Benefits Of Shavasana : शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए योग लाभकारी होता है। रोगों के निवारण के लिए नियमित योगाभ्यास करना चाहिए। कई तरह के योग हैं जो अलग अलग बीमारियों में असरदार हैं। इसमें से एक हैं शवासन। शवासन योग का अभ्यास आमतौर पर योगासनों के समापन में किया जाता है। शवासन के अभ्यास से शरीर रिलैक्स और रिचार्ज होता है। तनाव को दूर करने के लिए भी शवासन का अभ्यास कर सकते हैं। महज पांच मिनट शवासन के अभ्यास से शरीर रिलैक्स महसूस करने लगता है। हालांकि इस योगासन को सही तरीके से किया जाना जरूरी है। आइए जानते हैं शवासन के अभ्यास का सही तरीका और इस योग करते समय किन गलतियों को नहीं करना चाहिए।
Shavasana: शवासन के अभ्यास का सही तरीका और समय, जानें इसके फायदे
आइए जानते हैं शवासन के अभ्यास का सही तरीका और इस योग करते समय किन गलतियों को नहीं करना चाहिए
शवासन के फायदे
- इस आसन के अभ्यास से मस्तिष्क शांत और तनाव व हल्के अवसाद से राहत पाने में मदद मिलती है।
- शवासन पूरे शरीर को आराम देता है
- इस आसन से सिरदर्द, थकान और अनिद्रा की शिकायत को दूर किया जा सकता है।
- शवासन रक्तचाप कम करने में मदद करता है
- एकाग्रता और याददाश्त में सुधार के लिए नियमित शवासन का अभ्यास करना चाहिए।
शवासन के अभ्यास का सही तरीका
स्टेप 1- शवासन का अभ्यास करने के लिए मैट पर पीठ के बल आराम से लेट जाएं।
स्टेप 2- आंखें बंद करके दोनों टांगों को अलग अलग कर लें। शरीर पूरी तरह से रिलैक्स रखें।
स्टेप 3- ध्यान रखें कि आपके पैरों के दोनों अंगूठे साइड की ओर झुके हों। हाथ शरीर के साथ ही हों लेकिन थोड़ी दूरी पर रखें।
स्टेप 4- हथेलियों को खुला और ऊपर की ओर रखें। धीरे-धीरे शरीर के हर हिस्से की और ध्यान दें और सांस की गति धीमी रखें।
स्टेप 5- मेडिटेशन करते समय अगर आलस आए तो सांस की गति को तेज कर दें। आसन करते समय सोए नहीं।
स्टेप 6- शरीर और सांस पर फोकस रखें। 10-12 मिनट में जब शरीर पूरी तरह से रिलैक्स हो जाए तो नई ताजगी को महसूस कर पाएंगे। अब धीरे धीरे सुखासन की अवस्था में बैठ जाएं और आंखे खोल लें।
शवासन के दौरान सावधानियां
खुद से अभ्यास करना
भले ही शवासन करना सरल है लेकिन इसे खुद से शुरू नहीं करना चाहिए। हर किसी के लिए यह आसन नहीं है। अगर गर्भावस्था के आखिरी तीन महीने में हैं तो शवासन का अभ्यास न करें। इसके अलावा कमर में चोट होने या कमर का ऑपरेशन हुआ है तो भी शवासन नहीं करना चाहिए।
सोना नहीं चाहिए
शवासन के अभ्यास से शरीर रिलैक्स होता है। इस कारण अभ्यास के दौरान नींद आने की संभावना रहती है। इस दौरान नींद आने से योग का पर्याप्त लाभ नहीं मिल पाता। इसलिए सांस और पूरे शरीर पर ध्यान केंद्रित रखें और योगासन के दौरान सोएं नहीं।
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