एचआईवी संक्रमण/ एड्स को दुनियाभर के लिए बड़ा खतरा माना जा रहा है। हर साल लाखों नए लोग इस गंभीर बीमारी की चपेट में आ रहे हैं, जिसने वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ा दी है। फिलहाल दुनियाभर में साढ़े तीन करोड़ से अधिक लोग इस लाइलाज बीमारी के शिकार है, इतना ही नहीं हर साल इसके कारण लाखों लोगों को अपनी जान तक गंवानी पड़ रही है। दुनियाभर में बढ़ते एड्स के खतरे के बारे में जागरूक करने के लिए हर साल एक दिसंबर को विश्व एड्स दिवस मनाया जाता है। एचआईवी संक्रमण का फिलहाल कोई इलाज नहीं है, ऐसे में विशेषज्ञ सभी लोगों को इससे सुरक्षित रहने के उपाय करते रहने की सलाह देते हैं।
आज का योग: इम्यूनिटी को बढ़ावा देते हैं यह योगासन, एचआईवी संक्रमितों के लिए हो सकते हैं बेहद फायदेमंद
योग करना है विशेष लाभदायक
योग विशेषज्ञों के मुताबिक नियमित जीवन में योग को शामिल करके न सिर्फ कई प्रकार की गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से सुरक्षित रहा जा सकता है साथ ही यह आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली को भी मजबूती देने में सहायक है। एचआईवी संक्रमित अगर इम्यूनिटी को बढ़ाने वाले उपाय करते रहें तो यह न केवल संक्रमण की जटिलताओं से सुरक्षित रखने में सहायक है साथ ही इससे मनोबल भी बढ़ता है। कई सारे योगासन आपकी इम्यूनिटी को मजबूती दे सकते हैं।
प्राणायाम का करें अभ्यास
प्राणायाम का नियमित अभ्यास न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी विशेष लाभदायक हो सकता है। इ्म्यूनिटी को बढ़ावा देने के लिए प्राणायाम का अभ्यास किया जा सकता है। जिन लोगों में एचआईवी संक्रमण का निदान हो चुका है वह दिनचर्या में प्राणायाम को शामिल करके प्रतिरक्षा बढ़ाने के साथ संक्रमण की जटिलताओं का कम कर सकते हैं।
सूर्य नमस्कार है लाभदायक
सूर्य नमस्कार का नियमित अभ्यास करना सेहत के लिए विशेष लाभदायक माना जाता है। इम्यूनिटी को बढ़ावा देने के साथ वजन को नियंत्रित करने, पाचन तंत्र को मजबूती देने, तनाव को कम करने के साथ नींद संबंधी विकारों को दूर करने में इस योग के अभ्यास को लाभदायक माना जाता है। एचआईवी संक्रमित लोगों को जीवन की गुणवत्ता में सुधार करने के लिए नियमित रूप से सूर्य नमस्कार का अभ्यास जरूर करना चाहिए।
कपालभाति का अभ्यास
संपूर्ण स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने के साथ जीवन की गुणवत्ता में सुधार करने के लिए कपालभाति का अभ्यास करना विशेष फायदेमंद हो सकता है। रोजाना कपालभाति करने से लिवर और किडनी से जुड़ी समस्या ठीक होती है, साथ ही यह दिमाग को तनावमुक्त रखने में भी सहायक है। फेफड़ों की क्षमता को बढ़ाने के साथ शरीर से विषाक्त पदार्थों को निकालने और प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए इस योग का नियमित अभ्यास करना फायदेमंद हो सकता है।
------------------
नोट: यह लेख योग विशेषज्ञों के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है। आसन की सही स्थिति के बारे में जानने के लिए किसी योगगुरु से संपर्क कर सकते हैं।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।