली किसी भी तरह की समस्या का असर पूरे शरीर की कार्यप्रणाली पर देखा जा सकता है।
Yoga Tips: भ्रामरी प्राणायाम मस्तिष्क को कर देता ही री-बूट, इसके अद्भुत स्वास्थ्य लाभ के बारे में जानिए
भ्रामरी प्राणायाम कैसे किया जाता है?
भ्रामरी प्राणायाम का अभ्यास काफी सरल और अत्यंत प्रभावी है। सभी उम्र के लोग आसानी से इसका अभ्यास कर सकते हैं। इस प्राणायाम को करने के लिए सबसे पहले किसी शांत और जगह पर बैठें। अपनी आँखें बंद करके उंगलियों से कान और आंखों को बंद कर लें। अपना मुंह बंद रखते हुए नाक से सांस लें और छोड़ें। सांस छोड़ने के दौरान ऊँ का उच्चारण भी कर सकते हैं। ऐसा करने से मस्तिष्क की तंत्रिकाओं में कंपन होता है जिसका मस्तिष्क के कार्यों पर विशेष प्रभाव देखा गया है।
भ्रामरी प्राणायाम करने से क्या लाभ है?
भ्रामरी प्राणायाम का अभ्यास आपके शारीरिक और मानसिक दोनों तरह की सेहत के लिए विशेष लाभकारी हो सकता है।
- तनाव, क्रोध और चिंता से राहत दिलाने के साथ उच्च रक्तचाप से पीड़ित लोगों के लिए यह अभ्यास काफी लाभदायक है।
- माइग्रेन की समस्या को कम करने में यह अभ्यास मदद करता है।
- प्राणायाम से एकाग्रता और याददाश्त में सुधार होता है।
- आत्मविश्वास को बढ़ावा देने में यह योगासन काफी फायदेमंग है।
- मन को शांत करने में भ्रामरी प्राणायाम के अभ्यास को काफी फायदेमंद माना जाता है।
- पढ़ाई करने वाले बच्चों में याददाश्त को ठीक करने का काफी कारगर अभ्यास है।
भ्रामरी प्राणायाम की सावधानी
भ्रामरी प्राणायाम को वैसे तो काफी लाभकारी माना जाता है पर कुछ स्थितियों में इसके लिए विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता होती है। सुनिश्चित करें कि आप अपनी उंगली कान के अंदर नहीं बल्कि कार्टिलेज पर लगाकर रखें। गुनगुनाते समय अपना मुंह बंद रखें, अपने चेहरे पर दबाव न डालें। किसी योग विशेषज्ञ से इस अभ्यास के बारे में जानकारी प्राप्त कर लें।
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नोट: यह लेख योगगुरु के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है। आसन की सही स्थिति के बारे में जानने के लिए किसी विशेषज्ञ से संपर्क कर सकते हैं।
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